संसद हमले के उपद्रवियों के मुआवजे पर कोर्ट ने लगाई रोक, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप को बड़ा झटका

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सरकार को बड़ा कानूनी झटका लगा है. एक संघीय अदालत ने करीब 1.8 अरब डॉलर के उस फंड पर अस्थायी रोक लगा दी है, जिसे ट्रंप प्रशासन कथित सरकारी 'वेपनाइजेशन' के पीड़ितों को मुआवजा देने के लिए बना रहा था.

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अमेरिका में जनवरी 2021 को कैपिटल हिल्स में ट्रंप समर्थकों ने हिंसा की थी. (Photo: ITG) अमेरिका में जनवरी 2021 को कैपिटल हिल्स में ट्रंप समर्थकों ने हिंसा की थी. (Photo: ITG)

आजतक इंटरनेशनल डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 30 मई 2026,
  • अपडेटेड 7:13 AM IST

अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सरकार को एक बड़ा कानूनी झटका लगा है. एक संघीय न्यायाधीश ने लगभग 1.8 अरब डॉलर के उस विवादित फंड पर अस्थायी रोक लगा दी है, जिसे ट्रंप प्रशासन "सरकारी उत्पीड़न" या "लॉफेयर" के कथित पीड़ितों को मुआवजा देने के लिए स्थापित करना चाहता था.

वर्जीनिया के ईस्टर्न डिस्ट्रिक्ट की जज लियोनी ब्रिकेंमा ने शुक्रवार को आदेश जारी करते हुए कहा कि जब तक अदालत इस मामले में आगे की दलीलें नहीं सुन लेती, तब तक ट्रंप प्रशासन फंड की स्थापना या संचालन से जुड़ा कोई नया कदम नहीं उठा सकता. यह रोक कम से कम 12 जून तक लागू रहेगी.

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यह फंड पिछले सप्ताह उस समझौते के तहत बनाया गया था, जिसके जरिए ट्रंप प्रशासन ने अमेरिकी कर विभाग (IRS) के खिलाफ ट्रंप की टैक्स रिकॉर्ड लीक होने से जुड़ी कानूनी लड़ाई का निपटारा किया था. न्याय विभाग ने "एंटी-वेपनाइजेशन फंड" नाम से 1.776 अरब डॉलर का फंड बनाने की घोषणा की थी.

"एंटी-वेपनाइजेशन फंड" कैसे करता काम?

योजना के मुताबिक, पांच सदस्यीय आयोग इस फंड का संचालन करता और उन लोगों को भुगतान करता जो यह साबित कर पाते कि वे "लॉफेयर" या "वेपनाइजेशन" के शिकार हुए हैं. ट्रंप और उनके समर्थक लंबे समय से इन शब्दों का इस्तेमाल अपने खिलाफ हुई जांच और आपराधिक मामलों के लिए करते रहे हैं.

हालांकि इस फंड की घोषणा के बाद ही विवाद शुरू हो गया. आलोचकों का कहना है कि इससे उन लोगों को भी आर्थिक लाभ मिल सकता है, जो 6 जनवरी 2021 को अमेरिकी संसद भवन कैपिटल हिल पर हुए हमले से जुड़े मामलों में जांच या मुकदमों का सामना कर चुके हैं. इसी वजह से कई विरोधियों ने इसे ट्रंप समर्थकों को फायदा पहुंचाने वाला "पॉलिटिकल रिवॉर्ड फंड" करार दिया.

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इस मामले को अदालत में चुनौती देने वाले संगठन का कहना है कि ट्रंप-वेंस प्रशासन ने उन्हें वैचारिक और राजनीतिक विरोधी के तौर पर निशाना बनाया है और ऐसे लोगों को इस फंड से कोई लाभ मिलने की संभावना नहीं थी. मुकदमा दायर करने वाले संगठन के प्रमुख स्काई पेरिमेन ने फैसले का स्वागत करते हुए कहा, "यह पारदर्शिता, कानून के शासन और अमेरिकी जनता की जीत है. किसी भी प्रशासन को सार्वजनिक धन का इस्तेमाल राजनीतिक इनाम बांटने के लिए करने का अधिकार नहीं है."

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ट्रंप प्रशासन ने अदालत के फैसले पर क्या कहा?

दूसरी तरफ अमेरिकी न्याय विभाग ने अदालत के आदेश के बावजूद फंड की वैधता पर भरोसा जताया है. विभाग के प्रवक्ता ने कहा कि सरकार को इस योजना की कानूनी मजबूती पर पूरा विश्वास है और वह उन लोगों को न्याय दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है, जिन्हें राजनीतिक कारणों से निशाना बनाया गया.

विवाद इसलिए भी बढ़ा क्योंकि कुछ रिपब्लिकन सांसदों ने भी इस फंड पर सवाल उठाए थे. उनका कहना था कि टैक्सपेयर्स के पैसे का इस्तेमाल ऐसे लोगों को मुआवजा देने के लिए नहीं होना चाहिए, जो कैपिटल हिल हिंसा जैसे मामलों में शामिल रहे हों. फिलहाल अदालत ने फंड में पैसा ट्रांसफर करने और इसके संचालन की प्रक्रिया रोक दी है. न्याय विभाग ने पहले कहा था कि घोषणा के 60 दिनों के भीतर फंड में राशि स्थानांतरित कर दी जाएगी. लेकिन अब इस पूरी योजना का भविष्य अदालत के अगले फैसले पर निर्भर करेगा.

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