ब्रिटेन ने ईरान की शक्तिशाली सैन्य इकाई इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) को आतंकवादी संगठन घोषित करने का फैसला किया है. इस निर्णय के बाद ब्रिटेन में IRGC का समर्थन करना आपराधिक अपराध माना जाएगा. लंबे समय से इस संगठन पर प्रतिबंध लगाने को लेकर ब्रिटेन में राजनीतिक बहस चल रही थी, जिसके बाद सरकार ने यह कदम उठाया है.
ब्रिटेन के गृह मंत्रालय (होम ऑफिस) ने कहा कि मौजूद साक्ष्यों की समीक्षा के बाद यह निष्कर्ष निकाला गया है कि IRGC ऐसी एक्टिविटी में शामिल रहा है, जो ब्रिटेन की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करती हैं. सरकार का कहना है कि देश की सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए यह फैसला जरूरी था.
IMCR भी प्रतिबंधित लिस्ट में
ब्रिटिश सरकार ने इसके साथ ही इस्लामिक मूवमेंट ऑफ द कम्पैनियंस ऑफ द राइट (IMCR) और रूसी फेडरेशन वॉलंटियर कॉर्प्स को भी प्रतिबंधित संगठनों की लिस्ट में शामिल करने की योजना की घोषणा की है. सरकार के अनुसार, IMCR का नाम ब्रिटेन में यहूदी समुदाय से जुड़े ठिकानों पर हुए हमलों से जोड़ा गया है, जबकि रूसी फेडरेशन वॉलंटियर कॉर्प्स को रूसी सैन्य खुफिया एजेंसी से जुड़े अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का हिस्सा बताया गया है.
क्यों लिया गया फैसला?
सरकार ने कहा कि यह फैसला ब्रिटेन की धरती पर ईरान से जुड़े कथित सुरक्षा खतरों और साजिशों के बाद लिया गया है. इनमें ईरान इंटरनेशनल टेलीविजन से जुड़े दो पत्रकारों की कथित हत्या की साजिश और ब्रिटिश हितों को निशाना बनाने वाले साइबर हमले भी शामिल हैं. इन घटनाओं ने ब्रिटिश सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी थी.
होम ऑफिस ने अपने बयान में कहा कि गृह सचिव ने सभी उपलब्ध साक्ष्यों का गहन अध्ययन और कानूनी समीक्षा करने के बाद यह निष्कर्ष निकाला कि इन संगठनों की गतिविधियां विदेशी शक्तियों से जुड़े सुरक्षा खतरों की श्रेणी में आती हैं. इसलिए इन पर प्रतिबंध लगाना ब्रिटेन की सुरक्षा, नागरिकों की रक्षा और राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा के लिए जरूरी है.
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