डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को कहा कि अमेरिका और ईरान एक व्यापक समझौते को अंतिम रूप देने के करीब पहुंच चुके हैं. उन्होंने दावा किया कि प्रस्तावित समझौते के तहत स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोला जाएगा. ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए ट्रंप ने कहा कि समझौते पर काफी हद तक बातचीत पूरी हो चुकी है और अब केवल अंतिम बिंदुओं पर चर्चा बाकी है.
उन्होंने लिखा, 'संयुक्त राज्य अमेरिका, इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान और अन्य संबंधित देशों के बीच एक समझौता लगभग तय हो चुका है, जिसे अंतिम रूप दिया जाना बाकी है.' ट्रंप ने कहा कि इस समझौते का एक बड़ा परिणाम होर्मुज का दोबारा खुलना होगा. यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है और हाल के महीनों में खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव का केंद्र बना हुआ है.
यह घोषणा मध्य पूर्व और अन्य देशों के नेताओं के साथ ट्रंप की कई उच्चस्तरीय बातचीत के बाद सामने आई. इन वार्ताओं को ईरान युद्ध के बाद क्षेत्र में स्थिरता लाने की अंतरराष्ट्रीय कोशिशों के तौर पर देखा जा रहा है. ट्रंप ने बताया कि उन्होंने ओवल ऑफिस से सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान, यूएई के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान, कतर के अमीर तमीम बिन हमद अल थानी, पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर, तुर्किये के राष्ट्रपति रेसेप तैय्यप एर्दोगन, मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सिसी, जॉर्डन के किंग अब्दुल्ला द्वितीय और बहरीन के किंग हमद बिन ईसा अल खलीफा सहित कई नेताओं से बातचीत की.
होर्मुज पर नियंत्रण हमारा ही रहेगा: ईरान
डोनाल्ड ट्रंप के मुताबिक बातचीत का मुख्य फोकस ईरान और शांति से जुड़े व्यापक समझौते पर था. अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि उन्होंने अलग से इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से भी बात की और यह चर्चा बेहद सकारात्मक रही. हालांकि, ईरानी मीडिया ने ट्रंप के उस दावे को खारिज कर दिया जिसमें उन्होंने कहा था कि होर्मुज पूरी तरह खोल दिया जाएगा. ईरान की फार्स न्यूज एजेंसी ने कहा कि होर्मुज का नियंत्रण तेहरान के हाथ में ही रहेगा. एजेंसी ने ट्रंप के बयान को 'हकीकत से दूर' बताया और कहा कि मौजूदा मसौदे के तहत भी होर्मुज का प्रबंधन, जहाजों के मार्ग, समय और अनुमति जारी करने का अधिकार पूरी तरह ईरान के पास रहेगा.
रिपोर्ट में कहा गया कि अगर समझौता होता है तो ईरान युद्ध से पहले जैसी शिपिंग बहाल करने पर सहमत हो सकता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं होगा कि होर्मुज पर बिना किसी नियंत्रण के आवाजाही होगी. इस बीच, पाकिस्तान की मध्यस्थता में जारी वार्ता को भी गति मिली है. ईरान ने शनिवार को कहा कि वह अमेरिका के साथ संघर्ष खत्म करने के लिए एक 'मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग' की दिशा में काम कर रहा है. पाकिस्तानी सेना प्रमुख आसिम मुनीर ने कहा कि अमेरिका और ईरान की बातचीत में उत्साहजनक प्रगति हुई है.
तीन चरणों में लागू हो सकता है समझौता
न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक समझौते का प्रस्तावित ढांचा तीन चरणों में लागू हो सकता है- पहले युद्ध औपचारिक रूप से समाप्त होगा, फिर होर्मुज संकट का समाधान किया जाएगा और उसके बाद व्यापक समझौते के लिए 30 दिन की बातचीत शुरू होगी, जिसे जरूरत पड़ने पर बढ़ाया जा सकता है. इससे पहले ट्रंप ने Axios से कहा था कि वह रविवार को यह फैसला करेंगे कि ईरान पर हमले दोबारा शुरू करने हैं या नहीं. उन्होंने कहा था, 'या तो अच्छा समझौता होगा या फिर मैं उनकों जहन्नुम में भेज दूंगा.' इधर भारत दौरे पर पहुंचे अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने ईरान के साथ शांति समझौते को लेकर वॉशिंगटन की शर्तें दोहराईं. उन्होंने कहा, 'ईरान कभी परमाणु हथियार नहीं हासिल कर सकता. होर्मुज बिना किसी टोल के खुला होना चाहिए और ईरान को अपना संवर्धित यूरेनियम हमें सौंपना होगा.'
दूसरी ओर ईरान लगातार कहता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम केवल नागरिक उद्देश्यों के लिए है और वह परमाणु हथियार नहीं बना रहा. ईरान ने अपने बंदरगाहों की नाकेबंदी खत्म करने, तेल निर्यात पर लगे प्रतिबंध हटाने और होर्मुज पर निगरानी बनाए रखने की मांग की है. ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने कहा कि हाल के दिनों में तनाव कुछ कम हुआ है, लेकिन कई बड़े मुद्दे अब भी अनसुलझे हैं. उन्होंने कहा कि ईरान की प्राथमिकता नए अमेरिकी हमलों को रोकना और लेबनान में जारी संघर्ष को खत्म करना है, जहां ईरान समर्थित हिजबुल्लाह लड़ाके दक्षिणी लेबनान में इजरायली बलों से लड़ रहे हैं. इससे पहले ट्रंप ने चेतावनी दी थी कि अगर समझौता नहीं हुआ तो 'पूरी सभ्यता खत्म हो सकती है' और उन्होंने यह भी कहा था कि ईरान के लिए समय तेजी से निकल रहा है.'
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