ब्रिटेन का सबसे लंबा तलाक केस! 23 साल बाद भारतीय मूल की महिला को मिले 85 करोड़

लंदन में वर्षा गोहिल और उनके पूर्व पति भद्रेश गोहिल के बीच 23 साल लंबी कानूनी लड़ाई के बाद वर्षा को 85 करोड़ रुपये का सेटलमेंट मिला है. भद्रेश पर भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप लगे थे, जिनके चलते उनकी कई संपत्तियां फ्रीज कर दी गईं. ब्रिटेन की सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट में लंबी लड़ाई के बाद वर्षा को वैध संपत्ति का हिस्सा मिला.

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वर्षा गोहिल ने अपने तलाक की लड़ाई 23 साल तक लड़ी (Photo: Getty Images) वर्षा गोहिल ने अपने तलाक की लड़ाई 23 साल तक लड़ी (Photo: Getty Images)

आजतक इंटरनेशनल डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 04 जून 2026,
  • अपडेटेड 6:02 PM IST

लंदन में 2000 के दशक की शुरुआत में शुरू हुआ एक आम-सा तलाक का मामला धीरे-धीरे 23 साल लंबी कानूनी लड़ाई में बदल गया और अब जाकर मामला सुलझा है. इस लड़ाई के बाद भारतीय मूल की वर्षा गोहिल को अपने पूर्व पति भद्रेश गोहिल से 66 लाख पाउंड (करीब 85 करोड़ रुपये) का सेटलमेंट मिला है. इसे ब्रिटेन के हाल के सालों के सबसे बड़े तलाक मामलों में से एक माना जा रहा है.

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61 साल की वर्षा गोहिल ने मई 2002 में तलाक की अर्जी दी थी. उन्होंने अपने पति पर एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर रखने और खराब व्यवहार करने का आरोप लगाया था. उस समय दोनों के तीन बच्चे थे.

शुरुआत में मामला जल्दी सुलझ गया था. वर्षा ने करीब 2.7 लाख पाउंड (करीब 3.47 करोड़ रुपये) का सेटलमेंट स्वीकार कर लिया था और परिवार की प्यूजो कार भी अपने पास रख ली थी. लेकिन उन्हें हमेशा शक था कि उनके पति ने अपनी सारी संपत्ति के बारे में सही जानकारी नहीं दी है.

तलाक के दौरान कानून के मुताबिक पति-पत्नी को अपनी पूरी संपत्ति और पैसों की जानकारी देनी होती है. वर्षा को लगता था कि भद्रेश ने कुछ छिपाया है, लेकिन कई साल तक उनके पास इसे साबित करने के सबूत नहीं थे.

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और फिर खुल गया वर्षा के पूर्व पति के काले कारनामों का राज

फिर 2000 के दशक के आखिर में कहानी ने बड़ा मोड़ लिया. भद्रेश गोहिल एक बड़े अंतरराष्ट्रीय भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में फंस गए.

रिपोर्ट्स के मुताबिक, भद्रेश नाइजीरिया के पूर्व गवर्नर जेम्स इबोरी के सहयोगियों के वकील थे. उन पर आरोप लगा कि उन्होंने करोड़ों पाउंड के काले धन को अलग-अलग कंपनियों और खातों के जरिए छिपाने और उसे सही तरीके से कमाया गया पैसा दिखाने में मदद की.

लंबी जांच के बाद उन्हें मनी लॉन्ड्रिंग, जालसाजी और धोखाधड़ी की साजिश जैसे कई मामलों में दोषी पाया गया. 2011 में उन्हें 10 साल की जेल की सजा सुनाई गई.

इस जांच के दौरान अधिकारियों को करोड़ों पाउंड की ऐसी संपत्तियों का पता चला, जिनका जिक्र तलाक के समय नहीं किया गया था. इसके बाद ब्रिटिश अधिकारियों ने करीब 2.8 करोड़ पाउंड (करीब 360 करोड़ रुपये) की संपत्तियां फ्रीज कर दीं. जांच एजेंसियों का कहना था कि यह संपत्ति अपराध से कमाए गए पैसे से जुड़ी हो सकती है और इसे कई देशों में फैली कंपनियों के जरिए छिपाया गया था.

