ईरान में भारत-चीन पर 'अटैक', US स्ट्राइक में शाहिद टर्मिनल तबाह, चीन-ईरान ब्रिज भी टूटा

ईरान पर अमेरिका के ये हमले एक नाजुक सीजफायर के टूटने के बाद हुए हैं, लेकिन इसकी चपेट में भारत का निवेश आया है. भारत ने ईरान में ऊर्जा, बंदरगाह और इंफ्रास्ट्रक्चर में भारी निवेश किया है. लेकिन बढ़ते संघर्ष ने इन परियोजनाओं को अनिश्चितता में डाल दिया है.

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चाबहार के शाहिद टर्मिनल में भारत का निवेश है. (Photo:X/@@Navy_Iranian) चाबहार के शाहिद टर्मिनल में भारत का निवेश है. (Photo:X/@@Navy_Iranian)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 09 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 9:36 PM IST

अमेरिका की ओर से ईरान पर किए गए नए सैन्य हमलों ने न केवल मध्य पूर्व की अस्थिरता बढ़ा दी है, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था खासकर भारत और चीन जैसे प्रमुख एशियाई देशों के निवेश और हित को भी गहरा झटका पहुंचाया है. अमेरिका की ओर से ईरान के चाबहार पोर्ट पर किए गए हमले में शाहिद बेहेश्ती पोर्ट टर्मिनल (Shahid Beheshti port) को नुकसान पहुंचा है. इस टर्मिनल में भारत का अरबों का निवेश है. 

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वहीं अमेरिका ने चीन-ईरान को जोड़ने वाले एक रेलवे पुल को भी निशाना बनाया गया है. यह पुल तेहरान और ईरान के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदार, चीन के बीच व्यापार के अहम रास्तों को जोड़ता है. ईरान के बंदरगाहों पर अमेरिकी नाकेबंदी के दौरान रूस को माल भेजने के लिए भी इस रास्ते का इस्तेमाल किया जाता था. 

ये वो नुकसान हैं, जिससे भारत और चीन के हित जुड़े हुए हैं. इन नुकसान के अलावा अमेरिकी हमले में ईरान को और भी क्षति हुई है. 

खबरों के मुताबिक अमेरिकी मिसाइलों से चाबहार पोर्ट पर हमला किया है. 

ईरान के सरकारी ब्रॉडकास्टर IRIB की रिपोर्ट के मुताबिक बुधवार को चाबहार में शाहिद बेहेश्ती पोर्ट पर कई अमेरिकी मिसाइलें गिरने से उसे नुकसान पहुंचा है. इससे यहां का इंफ्रास्ट्रक्चर तबाह हुआ है.

ईरानी मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार अमेरिकी हमलों में चाबहार का वेसल ट्रैफिक कंट्रोल टावर, कलंतरी पोर्ट और ओमान की खाड़ी में स्थित इस पोर्ट सिटी का बिजली इंफ्रास्ट्रक्चर भी प्रभावित हुआ है. अमेरिकी हमलों की वजह से शहर के लगभग आधे हिस्से में बिजली गुल हो गई. 

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अमेरिकी हमले की वजह से शाहिद बेहेश्ती डॉक पर कई प्रोजेक्टाइल गिरे जिससे बंदरगाह के ढांचे को नुकसान पहुंचा है. ईरान ने इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी है. 

भारत के लिए शाहिद बेहेश्ती टर्मिनल का महत्व

शाहिद बेहेश्ती टर्मिनल का संचालन भारत 10 वर्षीय समझौते के तहत कर रहा है. यह बंदरगाह भारत को पाकिस्तान को बायपास करके अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक पहुंच देता है. यह इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC) का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है. यदि बंदरगाह लंबे समय तक प्रभावित रहता है, तो भारत की क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और व्यापारिक योजनाओं पर असर पड़ सकता है. 

शाहिद बेहेश्ती टर्मिनल में भारत का निवेश है. (Photo: Google map)

रूस की मीडिया एजेंसी स्पूतनिक के अनुसार भारत ने इस टर्मिनल को विकसित करने के लिए 2015 में एक MoU और 2024 में 10 साल का समझौता किया था. भारत ने अब तक 120 मिलियन डॉलर का निवेश किया है और PM मोदी ने 2016 में इसके लिए 500 मिलियन डॉलर का समझौता किया था. 

PIB की एक रिपोर्ट के अनुसार 2024 में केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने शाहिद बेहिश्ती पोर्ट टर्मिनल चाबहार के विकास के लिए ईरान के बंदरगाह और समुद्री संगठन के साथ समझौता किया था. 

चीन भी हुआ प्रभावित

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ईरान की अर्ध सरकारी फार्स न्यूज़ एजेंसी ने गुरुवार को बताया कि अमेरिका ने उत्तरी ईरान में चीन और रूस को जोड़ने वाले एक रणनीतिक रेलवे पुल पर हमला किया. अमेरिकी स्ट्राइक में ये पुल टूट गया है.

एजेंसी ने आगे बताया कि क्रूज़ मिसाइल से गुरुवार सुबह पूर्वोत्तर गोलेस्तान प्रांत में ओगटे खान रेलवे पुल को निशाना बनाया गया. इस पुल को चीन, तुर्कमेनिस्तान और ईरान को जोड़ने वाले रेलवे कॉरिडोर का एक रणनीतिक पॉइंट बताया गया है. 

फ़ार्स  के अनुसार ईरान पर अमेरिकी हवाई हमलों में उत्तरी प्रांत गोलेस्तान में स्थित अक तघे खान रेलवे पुल को निशाना बनाया गया है.

गोलेस्तान स्थित चीन-ईरान ब्रिज को अमेरिका ने निशाना बनाया है. (Photo: GOOGLE MAP)

यह पुल तेहरान और ईरान के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदार चीन के बीच व्यापार के अहम रास्तों को जोड़ता है. ईरान के बंदरगाहों पर अमेरिकी नाकेबंदी के दौरान रूस को माल भेजने के लिए भी इस रास्ते का इस्तेमाल किया जाता था.

ईरानी एजेंसियों के अनुसार पुल की मरम्मत का काम जल्द ही पूरा कर लिया जाएगा. इस पुल से होकर गुज़रने वाला रास्ता तुर्कमेनिस्तान और कज़ाकिस्तान से होते हुए चीन तक जाता है.

यह हमला तब हुआ जब ईरान ने तेहरान और पूर्वोत्तर शहर मशहद के बीच यात्री रेल सेवाएं रोक दीं हैं. स्थानीय लोगों का कहना था कि लाइन के एक हिस्से पर अमेरिका-इज़राइल ने हमला किया था.

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ईरान की सरकारी रेलवे ने कहा कि मरम्मत करने वाली टीमों को घटनास्थल पर भेजा गया है और फंसे हुए यात्रियों को सड़क मार्ग से मशहद पहुंचाया जाएगा. 
 

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