आधी रात को ईरान के 'क्लस्टर' प्रहार से दहला इजरायल, यरुशलम और वेस्ट बैंक पर मिसाइल अटैक

ईरान ने इजरायल और वेस्ट बैंक पर क्लस्टर वॉरहेड युक्त मिसाइलों से भीषण हमला किया है. यह कार्रवाई अमेरिका द्वारा ईरानी पावर ग्रिड को नष्ट करने की धमकी के बीच हुई है. रिहायशी क्षेत्रों और नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाए जाने से मध्य पूर्व में मानवीय और आर्थिक संकट गहरा गया है.

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ईरान के मिसाइल हमले के बाद इजरायल में रातभर सायरन बजते रहे. (File Photo: ITG) ईरान के मिसाइल हमले के बाद इजरायल में रातभर सायरन बजते रहे. (File Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 23 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 5:30 AM IST

ईरान और इजरायल के बीच जारी युद्ध और खतरनाक होता जा रहा है. सोमवार आधी रात के बाद इजरायल, यरुशलम और वेस्ट बैंक का आसमान क्लस्टर वारहेड से लैस ईरानी मिसाइलों की रोशनी से दहल उठा. मिसाइल हमलों के बाद कई इलाकों में एयर रेड सायरन बज उठे और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए अलर्ट जारी किया गया.

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रॉयटर्स (की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने इस बार 'क्लस्टर वॉरहेड' वाली मिसाइलों का इस्तेमाल किया है, जो हवा में ही कई छोटे बमों में फट जाती हैं और एक बड़े क्षेत्र में तबाही मचाती हैं. पूरे इजरायल में रविवार सुबह से ही हवाई हमले के सायरन गूंज रहे हैं.

यह हमला डिमोना और अराद पर हुए पिछले हमलों के बाद इजरायल द्वारा तेहरान पर की गई बमबारी का जवाब माना जा रहा है. क्लस्टर मिसाइलों का उपयोग रिहायशी इलाकों के लिए अत्यंत घातक है. यरुशलम और वेस्ट बैंक में लाखों नागरिक इस समय बंकरों में शरण लेने को मजबूर हैं.

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इससे पहले ईरान ने चेतावनी दी थी कि अगर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 48 घंटे के भीतर ईरान के बिजली तंत्र पर हमला किया, तो ईरान खाड़ी क्षेत्र के देशों के ऊर्जा और पानी के संयंत्रों को निशाना बनाएगा. इससे आशंका बढ़ गई है कि युद्ध अब सैन्य ठिकानों से आगे बढ़कर नागरिक ढांचे तक पहुंच सकता है.

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शनिवार रात इज़रायल के अराद और डिमोना शहरों पर हुए मिसाइल हमलों में कई लोग घायल हुए थे. इसके बाद इज़रायली सेना ने जवाबी कार्रवाई करते हुए तेहरान में ठिकानों पर हमले की बात कही है. लगातार हो रहे हमलों और जवाबी हमलों से मिडिल ईस्ट में हालात और गंभीर होते जा रहे हैं.

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विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ऊर्जा और पानी जैसे नागरिक ढांचे पर हमले शुरू होते हैं, तो इसका असर सिर्फ युद्ध तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इससे वैश्विक बाजार, तेल की कीमतों और लाखों लोगों की जिंदगी प्रभावित हो सकती है. विशेषज्ञों का मानना है कि सोमवार सुबह जब वैश्विक बाजार खुलेंगे, तो तेल की कीमतों और शेयर बाजारों में भारी गिरावट या अस्थिरता देखी जा सकती है.  

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