कोलकाता के सबसे पुराने और प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों में शामिल सुरेंद्रनाथ कॉलेज एक बड़े विवाद के केंद्र में आ गया है. कॉलेज के छात्रसंघ कक्ष से करीब एक करोड़ रुपये नकद, दो AC बेडरूम, शराब की बोतलें, कंडोम के पैकेट और एक रिवॉल्वर बरामद होने के बाद राज्य की राजनीति गरमा गई है. भारतीय जनता पार्टी ने इस मामले को लेकर तृणमूल कांग्रेस पर गंभीर आरोप लगाए हैं.
एक साल बाद खुला छात्रसंघ कक्ष
कॉलेज का छात्रसंघ कक्ष लगभग एक वर्ष बाद खोला गया. वर्ष 2025 में कलकत्ता हाई कोर्ट ने कॉलेजों में छात्रसंघ चुनाव नहीं होने के कारण छात्रसंघ कक्षों को बंद करने का निर्देश दिया था. यह आदेश दक्षिण कोलकाता लॉ कॉलेज के छात्रसंघ कक्ष में एक छात्रा के साथ सामूहिक दुष्कर्म की घटना के बाद आया था.
हाल ही में राज्य सरकार द्वारा कॉलेजों में छात्रसंघ निधि के खर्च का लेखा-जोखा जांचने के निर्देश दिए गए. इसके बाद कॉलेज प्रशासन ने मंगलवार को छात्रसंघ कक्ष की सफाई शुरू कराई, जहां से चौंकाने वाले खुलासे सामने आए.
अलमारी से मिले एक करोड़ रुपये
सफाई के दौरान छात्रसंघ कक्ष में रखी एक पुरानी लकड़ी की अलमारी से दो बड़े बक्से बरामद हुए. इनमें 100 और 500 रुपये के नोटों की गड्डियां भरी हुई थीं. कॉलेज प्रशासन के अनुसार नकदी की कुल राशि करीब एक करोड़ रुपये है.
हालांकि, नकदी का एक बड़ा हिस्सा दीमक लगने से खराब हो चुका था, जिससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि यह रकम लंबे समय से वहां रखी हुई थी. भाजपा ने आरोप लगाया है कि यह पैसा कॉलेज में दाखिले के दौरान होने वाली कथित अनियमितताओं और अवैध वसूली से जुड़ा हो सकता है.
कॉलेज परिसर में मिले दो एसी बेडरूम
नकदी मिलने के बाद कॉलेज परिसर में व्यापक तलाशी अभियान चलाया गया. इस दौरान कॉलेज परिसर के भीतर दो बेडरूम भी मिले. इन कमरों में एयर कंडीशनर, अटैच टॉयलेट, बिस्तर, महंगे गद्दे और तकिए मौजूद थे. स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार इन कमरों का उद्घाटन पूर्व तृणमूल सरकार के दौरान "टेरेस फैसिलिटी" के रूप में किया गया था.
कॉलेज प्रशासन ने आरोप लगाया कि इन कमरों का उपयोग तृणमूल के प्रभावशाली नेता देवाशीष बंद्योपाध्याय उर्फ "कानकाटा देबू" और उनके पुत्र शिवाशीष द्वारा किया जाता था. आरोप यह भी है कि कॉलेज के कर्मचारियों से इन नेताओं की मालिश तक कराई जाती थी. हालांकि देवाशीष बंद्योपाध्याय ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उन्हें ऐसे किसी बेडरूम की जानकारी नहीं है.
शराब की बोतलें, कंडोम और रिवॉल्वर भी बरामद
मामला तब और गंभीर हो गया जब कॉलेज की छत से कई शराब की बोतलें बरामद हुईं. वहीं छात्र कॉमन रूम से कंडोम के पैकेट भी मिले. इसके अलावा छात्रसंघ कक्ष के भीतर एक काले पैकेट में छिपाकर रखी गई रिवॉल्वर भी बरामद की गई. सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और हथियार को अपने कब्जे में ले लिया. इन बरामदगियों ने कॉलेज प्रशासन, छात्रों और आम लोगों को हैरान कर दिया है.
