भड़काऊ भाषण मामले में घिरे अभिषेक बनर्जी, FIR रद्द कराने पहुंचे कलकत्ता हाई कोर्ट

तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अभिषेक बनर्जी ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव प्रक्रिया के दौरान कथित तौर पर भड़काऊ बयान देने के मामले में दर्ज प्राथमिकी (FIR) को निरस्त करने के लिए कलकत्ता उच्च न्यायालय में याचिका दायर की है.

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चुनावी भाषणों को लेकर बढ़ीं अभिषेक बनर्जी की मुश्किलें (Photo- PTI) चुनावी भाषणों को लेकर बढ़ीं अभिषेक बनर्जी की मुश्किलें (Photo- PTI)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 19 मई 2026,
  • अपडेटेड 4:21 AM IST

पश्चिम बंगाल में हाल ही में संपन्न हुए विधानसभा चुनावों की गर्माहट अब अदालती गलियारों तक पहुंच गई है. तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और डायमंड हार्बर से सांसद अभिषेक बनर्जी ने अपने खिलाफ दर्ज FIR को रद्द करने की मांग को लेकर कलकत्ता हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है.

 यह मामला हाल ही में संपन्न हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान दिए गए कथित भड़काऊ और आपत्तिजनक बयानों से जुड़ा हुआ है. अभिषेक बनर्जी की ओर से दायर याचिका में FIR को पूरी तरह निरस्त करने की मांग की गई है. 

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वरिष्ठ अधिवक्ता और टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी ने बताया कि इस मामले पर इसी सप्ताह न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य की बेंच में सुनवाई हो सकती है. दरअसल, पश्चिम बंगाल पुलिस ने अभिषेक बनर्जी के खिलाफ एक सामाजिक कार्यकर्ता राजीव सरकार की शिकायत के आधार पर मामला दर्ज किया था. 

यह भी पढ़ें: भड़काऊ भाषण को लेकर बढ़ीं अभिषेक बनर्जी की मुश्किलें! FIR दर्ज,अमित शाह को धमकी देने का आरोप 

शिकायत 5 मई को, यानी विधानसभा चुनाव परिणाम आने के एक दिन बाद, उत्तर 24 परगना जिले के बागुईआटी थाने में दर्ज कराई गई थी. बाद में 15 मई को बिधाननगर पुलिस कमिश्नरेट के साइबर क्राइम थाने में औपचारिक FIR दर्ज की गई.

शिकायतकर्ता का आरोप है कि चुनाव प्रचार के दौरान अभिषेक बनर्जी ने सार्वजनिक सभाओं में ऐसे बयान दिए जो भड़काऊ थे और जिनसे कानून-व्यवस्था तथा सांप्रदायिक सौहार्द बिगड़ने की आशंका पैदा हो सकती थी. शिकायत में यह भी दावा किया गया कि बयान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से जुड़े संदर्भ में दिए गए थे.

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अब अभिषेक बनर्जी ने अदालत में कहा है कि उनके खिलाफ दर्ज FIR कानूनी रूप से टिकाऊ नहीं है और इसे रद्द किया जाना चाहिए. फिलहाल, विधानसभा चुनाव के ठीक बाद आए इस कानूनी मोड़ ने बंगाल की राजनीतिक सरगर्मियों को एक बार फिर तेज कर दिया है और हर किसी की नजरें अब कलकत्ता हाई कोर्ट के रुख पर टिकी हैं.
 

(PTI इनपुट्स के साथ)

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