अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के मौके पर संयुक्त राष्ट्र प्रमुख एंटोनियो गुटेरेस ने कहा कि प्राचीन भारत में अपनी गहरी जड़ों से निकला योग अब सचमुच ग्लोबल बन चुका है. उनके मुताबिक योग ने हर आस्था और हर संस्कृति के लाखों लोगों को सुकून पाने, ताकत बनाने और मकसद के साथ जीने में मदद की है.
गुरुवार को संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन ने संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में 12वां अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया. इस साल का विषय "योग फॉर हेल्दी एजिंग" रखा गया. संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय के नॉर्थ लॉन्स में गांधी प्रतिमा के पास योग मैट्स करीने से लगाए गए थे और योग साधकों, राजनयिकों, संयुक्त राष्ट्र अधिकारियों, डिप्लोमैटिक कॉर्प्स के सदस्यों और भारतीय-अमेरिकी समुदाय ने इसमें हिस्सा लिया. मंच पर 2028-29 कार्यकाल के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की अस्थायी सदस्यता की दावेदारी से जुड़ा एक बैनर भी लगाया गया था, जिस पर "#इंडिया4यूएनएससी 2028-29 पीस, प्लैनेट, प्रोग्रेस" लिखा था.
गुटेरेस ने क्या दिया संदेश
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर अपने संदेश में गुटेरेस ने कहा कि हम एक ऐसी प्राचीन परंपरा का जश्न मनाने के लिए साथ आए हैं, जो संतुलन, संपूर्णता और अपने शरीर और दुनिया के साथ शांतिपूर्ण जुड़ाव पर जोर देती है. उन्होंने इस साल के विषय "योग फॉर हेल्दी एजिंग" पर जोर देते हुए कहा कि यह दुनिया भर में बढ़ती उम्र वाली आबादी के बीच शारीरिक और मानसिक भलाई, गतिशीलता और गरिमा की अहमियत को दिखाता है. गुटेरेस ने कहा कि योग हमें सजगता, सम्मान और अपने लिए, अपने ग्रह के लिए और एक-दूसरे के लिए देखभाल सिखाता है. उन्होंने कहा कि इस अंतरराष्ट्रीय दिवस पर हमें अपने मानवीय परिवार के बुजुर्ग सदस्यों तक भी यही देखभाल बढ़ानी चाहिए और ऐसी दुनिया बनानी चाहिए जहां हर पीढ़ी स्वस्थ जीवन जी सके. उन्होंने अपना संदेश "नमस्ते" के साथ खत्म किया.
भारत की ओर से क्या कहा गया?
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत हरीश पर्वथनेनी ने कहा कि जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 12 साल पहले अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाने का विचार रखा था, तब उनकी सोच थी कि यह दुनिया के हर कोने तक पहुंचे, केवल व्यक्तिगत पहल न रहे बल्कि जन आंदोलन बने, जिसमें लोग स्वस्थ जीवन जिएं, वेलनेस पर ध्यान दें और आगे चलकर इससे अंतरराष्ट्रीय सहयोग भी मजबूत हो. पर्वथनेनी ने कहा कि सबसे "सरल" योग आसन "नमस्ते" है, जो मन और शरीर, इंसान और प्रकृति की एकता का प्रतीक है. इस साल का विषय योग और बढ़ती उम्र पर केंद्रित होने का जिक्र करते हुए उन्होंने हल्के अंदाज में कहा कि आप सभी तो युवा हैं, लेकिन हममें से कुछ लोगों को इस बात पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत होगी कि सहज तरीके से उम्र बढ़ने की प्रक्रिया में योग कैसे मदद कर सकता है.
योगमाता केइको आइकावा का अनुभव
81 साल की योगमाता केइको आइकावा, जिन्हें अंतिम ज्ञान हासिल करने वाली पहली महिला हिमालयन सिद्धा मास्टर बताया गया, ने सभा को संबोधित करते हुए कहा, "योग ने मेरी जिंदगी बदल दी." उन्होंने याद किया कि जब वह 18 साल की थीं, तब चेहरे पर अचानक मुहांसे निकल आए थे और उसी समय उन्होंने पहली बार योग आजमाया था. 60 साल से ज्यादा समय से योग का अभ्यास कर रहीं आइकावा ने कहा कि असली स्वास्थ्य सिर्फ बीमारी न होने का नाम नहीं है. उन्होंने कहा, "इसी तरह लंबी उम्र का मतलब सिर्फ ज्यादा साल जीना नहीं है. इसका मतलब है मकसद, कृतज्ञता, प्रेम और जीवंतता के साथ जीना."
आइकावा ने कहा कि दुनिया इस समय संघर्ष, बंटवारे, अकेलेपन, पर्यावरण से जुड़ी समस्याओं और मानसिक तनाव जैसी कई चुनौतियों से जूझ रही है, लेकिन शांति कोई असंभव सपना नहीं है. उन्होंने कहा, "शांति की शुरुआत हममें से हर एक से होती है. जब हमारे दिल में शांति होती है, तब हमारे परिवार में शांति होती है. जब परिवार शांति से रहता है, तब समुदाय शांतिपूर्ण बनता है... इसी तरह भीतर की शांति दुनिया की शांति तक पहुंचाती है. योग और ध्यान ऐसे मजबूत रास्ते हैं, जो हमें शांति की ओर ले जाते हैं."
इस मौके पर आर्ट ऑफ लिविंग समेत कई प्रशिक्षकों ने मौजूद लोगों के लिए आसन और व्यायाम, सांस लेने की तकनीक और ध्यान का विशेष सत्र कराया. साफ नीले आसमान, धूप और हल्की हवा वाले गर्मियों के दिन में लोगों ने पूरे मन से इसमें भाग लिया.
योग की यूनिवर्सल अपील को मान्यता देते हुए संयुक्त राष्ट्र ने दिसंबर 2014 में 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस घोषित किया था. अंतरराष्ट्रीय योग दिवस स्थापित करने वाला संयुक्त राष्ट्र महासभा का मसौदा प्रस्ताव भारत ने पेश किया था और रिकॉर्ड 175 सदस्य देशों ने उसका समर्थन किया था. यह प्रस्ताव सबसे पहले मोदी ने महासभा के 69वें सत्र के उद्घाटन के दौरान अपने संबोधन में रखा था. तब उन्होंने कहा था, "योग हमारी प्राचीन परंपरा का अमूल्य उपहार है." उन्होंने यह भी कहा था कि योग मन और शरीर, विचार और कर्म की एकता को सामने लाता है, यह हमारे स्वास्थ्य और कल्याण के लिए अहम समग्र दृष्टिकोण है, और योग सिर्फ व्यायाम नहीं बल्कि अपने भीतर, दुनिया और प्रकृति के साथ एकत्व का एहसास पाने का रास्ता है.
आजतक इंटरनेशनल डेस्क