कोलकाता एयरपोर्ट 136 साल पुरानी मस्जिद हटाने के प्रस्ताव पर मचा सियासी घमासान, प्रशासन और समिति आमने-सामने

कोलकाता एयरपोर्ट के रनवे के पास स्थित 136 साल पुरानी मस्जिद को हटाने को लेकर विवाद बढ़ गया है. प्रशासन और एयरपोर्ट अथॉरिटी इस स्थान को सुरक्षा और विस्तार के कारण हटाने की बात कर रहे हैं, जबकि मस्जिद समिति और अल्पसंख्यक संगठन इसका विरोध कर रहे हैं. मामले पर बैठकें हुईं लेकिन कोई ठोस नतीजा नहीं निकला.

Advertisement
मंदिर स्थानांतरण पर सहमति, मस्जिद पर असहमति बरकरार. (Photo: Screengrab) मंदिर स्थानांतरण पर सहमति, मस्जिद पर असहमति बरकरार. (Photo: Screengrab)

अनुपम मिश्रा / राही हलदर

  • कोलकाता,
  • 28 मई 2026,
  • अपडेटेड 5:42 PM IST

कोलकाता हवाई अड्डे के रनवे के पास स्थित मस्जिद को हटाने को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. सरकार बदलने के बाद प्रशासन ने इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाया है. वहीं मस्जिद समिति और कई अल्पसंख्यक संगठन इस प्रस्तावित कदम का विरोध कर रहे हैं. इस मामले को लेकर इलाके में चर्चा तेज हो गई है. जानकारी के अनुसार, यह मस्जिद लगभग 136 साल पुरानी बताई जा रही है और हवाई अड्डे के रनवे के बेहद करीब स्थित है. लंबे समय से इसके स्थान को लेकर अटकलें चल रही थीं. अब इस मुद्दे पर प्रशासनिक स्तर पर चर्चा तेज हो गई है.

Advertisement

इस मामले पर उत्तरी 24 परगना के जिलाधिकारी कार्यालय में एक अहम बैठक भी हो चुकी है. बैठक में जिलाधिकारी, प्रशासनिक अधिकारी, एयरपोर्ट अथॉरिटी के प्रतिनिधि, CISF कर्मी, स्थानीय बीजेपी विधायक सौरव सिकदर और पूर्व राज्य मंत्री सिद्दीकुल्ला चौधरी मौजूद थे, जो अल्पसंख्यक समुदाय का प्रतिनिधित्व कर रहे थे. बैठक के बाद पूर्व मंत्री सिद्दीकुल्ला चौधरी ने कहा कि कोई भी ठोस नतीजा नहीं निकला है. उन्होंने दावा किया कि मस्जिद का निर्माण 1890 में हुआ था और 1962 में एयरपोर्ट विस्तार के दौरान आसपास की जमीन का अधिग्रहण हुआ था, लेकिन मस्जिद की जमीन आज भी रिकॉर्ड में मस्जिद के नाम पर दर्ज है.

 एयरपोर्ट मस्जिद हटाने को लेकर बड़ा विवाद

उन्होंने यह भी कहा कि मस्जिद में नियमित रूप से नमाज पढ़ी जाती है और यह प्रक्रिया एयरपोर्ट अथॉरिटी की अनुमति से चल रही है. उनका कहना है कि इस मस्जिद को जबरदस्ती हटाया नहीं जा सकता. उन्होंने कहा कि इस समस्या का समाधान बातचीत के जरिए किया जाना चाहिए और इसके लिए कुछ राष्ट्रीय स्तर के अल्पसंख्यक संगठनों को शामिल किया जाना चाहिए. सिद्दीकुल्ला चौधरी ने यह भी दावा किया कि उन्होंने सुझाव दिया है कि दारुल उलूम देवबंद, जमीयत उलेमा और ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड जैसे संगठनों से बातचीत कर समाधान निकाला जाए. उन्होंने कहा कि स्थानीय लोग मस्जिद हटाने के खिलाफ हैं और बातचीत ही एकमात्र रास्ता है.

Advertisement

वहीं बीजेपी विधायक सौरव सिकदर ने अलग रुख अपनाया है. उनका कहना है कि एयरपोर्ट परिसर के भीतर स्थित यह मस्जिद उड़ानों के संचालन को प्रभावित कर रही है. उन्होंने दावा किया कि इसकी वजह से कई अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के संचालन पर असर पड़ता है और सुरक्षा से जुड़े मुद्दे भी सामने आते हैं.

उन्होंने कहा कि पहले भी इस विषय पर बैठक हो चुकी है, जिसमें मस्जिद समिति के प्रतिनिधि शामिल थे, लेकिन वो स्थानांतरण के लिए तैयार नहीं हुए. उनका कहना है कि देश के विकास और एयरपोर्ट विस्तार के लिए जरूरी कदम उठाने होंगे और धार्मिक भावनाएं विकास में बाधा नहीं बन सकतीं. विधायक ने यह भी कहा कि यदि एयरपोर्ट का विस्तार किया जाता है तो पास में स्थित एक पुलिस स्टेशन के सामने मौजूद मंदिर को भी स्थानांतरित करना पड़ सकता है. मंदिर समिति इस पर सहमत हो चुकी है, लेकिन मस्जिद समिति इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं कर रही है.

मस्जिद समिति और अल्पसंख्यक संगठनों का सख्त विरोध

उन्होंने कहा कि प्रशासनिक स्तर पर चर्चा जारी है और अंतिम निर्णय जनहित और विकास को ध्यान में रखकर लिया जाएगा. फिलहाल इस पूरे मामले पर दोनों पक्षों के बीच मतभेद बने हुए हैं. एक तरफ प्रशासन और एयरपोर्ट अथॉरिटी सुरक्षा और विस्तार की जरूरत बता रही है, वहीं दूसरी तरफ मस्जिद समिति ऐतिहासिक और कानूनी अधिकारों का हवाला देकर विरोध कर रही है. आने वाले दिनों में इस विवाद पर और बातचीत होने की संभावना है.

---- समाप्त ----
रिपोर्ट- अरिंदम भट्टाचार्य

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »