ईरान में सत्ता के लिए अंदरूनी रार! US संग होने वाली इस्लामाबाद शांति वार्ता पर लगा ब्रेक

ईरान की अंदरूनी सत्ता खींचतान के चलते अमेरिका के साथ इस्लामाबाद में प्रस्तावित शांति वार्ता अंतिम समय पर रुक गई. रिपोर्ट के मुताबिक राष्ट्रपति पेजेशकियन खेमे और खामेनेई के करीबी धड़े में परमाणु मुद्दे और वार्ता की शर्तों पर मतभेद उभरे.

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ईरान और अमेरिका के बीच फिलहाल सीजफायर जारी है (Photo: Reuters/File) ईरान और अमेरिका के बीच फिलहाल सीजफायर जारी है (Photo: Reuters/File)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 23 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 10:55 PM IST

ईरान और अमेरिका के बीच आठ हफ्तों से चल रहे युद्ध को खत्म करने के प्रयास एक बार फिर अधर में लटक गए हैं. ताजा रिपोर्टों के अनुसार, ईरान के भीतर जारी सत्ता-संघर्ष ने इस्लामाबाद में होने वाली प्रस्तावित शांति वार्ता को रोक दिया है, जिससे यह सवाल गहरा गया है कि आखिर तेहरान में वास्तविक शक्ति किसके हाथों में है.

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रिपोर्ट के मुताबिक राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के सहयोगियों और सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई के दफ्तर से जुड़े ताकतवर धड़े के बीच मतभेद के चलते वार्ता रुक गई. सूत्रों के अनुसार प्रतिनिधिमंडल रवाना होने को तैयार था, लेकिन खामेनेई के करीबी सर्कल से संदेश आया कि परमाणु मुद्दे पर कोई चर्चा नहीं होगी और विदेश मंत्रालय की पिछली बातचीत पर भी नाराजगी जताई गई.

इसी के बाद विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कथित तौर पर कहा कि ऐसी शर्तों में बातचीत बेमानी होगी और कोई प्रगति संभव नहीं दिखती.

जेडी वेंस की यात्रा भी टली

इसी बीच यह अटकलें भी थीं कि अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की अगुआई में अमेरिकी टीम इस्लामाबाद पहुंच सकती है, लेकिन उनकी यात्रा भी फिलहाल टाल दी गई. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ सीजफायर अवधि बढ़ा दी और कहा कि तेहरान को जवाब तैयार करने के लिए और वक्त चाहिए.

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ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा कि ईरान खुद तय नहीं कर पा रहा कि उसका नेतृत्व किसके हाथ में है. उन्होंने हार्डलाइनर और मॉडरेट खेमों के बीच कलह को पागलपन भरा बताया.

हालांकि हालिया घटनाक्रम एक दूसरी तस्वीर भी दिखाते हैं. विश्लेषकों का कहना है कि सत्ता बिखर नहीं रही, बल्कि सैन्य-सुरक्षा तंत्र के इर्द-गिर्द और केंद्रीकृत हो रही है. इसमें इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC), सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल और सुरक्षा प्रतिष्ठान से जुड़े वरिष्ठ नेताओं की भूमिका अहम बताई जा रही है. IRGC प्रमुख अहमद वाहिदी और सुरक्षा अधिकारी मोहम्मद बाकर जोलगद्र का नाम प्रभावशाली चेहरों में लिया जा रहा है.

हॉर्मुज पर यू-टर्न ने बढ़ाए सवाल

इस्लामाबाद में शुरुआती दौर की बातचीत के बाद अराघची ने संकेत दिए थे कि हॉर्मुज खुला रह सकता है और परमाणु संवर्धन जैसे मुद्दों पर नरमी संभव है. लेकिन बाद में सरकारी समर्थक मीडिया ने इन बयानों की आलोचना की और कहा कि इससे ट्रंप को राजनीतिक लाभ मिला.

इसके तुरंत बाद ईरानी सेना ने अमेरिकी नौसैनिक मौजूदगी का हवाला देते हुए फिर हॉर्मुज बंद रखने का ऐलान कर दिया. यह फैसला उस पहले दौर की 21 घंटे लंबी वार्ता के गतिरोध के बाद आया.

ट्रंप की चेतावनी, तेहरान का पलटवार

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सीजफायर बढ़ाने से पहले ट्रंप ने चेतावनी दी कि अगर वार्ता विफल रही तो ईरान के ऊर्जा ढांचे को निशाना बनाया जा सकता है. उन्होंने ‘ऑपरेशन मिडनाइट हैमर’ का हवाला देते हुए दावा किया कि ईरान के परमाणु ठिकानों को पूरी तरह तबाह कर दिया गया है. साथ ही हॉर्मुज पर अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी जारी रखने की बात भी दोहराई.

इस पर ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकर गालिबाफ ने पलटवार करते हुए कहा कि वॉशिंगटन बातचीत को आत्मसमर्पण में बदलना चाहता है. उन्होंने कहा कि ईरान दबाव में बातचीत नहीं करेगा और उनके पास जंग के मैदान में खेलने के लिए नए पत्ते तैयार हैं.

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