UP में नियम तोड़ने वाले प्राइवेट अस्पतालों पर सख्त एक्शन... 178 के लाइसेंस रद्द, 281 पर FIR और 533 सील

उत्तर प्रदेश के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक ने विधानसभा में बताया कि राज्य सरकार ने निजी स्वास्थ्य संस्थानों के खिलाफ सख्त कदम उठाते हुए 178 निजी अस्पतालों के लाइसेंस रद्द किए हैं. उन्होंने बताया कि अपील और सुनवाई के बाद 59 अस्पतालों के लाइसेंस बहाल किए गए हैं. यह जानकारी उन्होंने समाजवादी पार्टी के विधायक अतुल प्रधान के प्रश्न के उत्तर में दी.

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यूपी के उपमुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक. (Photo: X/@UPAssembly) यूपी के उपमुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक. (Photo: X/@UPAssembly)

aajtak.in

  • लखनऊ,
  • 16 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 5:50 PM IST

उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री और चिकित्सा स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक ने सोमवार को विधानसभा में बताया कि राज्य सरकार ने निजी अस्पतालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए 178 अस्पतालों के लाइसेंस रद्द किए हैं. हालांकि, अपील और सुनवाई के बाद 59 अस्पतालों के लाइसेंस बहाल कर दिए गए. समाजवादी पार्टी के विधायक अतुल प्रधान द्वारा पूछे गए पूरक प्रश्न के जवाब में उपमुख्यमंत्री ने कहा कि निजी अस्पतालों के खिलाफ लगभग 500 शिकायतें प्राप्त हुई थीं. 

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उन्होंने कहा कि इन शिकायतों की जांच के बाद नियमों और मानकों का उल्लंघन पाए जाने पर बड़े पैमाने पर कार्रवाई की गई. ब्रजेश पाठक ने बताया कि कई अस्पताल बिना मानकों का पालन किए संचालित हो रहे थे, जिसके चलते उनके लाइसेंस निरस्त किए गए. उन्होंने सदन को यह भी जानकारी दी कि नियमों का उल्लंघन कर कार्यरत पाए गए 281 निजी अस्पतालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है. इसके अतिरिक्त, 533 अस्पतालों को सील किया गया है.

91 डायग्नोस्टिक सेंटरों को सील किया गया

वहीं, 1,542 अस्पतालों को नोटिस जारी कर निर्देश दिए गए हैं कि वे अपनी व्यवस्थाओं में सुधार करें और निर्धारित मानकों का पालन सुनिश्चित करें. उन्होंने यह भी बताया कि मानकों के विपरीत संचालित हो रहे 426 डायग्नोस्टिक सेंटरों को हमने नोटिस जारी किया है, 84 का लाइसेंस निरस्त किया है. इनमें से 33 डायग्नोस्टिक सेंटरों को अपील के उपरांत सुनवाई और जांच के बाद बहाल किया गया है. मानक के​ विपरीत चल रहे 57 डायग्लोस्टिक सेंटरों पर हमने एफआईआर दर्ज कराई है और 91 सेंटरों को सील किया गया है.

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अतुल प्रधान ने यह भी जानना चाहा कि क्या राज्य सरकार निजी अस्पतालों द्वारा की जा रही इन्फ्लेटेड बिलिंग (बढ़ा-चढ़ाकर बिल बनाना) पर रोक लगाने, डॉक्टरों की कंसल्टेंसी फीस और विभिन्न मेडिकल टेस्ट की दरों में एकरूपता लाने, मनमानी बढ़ोतरी रोकने के लिए कोई नीति बना रही है? इस पर लिखित उत्तर में उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने स्पष्ट किया कि निजी डॉक्टरों की फीस और जांच दरें तय करने या उनमें समानता लाने को लेकर राज्य सरकार की फिलहाल कोई नीति नहीं है.

हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि आम जनता को राहत देने के लिए राज्य सरकार के अस्पतालों में निःशुल्क इलाज, परामर्श और दवाइयों की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है. इसके साथ ही आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत आयुष्मान कार्डधारकों को सरकारी और निजी अस्पतालों में 5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज दिया जा रहा है. वहीं, 70 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों को आयुष्मान वय वंदना योजना के अंतर्गत विशेष चिकित्सा लाभ प्रदान किए जा रहे हैं.

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