कोलंबिया के राष्ट्रपति गुस्तावो पेट्रो सोशल मीडिया पर 'Heil Hitler' (नाजी जर्मनी में अभिवादन का तरीका) लिखने के बाद विवादों में घिर गए हैं. एक अखबार के लेख पर प्रतिक्रिया देते हुए की गई उनकी इस टिप्पणी ने देश में राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया है. विपक्षी दलों ने पेट्रो पर चुनावी माहौल में नाजी प्रतीकों और भाषा का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है.
कोलंबिया में 21 जून को राष्ट्रपति चुनाव के दूसरे और अंतिम चरण (रनऑफ) के लिए मतदान होना है. ऐसे में यह विवाद चुनावी बहस का प्रमुख मुद्दा बन गया है. विवाद की शुरुआत तब हुई जब राष्ट्रपति पेट्रो ने अखबार 'एल एस्पेक्टाडोर' में प्रकाशित एक लेख को शेयर किया. इस लेख में दक्षिणपंथी उम्मीदवार अबेलार्डो डे ला एस्प्रिएला (Abelardo de la Espriella) का समर्थन किया गया था.
लेख में कहा गया था कि कोलंबिया को सुरक्षा, मजबूत नेतृत्व और आर्थिक स्वतंत्रता पर केंद्रित सरकार की जरूरत है. इसमें डे ला एस्प्रिएला को देश में व्यवस्था बहाल करने और पेट्रो की नीतियों को पलटने के लिए सबसे उपयुक्त उम्मीदवार बताया गया था. इस लेख पर प्रतिक्रिया देते हुए पेट्रो ने केवल दो शब्द लिखे- Heil Hitler. इसके बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं.
पेट्रो पिछले कुछ सप्ताहों से लगातार आरोप लगाते रहे हैं कि विपक्ष के कुछ राजनीतिक दल फासीवादी विचारों को बढ़ावा दे रहे हैं. उनका कहना है कि कुछ ताकतें देश के संविधान के तहत स्थापित सामाजिक सुरक्षा और कल्याणकारी व्यवस्थाओं को कमजोर करना चाहती हैं.
चुनावी माहौल में बढ़ा तनाव
यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब कोलंबिया का चुनावी मुकाबला निर्णायक चरण में पहुंच चुका है. संविधान के तहत गुस्तावो पेट्रो दोबारा राष्ट्रपति चुनाव नहीं लड़ सकते. उनके पॉलिटिकल मूवमेंट ने वामपंथी सीनेटर और मानवाधिकार कार्यकर्ता इवान सेपेदा को उम्मीदवार बनाया है. पहले चरण के मतदान में सेपेदा, अबेलार्डो डे ला एस्प्रिएला से पीछे रहे थे और अब दोनों के बीच रनऑफ मुकाबला होना है. हालिया सर्वेक्षणों के मुताबिक, डे ला एस्प्रिएला को मामूली बढ़त हासिल है.
डे ला एस्प्रिएला ने अपने चुनाव अभियान में अपराध पर सख्ती, सुरक्षा बलों को मजबूत करने और सरकारी तंत्र को छोटा करने जैसे मुद्दों को प्रमुखता दी है. उनके समर्थक उन्हें पारंपरिक राजनीति को चुनौती देने वाला उम्मीदवार बता रहे हैं.
उन्हें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का समर्थन भी मिला है, जिससे चुनावी मुकाबले को अंतरराष्ट्रीय आयाम भी मिल गया है. पेट्रो ने ट्रंप पर उनके प्रतिद्वंद्वी के पक्ष में समर्थन देकर कोलंबिया की राजनीति में हस्तक्षेप करने का आरोप लगाया है.
इजरायल के साथ मतभेद
इस विवाद के बाद पेट्रो और इजरायल के बीच लंबे समय से चल रहे मतभेद भी एक बार फिर चर्चा में आ गए हैं. चुनावी बहस से जुड़े अन्य बयानों में पेट्रो ने दावा किया कि उनके सहयोगियों के खिलाफ जिस तरह की राजनीतिक रणनीति अपनाई जा रही है, वह नाजी प्रोपेगेंडा जैसी है. उन्होंने यह भी कहा कि फिलिस्तीन समर्थकों और लैटिन अमेरिका के प्रगतिशील आंदोलनों के खिलाफ भी इसी तरह के तरीकों का इस्तेमाल किया गया है.
पेट्रो की इन टिप्पणियों पर संयुक्त राष्ट्र में इजरायल के राजदूत डैनी डैनन ने तीखी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, 'कोलंबिया के राष्ट्रपति, आपके निजी जीवन में जो भी चल रहा हो, लेकिन कुछ सीमाएं ऐसी होती हैं जिन्हें कभी पार नहीं किया जाना चाहिए.' बता दें कि पेट्रो के राष्ट्रपति बनने के बाद कोलंबिया और इजरायल के संबंधों में काफी तनाव आया है. 2024 में गाजा युद्ध को लेकर मतभेदों के बाद कोलंबिया ने इजरायल के साथ अपने राजनयिक संबंध समाप्त कर दिए थे. पेट्रो लैटिन अमेरिका में इजरायल के सबसे मुखर आलोचकों में गिने जाते हैं.
aajtak.in