भाजपा ने की ईडी जांच की मांग
मामले के सामने आने के बाद भाजपा विधायक सजल घोष कॉलेज पहुंचे और नकदी के स्रोत की जांच के लिए प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से जांच कराने की मांग की. उन्होंने आरोप लगाया कि कॉलेज में दाखिले के बदले छात्रों से लाखों रुपये वसूले जाते थे. उनके अनुसार तृणमूल छात्र परिषद के नेता छात्रों से प्रवेश दिलाने के नाम पर भारी रकम लेते थे. सजल घोष ने दावा किया कि छात्रसंघ शुल्क के नाम पर छात्रों से सामान्यतः 50 से 100 रुपये ही लिए जाते हैं. ऐसे में केवल छात्रसंघ निधि से एक वर्ष में डेढ़ करोड़ रुपये जमा होना संभव नहीं है.
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कथित भ्रष्टाचार से अर्जित धन अंततः तृणमूल नेतृत्व तक पहुंचता था. हालांकि इन आरोपों पर तृणमूल कांग्रेस की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है.
वर्षों से लगते रहे हैं अवैध वसूली के आरोप
रिपोर्ट के अनुसार पश्चिम बंगाल के कई कॉलेजों में वर्षों से छात्र नेताओं पर दाखिले के बदले छात्रों से 20 हजार से 50 हजार रुपये तक वसूलने के आरोप लगते रहे हैं. वर्ष 2017 में तत्कालीन शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी ने भी तृणमूल छात्र परिषद को ऐसी गतिविधियों से दूर रहने की चेतावनी दी थी. बावजूद इसके आरोप लगते रहे कि यह प्रथा पर्दे के पीछे जारी रही.
छात्रसंघ चुनाव नहीं हुए, फिर भी चलता रहा प्रभाव
वर्ष 2019 के बाद राज्य के अधिकांश कॉलेजों में छात्रसंघ चुनाव नहीं हुए. इसके बावजूद छात्र नेताओं का प्रभाव कैंपसों में बना रहा. एक विश्वविद्यालय के कुलपति ने दावा किया कि छात्रसंघ कक्ष बंद होने के बावजूद उनका उपयोग जारी रहा. छात्र नेताओं द्वारा विभिन्न कार्यक्रमों और उत्सवों के नाम पर छात्रों से धन वसूला जाता था.
कर्मचारियों ने लगाए डराने-धमकाने के आरोप
सुरेंद्रनाथ कॉलेज के शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों ने भी आरोप लगाया है कि छात्रसंघ का कॉलेज पर मजबूत नियंत्रण था. जो लोग उनके निर्देशों का पालन नहीं करते थे, उन्हें परेशान किया जाता था.
कर्मचारियों का दावा है कि छात्रसंघ कक्ष छात्र राजनीति के नाम पर एक निजी कारोबार की तरह संचालित किया जा रहा था. आरोप है कि योग्य और आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों की अनदेखी की जाती थी, जबकि पैसे देने वालों को प्राथमिकता के आधार पर प्रवेश मिलता था.
और खुलासों की आशंका
विशेषज्ञों का मानना है कि सुरेंद्रनाथ कॉलेज में हुई यह बरामदगी केवल शुरुआत हो सकती है. राज्य सरकार द्वारा छात्रसंघ निधियों के ऑडिट के आदेश के बाद अन्य कॉलेजों में भी ऐसे ही मामलों के सामने आने की संभावना जताई जा रही है.
फिलहाल नकदी, रिवॉल्वर और अन्य सामान की बरामदगी को लेकर जांच जारी है और पूरे मामले ने पश्चिम बंगाल की शिक्षा व्यवस्था तथा छात्र राजनीति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
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