'कोई समझौता नहीं', चीन के साथ मिलकर भूटान करने जा रहा ये काम तो मोदी सरकार ने किया आगाह

भारत डोकलाम में चीन की विस्तारवादी नीति का विरोध करता रहा है क्योंकि डोकलाम भारत के सिलिगुड़ी कॉरिडोर के करीब है. लेकिन चीन के दबाव में आकर भूटान डोकलाम कॉरिडोर को लेकर समझौता कर रहा है. भूटान के इस कदम पर भारत ने आगाह किया है.

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भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भूटान के प्रधानमंत्री लोटे छृंग (फाइल फोटो-पीटीआई) भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भूटान के प्रधानमंत्री लोटे छृंग (फाइल फोटो-पीटीआई)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 25 अक्टूबर 2023,
  • अपडेटेड 5:37 PM IST

चीन के दबाव में आकर डोकलाम कॉरिडोर को लेकर समझौता करने की कोशिश कर रहे भूटान को भारत सरकार ने आगाह किया है. भारत ने स्पष्ट शब्दों में भूटान से कहा है कि डोकलाम जैसे संवेदनशील मुद्दों पर किसी भी तरह के समझौते के वह खिलाफ है. सीमा विवाद के किसी भी समाधान से भारत के हितों पर किसी भी तरह का असर नहीं पड़ना चाहिए.

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दरअसल, राजनयिक संबंध स्थापित करने और सीमा विवाद को जल्द से जल्द हल करने के लिए चीन और भूटान बातचीत कर रहे हैं. इसको लेकर चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने बीजिंग में भूटान के विदेश मंत्री टांडी दोर्जी से मुलाकात भी की है. इस दौरान चीन ने भूटान से पूर्ण राजनयिक संबंध स्थापित करने और विवादों को हल करने का आग्रह किया. 

रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों देशों के बीच सीमा विवाद को जल्द से जल्द हल निकालने पर सहमति भी बन गई है. चीनी विदेश मंत्रालय की ओर से जारी एक बयान में वांग के हवाले से कहा गया है कि राजनयिक संबंधों की बहाली दोनों देशों के दीर्घकालिक हितों में होगी. चीन भूटान की लगभग 764 वर्ग किमी जमीन पर अपना दावा करता है.

भारत ने भूटान को चेताया

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अंग्रेजी अखबार 'द इकॉनोमिक टाइम्स' की एक रिपोर्ट के मुताबिक, मोदी सरकार ने भूटान से कहा से है कि भारत डोकलाम कॉरिडोर जैसे संवेदनशील मुद्दों पर किसी भी तरह के समझौते के खिलाफ है और सीमा विवाद के किसी भी समाधान से भारत के हितों पर किसी भी तरह का असर नहीं पड़ना चाहिए.

साल 2017 में चीनी सेना ने इस क्षेत्र में सड़क का निर्माण शुरू कर दिया था तब भारतीय सैनिकों ने इसका विरोध किया था जिसके बाद दोनों देशों के बीच लंबे समय तक गतिरोध की स्थिति बनी रही थी. भूटान, भारत के सबसे करीबी सहयोगियों में से एक है और दशकों से भारत के साथ सैन्य साझेदारी सहित रणनीतिक संबंध रखता है.

भारत और भूटान ही ऐसे दो पड़ोसी देश हैं जिसके साथ चीन का अभी तक सीमा विवाद है. चीन ने अन्य सभी पड़ोसियों के साथ सीमा विवादों को सुलझा लिया है.

चीन-भूटान सीमा विवाद

चीन, भूटान के उत्तर-पश्चिमी और मध्य क्षेत्र के लगभग 764 वर्ग किमी का दावा करता है. शुरुआत में यह सीमा विवाद भी भारत और चीन के बीच ही था. लेकिन 1984 में चीन और भूटान के बीच सीधा संवाद स्थापित हुआ.

जिन दो इलाकों को लेकर चीन और भूटान के बीच सबसे ज्यादा विवाद है. उनमें 269 वर्ग किलोमीटर का डोकलाम है. और दूसरा इलाका भूटान के उत्तर में 495 वर्ग किलोमीटर का जकारलुंग और पासमलुंग घाटी का इलाका है. 1984 से लेकर अभी तक 24 से अधिक दौरों की बातचीत और 12 बार एक्सपर्ट लेवल की बैठकें हो चुकी हैं.

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डोकलाम भारत के लिए संवेदनशील मुद्दा

डोकलाम पठार भारत, भूटान और चीन के एक त्रिकोण पर स्थित है. इसके पहाड़ी इलाके पर भूटान और चीन दोनों ही अपने दावे पेश करते हैं. भारत भूटान के दावे का समर्थन करता है.

डोकलाम का मुद्दा भारत के लिए बेहद संवेदनशील मुद्दा है क्योंकि चीन का भूटान के इलाकों में अतिक्रमण भारत से जुड़ा हुआ है. विश्लेषकों का मानना है कि डोकलाम में चीन का नियंत्रण सीधे तौर पर भारत के सुरक्षा हितों के खिलाफ होने वाला है. चीन भूटान को मजबूर कर उसके क्षेत्र में अतिक्रमण कर रहा है और भारत से लगी सीमाओं पर यथास्थिति में बदलाव कर रहा है.

भारत डोकलाम में चीन की विस्तारवादी नीति का विरोध करता रहा है क्योंकि डोकलाम भारत के सिलिगुड़ी कॉरिडोर के करीब है. यह कॉरिडोर भारत के लिए सामरिक महत्व का है जो पूर्वोत्तर के राज्यों को देश के अन्य भागों से जोड़ता है.

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