ब्रिटिश संग्रहालय में सजी ज्यादातर बेशकीमती चीजें लूट की! लौटाना न पड़े, इसके लिए देश ने बना डाला एक्ट

जल्द ही ब्रिटेन में किंग चार्ल्स तृतीय की ताजपोशी होनी है. इसमें उनकी पत्नी कैमिला कोहिनूर जड़ा ताज नहीं पहनेंगी. इस खबर के बाद से कोहिनूर फिर चर्चा में है. दुनिया का सबसे खूबसूरत और बेशकीमती हीरा भारत से ब्रिटेन पहुंचा तो फिर वहीं रह गया. इसे लौटाने की मांग पर तत्कालीन पीएम डेविड कैमरन ने एक बार कहा था कि ऐसे लौटाते रहे तो ब्रिटिश संग्रहालय खाली हो जाएगा.

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ब्रिटिश म्यूजियम, लंदन का एरियल व्यू (Wikipedia) ब्रिटिश म्यूजियम, लंदन का एरियल व्यू (Wikipedia)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 03 मार्च 2023,
  • अपडेटेड 10:14 AM IST

देशों के बहुत मांगने पर, या फिर किसी खास देश से संबंध बढ़ाने के लिए ब्रिटिश सरकार समय-समय पर लूट का माल वापस भी करती रही, लेकिन ज्यादातर समय इनकार ही किया. ब्रिटिश म्यूजियम की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक उसके पास लगभग 8 मिलियन संग्रह है. इसमें से 80 हजार चीजें संग्रहालय में देखने के लिए सजी होती हैं, जबकि बाकी सहेजकर प्राइवेट आर्काइव में रखी होती हैं.

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इनमें से कितनी चीजें लूटी हुई हैं, ये तो साफ नहीं, लेकिन अनुमानित तौर पर ज्यादातर चीजें दूसरे देशों पर राज के दौरान ही मिली हुई हैं. इसमें बेशकीमती आर्ट पीस से लेकर बहुमूल्य हीरे-जवाहरात तक शामिल हैं. कई रिपोर्ट्स का दावा है कि विवादित चीजें अक्सर म्यूजियम से हटाकर आर्काइव में रख दी जाती हैं ताकि देशों का गुस्सा न भड़के. 

आजादी के बाद कई देशों ने अपनी-अपनी चीजें लौटाने का अनुरोध भी किया, लेकिन अधिकतर समय इनकार मिला. ब्रिटिश म्यूजियम एक्ट 1963 के तहत ऐसी किसी भी रिक्वेस्ट को मानने न मानने का अधिकार पूरी तरह से फॉरेन एंड कॉमनवेल्थ ऑफिस को है. ध्यान दीजिए, ये वो समय था, जब अधिकतर देशों को आजादी मिल चुकी थी. यहां तक कि विश्व युद्ध भी खत्म हो चुके थे. तब देश खुद को सहेजने में अपनी सांस्कृतिक धरोहरों को इकट्ठा करने में लगे हुए थे. 

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इसी सिलसिले में कई देशों ने यूनेस्को के साथ मिलकर अपनी कलाकृतियां वापस पाने की बात भी छेड़ी लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ. आजाद देशों को उनके आर्टपीस ने लौटाने की ब्रिटिश जिद के पीछे भी वजह है. आम लोगों से लेकर रिसर्च करने वाले लोग तक यहां आते हैं. इस बढ़े हुए फुटफॉल से देश की भारी कमाई होती है. अकेले अप्रैल 2019 से मार्च 2020 के दौरान लगभग पौने 6 मिलियन विजिटर यहां आए थे. 

टीपू सुल्तान का टाइगर (Wikipedia)

रोसेटा स्टोन को इस म्यूजियम की सबसे कीमती चीजों में से एक माना जाता है. ये प्राचीन मिस्र को समझने की एक तरह की लिपि है, जिसे पुरातत्व की सबसे बड़ी खोजों में रखा जाता है. पत्थर की इस सिल्ली को समझने की कोशिश कई ब्रिटिश और यूरोपियन जानकारों ने की, लेकिन अब तक इसे डीकोड नहीं किया जा सका. 

टीपू का टाइगर लकड़ी की एक बेहद मशहूर कलाकृति है, जिसमें एक बाघ ईस्ट इंडिया कंपनी के सैनिक को मारता दिख रहा है. मैसूर के सुल्तान टीपू के लिए ये कलाकृति बनाई गई थी. साल 1799 में उनकी सेना को हराने के बाद ब्रिटिश सेना ने मैसूर के राजमहल में भारी उत्पात मचाया और लौटते हुए इस कलाकृति को भी साथ लेते गए. 

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लकड़ी, तस्वीर या धातु-जवाहरात के टुकड़े ही नहीं, ब्रिटिश म्यूजियम में मृत लोगों के अवशेष भी सजे मिल जाते हैं. इन्हीं में से एक है सारा बार्टमैन. 19वीं सदी की शुरुआत में टीनएजर सारा को गुलाम बनाकर यहां से वहां बेचना शुरू हुआ तो सिलसिला तब रुका, जब एक ब्रिटिश फिजिशियन की नजर उसपर पड़ी. सारा के शरीर का निचला हिस्सा काफी भारी था. ब्रिटिश फिजिशियन ने इसे ही अपनी कमाई का जरिया बना डाला. डॉक्टर बिरादरी उसे देखने आया करती. साल 1815 में सारा की मौत के बाद उसके अवशेष को संग्रहालय में सजा दिया गया. आगे चलकर दक्षिण अफ्रीकी राष्ट्रपति नेल्सन मंडेला ने इसे अपने देश का अपमान बताते हुए सारा के अवशेष वापस लौटाने की मांग की, जिसे काफी ना-नुकुर के बाद माना गया. सालों बाद सारा का अंतिम संस्कार हो सका. 

दुनिया पर राज कर चुके कई देशों के संग्रहालय लूटे हुए सामानों से भरे हैं. सांकेतिक फोटो (Unsplash)

लूटी नाम का पेकिंगीज नस्ल का डॉग भी म्यूजियम की सजावट बना रहा. दरअसल साल 1860 में अफीम युद्ध के दौरान चीन की ब्रिटेन से बुरी तरह से हार हुई. इसके बाद ब्रिटिश सेना वहां के इंपीरियल समर पैलेस को लूटते हुए इस डॉग को उठाकर अपने साथ ले आई. चीनी नस्ल का छोटा सा कुत्ता राजमहल पहुंचकर रॉयल कलेक्शन का हिस्सा बन गया. महारानी ने उसे लूटी नाम दिया. 12 साल विंडसर कासल में रहने के बाद मृत डॉग के अवशेष को संग्रहालय में रख दिया गया था. 

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ब्रिटिश म्यूजियम ही नहीं, दुनिया पर राज कर चुके कई दूसरे देशों के संग्रहालयों में भी चोरी या लूट का सामान रखने के आरोप लगते रहे. पेरिस का लॉवरे और न्यूयॉर्क का मेट्रोपॉलिटन म्यूजियम इसी श्रेणी में आता है. मानवाधिकार एडवोकेट और ब्रिटिश लेखक जेफरी रॉबर्टसन ने अपनी किताब हू ओन्स हिस्ट्री में कई आरोप लगाते हुए सिलसिलेवार बताया है कि इन संग्रहालयों में रखी किस कलाकृति के साथ कितना खूनी इतिहास है. 

 

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