इन खुलासों के बाद वर्षा का शक और मजबूत हो गया. उन्होंने 2007 में ही पुराने तलाक समझौते को चुनौती देने की कोशिश शुरू कर दी थी, लेकिन अब उनके पास नए सबूत भी आ गए थे.

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मामला आखिरकार ब्रिटेन के सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया. 2015 में सुप्रीम कोर्ट ने वर्षा को पुराने तलाक समझौते को दोबारा खुलवाने की अनुमति दे दी. अदालत ने कहा कि अगर कोई व्यक्ति तलाक के दौरान अपनी पूरी संपत्ति की जानकारी नहीं देता, तो उसे उस धोखे का फायदा नहीं मिलना चाहिए.

हालांकि इसके बाद भी मामला खत्म नहीं हुआ. कई साल तक इस बात पर लड़ाई चलती रही कि फ्रीज की गई संपत्तियां आखिर किसकी हैं और उनका पैसा कहां से आया है.

ब्रिटेन की सरकारी एजेंसी क्राउन प्रॉसिक्यूशन सर्विस (CPS) का कहना था कि पूरी 2.8 करोड़ पाउंड की संपत्ति अपराध की कमाई है, इसलिए उसे जब्त कर लेना चाहिए और तलाक के बंटवारे में शामिल नहीं करना चाहिए.

दूसरी तरफ वर्षा का कहना था कि सारी संपत्ति गलत तरीके से नहीं कमाई गई थी. उनका दावा था कि इसका एक हिस्सा शादी के दौरान वैध कारोबार से कमाया गया था और उस पर उनका भी हक बनता है.

जब मामला हाई कोर्ट पहुंचा तो तीन अलग-अलग दावे सामने आए. भद्रेश ने कहा कि ये संपत्तियां उनकी नहीं हैं. CPS ने कहा कि सारी संपत्ति अपराध की कमाई है. जबकि वर्षा ने कहा कि संपत्ति उनके पूर्व पति की है और उसका बड़ा हिस्सा वैध तरीके से कमाया गया है.

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कोर्ट ने वर्षा के हक में दिया फैसला

आखिरकार हाई कोर्ट के जज विलियम्स ने फैसला सुनाया. उन्होंने भद्रेश और सरकारी एजेंसी दोनों की कुछ अहम दलीलों को खारिज कर दिया.

जज ने माना कि संपत्ति का एक हिस्सा पूरी तरह वैध है और वह पति-पत्नी की साझा वैवाहिक संपत्ति मानी जाएगी. उन्होंने ऐसी वैध संपत्तियों की कीमत करीब 66.6 लाख पाउंड आंकी और पूरी रकम वर्षा गोहिल को देने का आदेश दिया.

फैसला सुनाते हुए जज ने कहा कि ईमानदारी के मामले में भद्रेश का व्यवहार बेहद खराब था और उसके गंभीर नतीजे सामने आए. उन्होंने भद्रेश को 'पूरी तरह बेईमान' भी बताया.

जज ने यह भी कहा कि यह मामला इतना लंबा और जटिल रहा है कि 'गोहिल' नाम अलग-अलग देशों के वकीलों और जजों को लंबे समय तक याद रहेगा.

इस मामले का आखिरी पड़ाव पिछले महीने आया, जब ब्रिटेन की अपीलीय अदालत ने आगे किसी भी अपील की इजाजत देने से इनकार कर दिया. इसके बाद हाई कोर्ट का फैसला पूरी तरह लागू हो गया.

इस तरह वर्षा गोहिल की करीब 23 साल लंबी कानूनी लड़ाई खत्म हुई. इस दौरान मामला तलाक से शुरू होकर मनी लॉन्ड्रिंग, आपराधिक जांच, संपत्ति जब्ती और कई अदालतों तक पहुंचा. आखिर में वर्षा को 66 लाख पाउंड यानी करीब 85 करोड़ रुपये का सेटलमेंट मिला, जो ब्रिटेन के हाल के सबसे बड़े तलाक मामलों में गिना जा रहा है.

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