पश्चिम बंगाल चुनाव में शिकस्त और प्रदेश में भाजपा सरकार बनने के बाद से ही तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी ) में फूट पड़ गई है. एक के बाद एक कई सांसद पार्टी से इस्तीफा देते जा रहे हैं. कई बड़े चेहरे भी टीएमसी को छोड़ चुके हैं. इनमें राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव का नाम भी शामिल हैं. हाल ही में उन्होंने टीएमसी से इस्तीफा दे दिया है. वह असम से राज्यसभा सांसद हैं. उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी के साथ काम करना मुश्किल है. इस वजह से उन्होंने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है.
सुष्मिता देव के टीएमसी में शामिल होने के बाद उन्हें पार्टी ने राष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी थीं. हालांकि अब उनके इस्तीफे के बाद यह सवाल खड़ा हो गया है कि क्या पार्टी के भीतर असंतोष बढ़ रहा है. अब उनके टीएमसी छोड़ने के बाद कयास लगाए जा रहे हैं कि वह भाजपा का दामन थाम सकती है. हालांकि अभी इस मामले में उनका कोई बयान नहीं आया है.
यह भी पढ़ें: टीएमसी के बड़े सितारे छोड़ गए साथ, अब ममता बनर्जी के पास कितनी ताकत बची?
असम की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाना चाहती हैं सुष्मिता
सुष्मिता ने असम के मुख्यमंत्री और भाजपा नेता हिमंत बिस्वा सरमा से मुलाकात की है. इस दौरान क्या बातचीत हुई इसका जिक्र उन्होंने नहीं किया है, लेकिन कहा कि वह राजनीति में लोगों की सेवा करने के लिए हैं. वह असम की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाना चाहती हैं. टीएमसी में रहकर वह असम के लोगों का भला नहीं कर सकती थी. ऐसे में उन्होंने पार्टी को छोड़ा है. सुष्मिता ने कहा कि टीएमसी छोड़ने के लिए उनपर किसी दल ने कोई दबाव नहीं बनाया था. यह उनका अपना फैसला है.
क्या भाजपा का दामन थामेंगी सुष्मिता?
सुषमिता देव क्या भाजपा का दामन थामेंगीय़ इस पर अभी स्थिति साफ नहीं है, लेकिन असम के मुख्यमंत्री से हुई मुलाकात ने उनके भाजपा में जानें की अटकलों को तेज कर दिया है.आने वाले दिनों में उनके अगले कदम पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी, क्योंकि इसका असर पूर्वोत्तर और बंगाल की राजनीति पर भी पड़ सकता है.
यह भी पढ़ें: टीएमसी में संकट, सुष्मिता देव और हिमंता सरमा की बैठक
कौन हैं सुष्मिता देव
सुष्मिता देव असम से हैं. उनके पिता संतोष मोहन देव सिलचर से कई बार सांसद रह चुके हैं. राजनीतिक परिवार से आने के कारण सुष्मिता ने भी अपना करियर राजनीति में बनाया. दिल्ली यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने कांग्रेस के छात्र संगठन एनएसयूआई से स्टूडेंट यूनियन का चुनाव भी लड़ा था.
aajtak.in