'शेर की दहाड़ से भाग जाते हैं कुत्ते...' मौलाना के बयान पर बोले शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि समाज की ताकत सिर्फ संख्या से नहीं बढ़ती. जैसे कुत्तों की बड़ी संख्या भी शेर की दहाड़ के सामने कुछ नहीं कर पाती, वैसे ही बच्चों की संख्या बढ़ाने से काम नहीं बनता. असली ताकत बच्चों को संस्कार और धर्म के प्रति दृढ़ बनाने में है.

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शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद (Photo: Roshan Jaiswal/ITG) शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद (Photo: Roshan Jaiswal/ITG)

रोशन जायसवाल

  • वाराणसी ,
  • 20 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 10:35 AM IST

ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने बच्चों की संख्या और जनसंख्या के मुद्दे पर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने मुस्लिम धर्म गुरु मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी की उस बयान पर प्रतिक्रिया दी, जिसमें संघ प्रमुख मोहन भागवत के तीन बच्चे पैदा करने वाले बयान का जिक्र था और कहा गया था कि मुसलमान ज्यादा बच्चे पैदा नहीं कर रहे हैं. शंकराचार्य ने कहा कि कौन कितना बच्चा पैदा कर रहा है, यह वो जानें. हमें अपने घर की चिंता करनी चाहिए. साथ ही उन्होंने कहा कि संख्या बल से कोई नहीं जीतता. कुत्तों की बड़ी संख्या होती है, लेकिन जब एक शेर आकर दहाड़ देता है तो सब भाग जाते हैं.

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 संख्या बल से समाज मजबूत नहीं होता

इसके अलावा उन्होंने कहा कि अगर मुसलमान यह सोचते हैं कि संख्या बढ़ाकर काम बन जाएगा या हिंदू भी ऐसा सोचते हैं, तो यह सही नहीं है. सिर्फ संख्या बढ़ जाने से समाज मजबूत नहीं होता. कई बार अधिक संख्या होने पर लोग आपस में ही लड़कर खत्म हो जाते हैं. शंकराचार्य ने भगवान श्री कृष्ण के वंशज यादवों का उदाहरण दिया. उन्होंने कहा कि यादवों को कोई बाहरी दुश्मन मारने नहीं आया था. वो अपनी अधिक संख्या और आपसी संघर्ष के कारण समाप्त हो गए थे. इसलिए संख्या के बारे में वही लोग ज्यादा बात करते हैं जिन्हें अपने सनातन धर्म की गहराई का ज्ञान नहीं है.

संस्कार और धर्म पर टिकने से समाज आगे बढ़ता है

उन्होंने यह भी कहा कि समाज बच्चा पैदा करने से न खत्म होता है और न ही बढ़ता है. समाज अपनी संस्कृति, सभ्यता और धर्म पर टिके रहने से लंबे समय तक कायम रहता है और आगे बढ़ता है. सिर्फ बच्चे पैदा करने से कुछ नहीं होगा. अगर बच्चे को संस्कार नहीं दिए गए तो एक दिन कोई उसे समझाकर धर्म परिवर्तन के लिए तैयार कर सकता है. उन्होंने कहा कि फसल हम उगाएं, सींचें और काटने कोई और आ जाए तो क्या होगा. इसलिए जरूरी है कि जो भी बच्चे पैदा हों, उन्हें अच्छे संस्कार दिए जाएं और उन्हें अपने धर्म के प्रति दृढ़ बनाया जाए.

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माता-पिता पर छोड़ी जाए बच्चे की संख्या

शंकराचार्य ने कहा कि कितने बच्चे पैदा करने हैं यह माता-पिता पर छोड़ देना चाहिए. लेकिन इस बात पर जोर होना चाहिए कि जितने भी बच्चे हों, वो संस्कारवान और मजबूत हों.

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