कौन हैं अयोध्या के GST डिप्टी कमिश्नर प्रशांत सिंह? जिन्होंने CM योगी के 'सम्मान' में दिया इस्तीफा

अयोध्या के जीएसटी डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार सिंह ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद द्वारा सीएम योगी पर की गई टिप्पणी के विरोध में इस्तीफा दे दिया है. उन्होंने कहा कि जिस सरकार से वे वेतन लेते हैं, उसके मुखिया का अपमान असहनीय है. प्रशांत ने इसे समाज को तोड़ने वाला और जातिगत वैमनस्य फैलाने वाला बयान बताया.

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जीएसटी के डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार सिंह ने दिया इस्तीफा (Photo- ITG) जीएसटी के डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार सिंह ने दिया इस्तीफा (Photo- ITG)

मयंक शुक्ला

  • अयोध्या ,
  • 27 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 7:48 PM IST

उत्तर प्रदेश में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़ा विवाद लगातार गहराता जा रहा है. अब यह विवाद प्रशासनिक हलकों तक पहुंच गया है. इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समर्थन में अयोध्या में तैनात GST के डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार सिंह ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है.

डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार सिंह ने कहा कि अविमुक्तेश्वरानंद द्वारा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ की गई टिप्पणी से वे गहराई से आहत हैं. उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा जिस प्रदेश का नमक और रोटी खाता हूं, जिस सरकार के वेतन से मेरा परिवार चलता है, उसी प्रदेश के मुख्यमंत्री का सार्वजनिक रूप से अपमान किया जाए, यह मुझे स्वीकार नहीं. मैं रोबोट नहीं हूं, मेरे भीतर भी संवेदनाएं हैं.

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आपको बता दें कि 48 वर्षीय प्रशांत कुमार सिंह मूल रूप से मऊ जिले के सरवा गांव के निवासी हैं. उन्हें पहली तैनाती सहारनपुर में मिली थी, जबकि 21 अक्टूबर 2023 को उनकी पोस्टिंग अयोध्या में हुई. उन्होंने राज्यपाल को भेजे अपने इस्तीफे में लिखा है कि संविधान में विरोध के तरीके तय हैं, लेकिन पालकी पर बैठकर मुख्यमंत्री के खिलाफ अपमानजनक भाषा का प्रयोग करना समाज को तोड़ने का काम है. ऐसे बयान जातिगत वैमनस्य फैलाते हैं, जिसका वे खुलकर विरोध करते हैं.

इस्तीफा देने के बाद प्रशांत कुमार सिंह पत्नी से फोन पर बात करते समय भावुक हो गए. उनका गला रूंध गया और उन्होंने रोते हुए कहा मुझे यह सब सहन नहीं हुआ. उन्होंने कहा- दो रातों से सो नहीं पाया था. मेरी दो छोटी बेटियां हैं, लेकिन आत्मसम्मान से समझौता नहीं कर सकता. प्रशांत ने यह भी कहा कि इस्तीफा मंजूर होने तक वे अपने दायित्वों का निर्वहन करते रहेंगे और उसके बाद समाज सेवा के कार्यों में जुटेंगे.

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गौरतलब है कि इससे पहले सोमवार को बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने भी इस्तीफा दिया था. उन्होंने अपने इस्तीफे का कारण UGC का नया कानून और शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों के साथ हुई कथित मारपीट को बताया था. हालांकि, शासन ने अलंकार अग्निहोत्री को निलंबित करते हुए उनके खिलाफ विभागीय जांच के आदेश दिए हैं.

शंकराचार्य विवाद की पृष्ठभूमि की बात करें तो 18 जनवरी को माघ मेले के दौरान अविमुक्तेश्वरानंद की पालकी रोके जाने और शिष्यों से कथित धक्का-मुक्की के बाद मामला गरमा गया. इसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा ‘कालनेमि’ शब्द के प्रयोग और फिर शंकराचार्य की ओर से की गई तीखी प्रतिक्रियाओं ने विवाद को और भड़का दिया. इस पूरे घटनाक्रम में संत समाज भी दो हिस्सों में बंटा नजर आ रहा है.

इस बीच दो दिनों में दो वरिष्ठ अधिकारियों के इस्तीफों ने इस विवाद को और गंभीर बना दिया है. अब यह मुद्दा सिर्फ धार्मिक या राजनीतिक नहीं, बल्कि प्रशासनिक और संवैधानिक बहस का रूप लेता जा रहा है.

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