होर्मुज किया बंद तो ईरान पर टूट पड़ा अमेरिका, तेल-गैस की सप्लाई पर फिर खतरा

ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को अनिश्चितकाल के लिए बंद करने का ऐलान कर दिया है, जबकि जवाब में अमेरिका ने ईरान के कई ठिकानों पर ताजा हवाई हमले किए हैं. इससे दुनिया की तेल और गैस सप्लाई पर बड़ा संकट मंडराने लगा है.

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ईरान पर आरोप है कि वह होर्मुज में जहाजों पर हमले कर रहा है. (Photo- Reuters) ईरान पर आरोप है कि वह होर्मुज में जहाजों पर हमले कर रहा है. (Photo- Reuters)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 12 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 8:31 AM IST

पश्चिम एशिया में एक बार फिर युद्ध के बादल गहरा गए हैं. अमेरिका और ईरान के बीच बीते कुछ दिनों से बढ़ा तनाव अब खुले सैन्य टकराव में बदलता दिखाई दे रहा है. ईरान ने रविवार को दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापार मार्गों में से एक होर्मुज स्ट्रेट को 'अगली नोटिस तक' बंद करने का ऐलान कर दिया. इसके कुछ ही घंटे बाद अमेरिका ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों और रणनीतिक इलाकों पर ताजा हवाई हमले कर दिए. दोनों देशों के बीच बढ़ती यह तकरार वैश्विक तेल और गैस सप्लाई के लिए एक बार फिर बड़ा खतरा बन गई है.

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ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की नौसेना ने बयान जारी कर कहा कि एक जहाज ने तय समुद्री मार्ग का पालन नहीं किया और अपने नेविगेशन सिस्टम भी बंद कर दिए थे. चेतावनी के बावजूद जहाज ने रास्ता नहीं बदला, जिसके बाद उसे निशाना बनाया गया. IRGC का दावा है कि कई अन्य जहाजों ने भी बिना मंजूरी वाले रास्तों से गुजरने की कोशिश की. इसके बाद ईरान ने पूरे होर्मुज स्ट्रेट को अगले आदेश तक बंद करने का फैसला लिया.

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ईरान ने साफ चेतावनी दी है कि जब तक क्षेत्र में अमेरिकी दखल खत्म नहीं होता, तब तक होर्मुज स्ट्रेट नहीं खोला जाएगा. साथ ही कहा गया कि अगर ईरान के खिलाफ किसी भी तरह की सैन्य कार्रवाई जारी रही तो पूरे क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ठिकानों और उसके सहयोगी देशों के सैन्य अड्डों को भी निशाना बनाया जाएगा.

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जहाज पर हमले के बाद अमेरिका की जवाबी कार्रवाई

ईरान के इस कदम के तुरंत बाद अमेरिका ने जवाबी कार्रवाई तेज कर दी. अमेरिकी सेना ने रविवार को ईरान के कई सैन्य ठिकानों, आईआरजीसी से जुड़े ठिकानों और दक्षिणी इलाकों में स्थित रणनीतिक ठिकानों पर नए हवाई हमले किए. इससे पहले भी अमेरिका लगातार दूसरे दिन ईरानी सैन्य ठिकानों को निशाना बना चुका था. अमेरिका का आरोप है कि ईरान ने इस सप्ताह कतर और सऊदी अरब के तीन कारोबारी टैंकरों पर हमले करवाए, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई की गई.

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने बताया कि इस सप्ताह ईरान के खिलाफ तीसरे दौर की सैन्य कार्रवाई शुरू कर दी गई है. अमेरिका का दावा है कि यह हमला ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) द्वारा हॉर्मुज स्ट्रेट से गुजर रहे साइप्रस के झंडे वाले कंटेनर जहाज M/V GFS Galaxy पर किए गए हमले के जवाब में किया गया.

CENTCOM के मुताबिक, हमले में जहाज पर भीषण आग लग गई, इंजन रूम को गंभीर नुकसान पहुंचा और चालक दल का एक सदस्य लापता हो गया है. नुकसान की वजह से जहाज अपनी यात्रा जारी रखने की स्थिति में नहीं है.

1000 मिसाइलों से हमले की ट्रंप की धमकी

इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी अपना रुख और सख्त कर दिया है. ट्रंप ने कहा कि अमेरिका और ईरान बातचीत जारी रखने पर सहमत हुए हैं, लेकिन जून में हुआ सीजफायर अब खत्म हो चुका है. उन्होंने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर अमेरिकी हितों या उनकी सुरक्षा पर हमला हुआ तो अमेरिका बेहद कड़ी सैन्य कार्रवाई करेगा. हाल ही में ट्रंप ने यह भी दावा किया था कि अमेरिका की "1000 मिसाइलें लॉक्ड एंड लोडेड" हैं और जरूरत पड़ने पर ईरान के खिलाफ इस्तेमाल की जा सकती हैं.

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अमेरिका-ईरान में बातचीत कराने की कोशिश जारी

दूसरी तरफ कूटनीति की कोशिशें भी जारी हैं. ओमान, कतर और पाकिस्तान दोनों देशों के बीच तनाव कम कराने की कोशिश कर रहे हैं. ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ओमान पहुंचे, जहां होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही को लेकर ओमानी अधिकारियों के साथ बातचीत हुई. बताया जा रहा है कि ओमान ने ऐसा प्रस्ताव रखा है, जिसके तहत दक्षिणी समुद्री कॉरिडोर से जहाजों को स्वतंत्र रूप से गुजरने दिया जाए, जबकि ईरान के जलक्षेत्र वाले उत्तरी मार्ग से गुजरने के लिए पहले से इजाजत लेनी होगी.

उधर ईरान के नए सर्वोच्च नेता आयतुल्ला मोजतबा खामेनेई ने भी अपने पहले सार्वजनिक संदेश में पूर्व सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की मौत का बदला लेने की कसम खाई है. उन्होंने कहा कि "शहीद नेता के खून का बदला हर हाल में लिया जाएगा." इस बयान ने पहले से जारी तनाव को और बढ़ा दिया है.

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