लखनऊ के अलीगंज में सोमवार को लगी भीषण आग ने सिर्फ एक इमारत को नहीं जलाया, उसने कई परिवारों के सपनों को भी राख कर दिया. जिन हाथों में कुछ महीनों बाद शादी की मेहंदी सजनी थी, वे अब सूने हो चुके हैं. जिन घरों में रिश्तेदारों के आने-जाने, शादी की तारीख तय होने और नई जिंदगी की बातों का उत्साह था, वहां अब सिर्फ सन्नाटा और आंसू हैं. इस दर्दनाक हादसे में जान गंवाने वालों में निलेश कुमार और अनामिका सामंत भी शामिल हैं, जिनकी प्रेम कहानी शादी तक पहुंचने से पहले ही खत्म हो गई.
बिल्डिंग में एक साथ काम करते थे नीलेश और अनामिका
27 साल का निलेश कुमार और 30 साल की अनामिका सामंत एक ही एनीमेशन सेंटर में काम करते थे. साथ काम करते-करते दोनों के बीच दोस्ती हुई और फिर यह रिश्ता प्यार में बदल गया. दोनों परिवारों ने भी इस रिश्ते को स्वीकार कर लिया था और शादी की तैयारियां शुरू हो चुकी थीं.
महज कुछ दिन पहले ही अनामिका के माता-पिता पश्चिम बंगाल से लखनऊ आए थे. दोनों परिवारों की मुलाकात हुई थी और शादी को लेकर शुरुआती रस्में भी निभाई गई थीं. निलेश के भाई अभिषेक बताते हैं कि घर में बेहद खुशहाल माहौल था. सभी लोग अनामिका से मिले थे और परिवार ने उसे दिल से अपना लिया था. अब वही परिवार पोस्टमार्टम हाउस के बाहर खड़ा होकर अपने बेटे के शव का इंतजार कर रहा है.
अनामिका के घर वालों से मिलना था, हुई थी टिकट
परिजनों के मुताबिक, अगले सप्ताह निलेश के परिवार को अनामिका के घर पश्चिम बंगाल जाना था. इसके लिए ट्रेन टिकट भी बुक हो चुके थे. शादी की तारीख और आगे की तैयारियों पर चर्चा चल रही थी. लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था. निलेश अपने परिवार में तीन भाई-बहनों में दूसरे नंबर पर थे.
परिवार का कहना है कि नीलेश इस साल प्रमोशन और सैलरी हाइक की उम्मीद कर रहे थे. इसी वजह से उन्होंने शादी को अगले साल तक टालने का फैसला किया था ताकि आर्थिक रूप से और मजबूत होकर नई जिंदगी शुरू कर सकें.
'निलेश कहता था- नए घर में शादी करूंगा'
निलेश अपने सपनों के साथ-साथ परिवार के सपनों को भी संवार रहे थे. वह घर बनवाने में भी फैमली की मदद कर रहे थे और अक्सर कहते थे कि नए घर में शिफ्ट होने के बाद ही शादी करेंगे. रिश्तेदार समरेंद्र बताते हैं कि निलेश ने कई बार यह बात दोहराई थी कि अगले साल नए घर में ही उनकी शादी होगी. लेकिन अब उस घर में शादी नहीं, बल्कि शोक की छाया है.
इस त्रासदी ने अनामिका के परिवार को भी गहरा घाव दिया है. हादसे में उनकी 27 वर्षीय चचेरी बहन सोमिल्या की भी मौत हो गई, जो उसी संस्थान में कार्यरत थीं. कुछ घंटे पहले तक दोनों परिवार शादी की योजनाओं और भविष्य के सपनों पर चर्चा कर रहे थे, लेकिन शाम होते-होते सब कुछ बदल चुका था.
लखनऊ का यह अग्निकांड अब सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि उन अधूरे सपनों की कहानी बन गया है, जिन्हें आग की लपटों ने हमेशा के लिए निगल लिया.
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