पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद तृणमूल कांग्रेस के भीतर हलचल तेज हो गई है. सोमवार को TMC के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री मानस भुइयां ने अपने गढ़ सबंग में पार्टी की हार की नैतिक जिम्मेदारी ली, लेकिन साथ ही संगठनात्मक कमियों और चुनावी रणनीति पर भी सवाल उठाए हैं.
सबंग स्थित पार्टी दफ्तर में मानस भुइयां ने कहा, "सबंग में हार के लिए मैं जिम्मेदार हूं." हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि राज्यभर में मिली हार के लिए किसी एक व्यक्ति को दोषी नहीं ठहराया जा सकता. उन्होंने कहा कि पार्टी की चुनावी हार के बाद I-PAC की कार्यप्रणाली की जांच होनी चाहिए.
उन्होंने इशारों में कहा कि पार्टी के भीतर कुछ ऐसी कमियां थीं, जिन्होंने चुनावी नतीजों को प्रभावित किया. उन्होंने एक सनसनीखेज आरोप लगाते हुए दावा किया कि भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार अमल पांडा के राजनीतिक उभार में तृणमूल कांग्रेस के भीतर की कुछ ताकतों ने ही मदद की है.
मानस भुइयां ने कहा कि इसमें कोलकाता स्तर के नेतृत्व से लेकर घाटाल संगठनात्मक जिले के एक वरिष्ठ नेता तक की भूमिका रही है. हालांकि, उन्होंने TMC के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी का बचाव किया. उन्होंने कहा कि पार्टी की हार का पूरा ठीकरा एक नेता के सिर पर फोड़ना सही नहीं है.
उन्होंने कहा, "हार की जिम्मेदारी किसी एक व्यक्ति पर नहीं डाली जा सकती. यदि जीत का श्रेय मुझे मिलता है, तो हार का दोष किसी और पर नहीं मढ़ा जा सकता है. हमें इस संस्कृति से बाहर निकलना होगा. जो नेता अभिषेक बनर्जी पर सवाल उठा रहे हैं, वो कभी उनसे मिलने के लिए बेताब रहते थे."
शुभेंदु अधिकारी की तारीफ से बढ़ी सियासी हलचल
मानस भुइयां ने मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की खुलकर तारीफ की है. उन्होंने कहा कि मेदिनीपुर का एक नेता मुख्यमंत्री बना है, इस बात पर उन्हें गर्व है. उन्होंने कहा, "साठ के दशक के आखिर और सत्तर के दशक में अजय मुखर्जी के बाद मेदिनीपुर के लाल शुभेंदु अधिकारी मुख्यमंत्री बने हैं.''
उन्होंने कहा कि वो मिदनापुर जिले के मूल निवासी है. इसलिए उनको इस बात पर गर्व है. भुइयां ने मुख्यमंत्री से राज्य में शांति बहाल करने और लोगों की चिंताओं को दूर करने की अपील भी की है. उन्होंने कहा, "आप बंगाली लोगों के आंसू पोंछें और शांति वापस लाएं. मुझे मौका मिला, तो मैं शुभेंदु से बात करूंगा."
2011 के राजनीतिक बदलाव का भी किया जिक्र
भुइयां ने कहा कि साल 2011 में पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के दौरान कांग्रेस-TMC गठबंधन को संभव बनाने में उनकी भूमिका को कभी उचित पहचान नहीं मिली. उन्होंने कहा, "2011 के ऐतिहासिक राजनीतिक बदलाव के दौरान तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के तौर पर मैंने अहम भूमिका निभाई थी.''
उनको आज भी इस बात का दुख है कि किसी ने भी उस योगदान को कभी स्वीकार नहीं किया. मानस भुइयां 1982 से लगातार विधायक चुने जाते रहे हैं. वाम मोर्चा शासनकाल के दौरान भी सबंग उनका मजबूत गढ़ माना जाता था. लंबे समय तक कांग्रेस में रहने के बाद वो साल 2016 में तृणमूल कांग्रेस में शामिल हुए थे.
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