Baghpat Murder Case: 10 साल पहले नमकीन और कोल्ड ड्रिंक को लेकर हुआ एक मामूली विवाद आखिरकार तीन लाशों पर जाकर खत्म हुआ. बागपत के हिस्ट्रीशीटर वरुण लुहारी ने पुरानी रंजिश में व्यापारी बाप-बेटे को गोलियों से भून डाला, लेकिन भागते वक्त खुद भी भीड़ के हत्थे चढ़ गया. देखते ही देखते गोलियों और खून से सनी यह दुश्मनी पूरे जिले में चर्चा का विषय बन गई. आक्रोशित व्यापरियों ने बाजार बंद कर विरोध दर्ज किया.
दरअसल, कोतवाली बड़ौत इलाके में हुए इस सनसनीखेज हत्याकांड ने पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है. जिस रंजिश की शुरुआत साल 2015 में दिल्ली बस स्टैंड पर नमकीन और कोल्ड ड्रिंक को लेकर हुए एक मामूली विवाद से हुई थी, उसी ने एक दशक बाद तीन लोगों की जान ले ली. व्यापारी पिता-पुत्र की हत्या करने के बाद भाग रहे हिस्ट्रीशीटर वरुण लुहारी को लोगों ने घेर लिया और जमकर पीटा. इस दौरान चली गोली में वह भी गंभीर रूप से घायल हो गया और इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई.
वरुण लुहारी बागपत जिले के लुहारी गांव का निवासी था. उसके पिता बाबूराम सेवानिवृत्त शिक्षक हैं. परिवार लंबे समय तक बड़ौत की नवयुग कॉलोनी में रहा. 17 जुलाई 2015 को दिल्ली बस स्टैंड स्थित सोहनलाल अग्रवाल की दुकान पर हुए विवाद के बाद दोनों पक्षों के बीच दुश्मनी की नींव पड़ी.
आरोप है कि उस समय वरुण अपने साथियों के साथ शराब पी रहा था और बिना पैसे सामान लेने पहुंचा था. विवाद इतना बढ़ा कि हिंसक संघर्ष में वरुण के भाई की मौत हो गई. इसी घटना के बाद दोनों परिवारों के बीच रंजिश गहराती चली गई. भाई की मौत के बाद वरुण लुहारी अपराध की दुनिया में लगातार सक्रिय होता गया. उसके खिलाफ कई संगीन मुकदमे दर्ज हुए और पुलिस ने उस पर गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की. वर्ष 2023 में प्रशासन ने उसकी संपत्ति कुर्क कर दी थी. इसके बाद उसका परिवार हरिद्वार जाकर रहने लगा था. हालांकि वरुण का बागपत आना-जाना बना रहा.
बताया जा रहा है कि घटना वाले दिन भी वरुण किसी मुकदमे की तारीख पर बागपत आया था. शाम होते-होते उसने अपनी पुरानी रंजिश का खूनी हिसाब चुकाने के लिए व्यापारी सोहनलाल अग्रवाल और उनके बेटे पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसा दीं. दोनों की मौके पर ही मौत हो गई. वारदात के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई.
वरुण का आपराधिक इतिहास भी काफी लंबा रहा है. वर्ष 2019 में उसने जेल के अंदर से एक व्यापारी से 20 लाख रुपये की रंगदारी मांगकर सुर्खियां बटोरी थीं. पुलिस रिकॉर्ड में उसका नाम कई गंभीर मामलों में दर्ज था. यही वजह थी कि वह लंबे समय से पुलिस और प्रशासन के रडार पर था. अब 10 साल पुरानी इस दुश्मनी का अंत तीन मौतों के साथ हुआ है. एक तरफ व्यापारी पिता-पुत्र की हत्या हुई तो दूसरी ओर हमले के बाद भीड़ के गुस्से का शिकार बना हिस्ट्रीशीटर वरुण लुहारी भी जिंदगी की जंग हार गया. बागपत का यह तिहरा हत्याकांड पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बना हुआ है.
मनुदेव उपाध्याय