"मेरे नाम में चड्ढा नहीं है. चड्ढा चड्डी बन सकता है, लेकिन घोष हमेशा घोष रहेगा." ये कड़क और दो टूक बयान सयानी घोष ने तब दिया था, जब आम आदमी पार्टी के पूर्व नेता राघव चड्ढा अपने साथियों समेत बीजेपी में शामिल हुए थे. तब एक पत्रकार के सवालों का जवाब देते हुए सयानी घोष ने पूर्व ममता बनर्जी के प्रति अपनी वफादारी की सार्वजनिक मुनादी की थी. उनका मैसेज स्पष्ट था वे दीदी का साथ नहीं छोड़ेंगी.
48 घंटा पहले ही सयानी घोष ने एक्स पर एक पोस्ट में पश्चिम बंगाल सरकार की नीतियों की आलोचना की थी.
जादवपुर स्टेशन में शुभेंदु सरकार की ओर से बुलडोजर एक्शन की तीखी निंदा करते हुए सयानी घोष ने कहा कि, "जादवपुर स्टेशन रोड पर बुलडोज़र की कार्रवाई दिल तोड़ने वाली और अन्यायपूर्ण है. पूरे राज्य में फेरीवालों को हटाने के अभियान ने हज़ारों लोगों को उनकी कमाई के जरिया से वंचित कर दिया है. बिना किसी पूर्व सूचना के हटाना अनुचित है और पुनर्वास की योजनाओं पर पूरी तरह चुप्पी, गरीबों और हाशिए पर रहने वाले लोगों के प्रति मौजूदा सरकार के इरादों पर गंभीर सवाल खड़े करती है."
अब 2 दिन की चुप्पी के बाद सयानी घोष की राजनीतिक चाल की खबर ने बंगाल की राजनीति में हलचल पैदा कर दी है.
अब बंगाल की राजनीति यू टर्न ले रही है. सयानी घोष का नाम टीएमसी के उन 20 बागी सांसदों में शामिल है जिन्होंने ममता के खिलाफ बगावत कर दिया है. 20 सांसदों का ये गुट लोकसभा में NDA को समर्थन करने पर विचार कर रहा है. इस गुट की नेता काकोली घोष ने तो यहां तक कहा है कि वे बीजेपी में शामिल हो सकते हैं. हालांकि इसकी आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है.
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TMC अलग होने के लिए जिन 20 सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं, उनमें जादवपुर की सांसद सयानी घोष भी है.
सयानी घोष विधानसभा चुनाव में ममता के लिए हाई वोल्टेज प्रचार अभियान के लिए चर्चित रहीं. प्रचार के दौरान गाया उनका गीत 'एकबार छेड़े दे नौका माझी, जाबो मदीना... आमार हृदय माझे काबा, नयाने मदीना...' काफी चर्चा में रहा और इसे ध्रुवीकरण करने वाला बताया गया.
चुनाव प्रचार के दौरान सयानी की सक्रियता देख कई लोगों ने इनमें ममता की छवि देखी थी. सयानी घोष ने तब इस पर आपत्ति भी नहीं जताई थी.
उन्होंने कहा था, "अगर मैं ममता बनर्जी की पार्टी में हूं, तो यह मुश्किल होगा कि मैं नरेंद्र मोदी जैसी दिखूं या सीपीएम नेता या सोनिया गांधी जैसी दिखूं. तो कोई दिक्कत नहीं, मुझे खुशी है कि जिस पार्टी में हूं, वह मुझे उनके जैसी दिखाती है. मैं उनकी तरह ही सरल रहना चाहती हूं. मैं उनकी तरह जमीन से जुड़ी रहना चाहती हूं"
सायनी धीरे-धीरे ममता बनर्जी के पीछे चलने लगीं. सफेद साड़ी और हवाई सैंडल पहने सयानी ममता की 'प्रतिरूप' बन गईं.
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चुनाव हारने के बाद ममता ने जब अपनी पार्टी के सभी संगठनों का पुनर्गठन किया तो हार के बावजूद ममता बनर्जी ने सयानी के नेतृत्व में भरोसा जताया और उन्हें TMC यूथ विंग का अध्यक्ष बनाया.
लेकिन पिछले दो-चार दिनों में सयानी की चुप्पी सभी को हैरान कर रही थी. इसे लेकर कई अटकलें लगाई जा रही थीं. सोमवार को हुई कई बैठकों के बाद सायनी को लेकर अटकलें और बढ़ गईं.
ऐसे में सयानी की बगावत की खबर ने बंगाल से लेकर दिल्ली तक लोगों को चकित कर दिया है.
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