पुलिस की तैयारी, जनता को पड़ी भारी! मॉक ड्रिल ने निकाल दिए लोगों के आंसू

मोहर्रम की सुरक्षा तैयारियों के तहत बिजनौर पुलिस द्वारा आयोजित दंगा नियंत्रण मॉक ड्रिल उस समय सवालों के घेरे में आ गई, जब आंसू गैस के गोलों का धुआं आसपास के बाजार और सड़कों तक पहुंच गया. धुएं से राहगीरों की आंखों में जलन होने लगी, बच्चे रोने लगे और स्थानीय लोगों ने बिना पूर्व सूचना ऐसी ड्रिल पर सवाल उठाए.

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दंगे से पहले ही आंसू निकलवा गई पुलिस की ड्रिल. (Photo: Screengrab) दंगे से पहले ही आंसू निकलवा गई पुलिस की ड्रिल. (Photo: Screengrab)

ऋतिक राजपूत

  • बिजनौर ,
  • 23 जून 2026,
  • अपडेटेड 11:12 PM IST

मोहर्रम पर्व शांतिपूर्ण और सुरक्षित माहौल में संपन्न कराने के उद्देश्य से बिजनौर पुलिस ने रिजर्व पुलिस लाइन्स परिसर में दंगा नियंत्रण मॉक ड्रिल का आयोजन किया. पुलिस का कहना है कि यह अभ्यास कानून-व्यवस्था बनाए रखने और किसी भी आपात स्थिति से निपटने की तैयारियों का हिस्सा था. हालांकि यह मॉक ड्रिल अब चर्चा और सवालों के केंद्र में आ गई है. प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार सोमवार को पुलिस लाइन परिसर में दंगा नियंत्रण अभ्यास चल रहा था. इस दौरान अश्रु गैस यानी टियर गैस के गोलों का इस्तेमाल किया गया. कुछ ही देर में इन गोलों से निकलने वाला धुआं हवा के साथ आसपास के बाजारों, दुकानों और सड़कों तक पहुंच गया. इसके बाद वहां मौजूद लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा.

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धुआं फैलते ही कई राहगीरों की आंखों में तेज जलन शुरू हो गई. लोग सड़क पर चलते-चलते अपनी आंखें मलते दिखाई दिए. कुछ लोगों को खांसी आने लगी, जबकि कई लोगों ने सांस लेने में दिक्कत की शिकायत की. सबसे ज्यादा असर छोटे बच्चों पर देखने को मिला. कई बच्चे बीच सड़क पर रोते नजर आए और परिजनों को उन्हें तुरंत वहां से हटाना पड़ा.

मोहर्रम सुरक्षा की तैयारी के बीच उठे नए सवाल

स्थानीय दुकानदारों का कहना है कि उन्हें पहले से इस तरह की किसी मॉक ड्रिल या टियर गैस के इस्तेमाल की जानकारी नहीं दी गई थी. उनका आरोप है कि अचानक फैले धुएं से ग्राहकों और व्यापारियों को परेशानी हुई. कई लोगों को अपनी दुकानें छोड़कर बाहर निकलना पड़ा.

कुछ अभिभावकों ने भी इस घटना पर सवाल उठाए. उनका कहना है कि यदि यह सिर्फ एक अभ्यास था तो आम नागरिकों को इसकी परेशानी क्यों झेलनी पड़ी. लोगों ने यह भी चिंता जताई कि यदि कोई बुजुर्ग, अस्थमा का मरीज या किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित व्यक्ति प्रभावित हो जाता तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेता.

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विशेषज्ञों के अनुसार टियर गैस वास्तव में एक रासायनिक दंगा नियंत्रण एजेंट होती है. इसके प्रमुख घटकों में सीएस गैस, सीएन गैस और सीआर गैस शामिल हैं. इनका उपयोग भीड़ को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है. टियर गैस के संपर्क में आने पर आंखों में जलन, आंखों से पानी आना, आंखों का लाल होना, लगातार खांसी, गले में जलन, सांस लेने में परेशानी, त्वचा में जलन और घबराहट जैसी समस्याएं हो सकती हैं. बच्चों, बुजुर्गों और अस्थमा के मरीजों पर इसका प्रभाव अपेक्षाकृत अधिक हो सकता है.

सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की मॉक ड्रिल के दौरान कुछ जरूरी सावधानियों का पालन किया जाना चाहिए. इनमें आसपास के नागरिकों और व्यापारियों को पहले से सूचना देना, हवा की दिशा का आकलन करना, भीड़भाड़ वाले इलाकों से पर्याप्त दूरी पर अभ्यास करना, मेडिकल सहायता और एम्बुलेंस की व्यवस्था रखना तथा सुरक्षा घेरा बनाना शामिल है ताकि आम लोग प्रभावित न हों.

पुलिस के अनुसार इस मॉक ड्रिल में भीड़ नियंत्रण, रणनीतिक घेराबंदी, त्वरित प्रतिक्रिया, लाठीचार्ज, वाटर कैनन, एंटी रायट गन और अश्रु गैस के उपयोग का अभ्यास कराया गया. यह कार्यक्रम पुलिस अधीक्षक बिजनौर के निर्देशन तथा क्षेत्राधिकारी नगर एवं लाइन्स अभय कुमार पांडे के नेतृत्व में आयोजित किया गया. इसमें विभिन्न थानों से आए उपनिरीक्षक, मुख्य आरक्षी, आरक्षी और महिला आरक्षियों ने हिस्सा लिया.

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बिना सूचना ड्रिल पर स्थानीय लोगों ने जताई नाराजगी

मोहर्रम जैसे संवेदनशील पर्व को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए पुलिस की तैयारियां महत्वपूर्ण मानी जाती हैं. लेकिन इस घटना ने सुरक्षा अभ्यास और आम जनता की सुविधा के बीच संतुलन को लेकर बहस छेड़ दी है. अब लोगों की नजर इस बात पर है कि भविष्य में इस तरह की मॉक ड्रिल के दौरान पुलिस प्रशासन जनसुरक्षा और जनसुविधा को लेकर क्या अतिरिक्त कदम उठाता है.
 

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