'आरक्षण और संविधान के दुष्प्रचार को दूर करेगी बीजेपी', लखनऊ में हुई समीक्षा बैठक में भाजपा ने लिया फैसला

उत्तर प्रदेश में राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष के सामने बीजेपी की हार की समीक्षा की बैठक का आज दूसरा दिन है.जिसमें सभी दलित मंत्री और नेता राष्ट्रीय संगठन महामंत्री के सामने अपनी बात रखेंगे. इससे पहले शनिवार को भी दो अहम बैठकें हुईं.

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शनिवार को हुई बीजेपी की समीक्षा बैठक की एक तस्वीर शनिवार को हुई बीजेपी की समीक्षा बैठक की एक तस्वीर

कुमार अभिषेक

  • लखनऊ,
  • 07 जुलाई 2024,
  • अपडेटेड 2:23 PM IST

लोकसभा चुनाव में खराब प्रदर्शन पर मंथन के लिए उत्तर प्रदेश में राष्ट्रीय महामंत्री (संगठन) BL संतोष की अगुवाई में दलित पदाधिकारियों के साथ चल रही बैठक खत्म हो गई है. राष्ट्रीय संगठन महामंत्री के साथ आज उत्तर प्रदेश दलित समाज के मंत्री, प्रदेश पदाधिकारी एवं एससी मोर्चा के सदस्य बैठक में शामिल हुए.

बैठक में यह विचार किया गया कि दलितों के बीच में जाकर के फिर से उनको भाजपा की ओर मोड़ना है, साथ ही कांग्रेस ने जो दुष्प्रचार फैलाया था आरक्षण और संविधान को लेकर के उसको भी दूर करना है.

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शनिवार को भी हुई थी बैठक

बैठक में यह बात भी कही गई कि कांग्रेस की पुरानी नीति रही है फूट डालो राज करो इसी के तहत उन्होंने आरक्षण का मुद्दा संविधान का मुद्दा ला करके दलितों के बीच में फूट डाला, इन भ्रांतियां को दूर करने की आवश्यकता है. साथ ही आगामी कार्यक्रम, अभियान पर भी बात हुई. 

शनिवार को पहले दिन के कई दौर की मीटिंग राष्ट्रीय संगठन महामंत्री ने ली. राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष, प्रदेश संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह, प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी के अलावा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ उपमुख्यमंत्री केशव मौर्य और बृजेश पाठक भी देर शाम की मीटिंग में मौजूद रहे.

पुराने सांसदों के खिलाफ थी जनता
समीक्षा की इस बैठक में सभी क्षेत्रीय अध्यक्षों और महामंत्रियों को बुलाया गया और सभी ने खुलकर अपनी बात राष्ट्रीय संगठन महामंत्री के सामने रख दी. क्षेत्रीय अध्यक्षों और क्षेत्रीय प्रभारी के साथ करीब 2 घंटे तक बैठक चली जिसमें मूल रूप से चुनाव में दलितों और पिछड़ों के वोटों में भारी कमी और वोट बैंक घटने को लेकर चर्चा हुई. क्षेत्रीय अध्यक्ष और महामंत्रियों ने संगठन महामंत्री को याद दिलाया की सभी स्थानीय पदाधिकारी ने पुराने सांसदों के खिलाफ आक्रोश और नाराजगी के बारे में बता दिया था बावजूद उन्हें टिकट रिपीट किया गया जिसका नुकसान हुआ. दूसरी- तीसरी बार लड़ रहे सभी प्रत्याशी संगठन और लोगों से कट चुके थे और सिर्फ मोदी योगी के भरोसे चुनाव मे थे जिससे लोगों में गुस्सा था.

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बेलगाम नौकरशाही और बाहरी लोगों पर भरोसा भी हार की वजह
संगठन के पदाधिकारियों ने बेलगाम नौकरशाही और अफसरों के रवैये पर भी सवाल उठाया और कहा कि तहसील और थाने के स्तर पर भ्रष्टाचार बढ़ा है और जनता की शिकायतों का निस्तारण नहीं हो रहा. पदाधिकारियों ने कहा कि अगर कोई जनप्रतिनिधि या कार्यकर्ता सही शिकायत लेकर अधिकारियों के पास जा रहा है तो उन्हें बेइज्जत होना पड़ रहा है, जिससे लोगों का भरोसा पार्टी से टूटा है और अपने कार्यकर्ता निराश हो रहे हैं, इसका भी हार में भूमिका है.

बैठक में यह बात भी निकलकर आई कि बाहरी लोगों पर जरूर से ज्यादा विश्वास और अंधाधुंध जॉइनिंग ने भी अपने कार्यकर्ताओं में निराशा भरी है. संगठन के पदाधिकारी ने कहा कि जिस तरीके से बीजेपी में बंपर भर्ती बाहर के नेताओं की की गई और वह सब सिर्फ बीजेपी का झंडा बैनर टांगकर घूमते रहे, भाजपा के मूल कार्यकर्ता और नेता उनके साथ ना तो सामंजस्य बिठा पाए और ना ही बाहर से एक लाख से ज्यादा आए लोगों ने चुनाव में कोई दिलचस्पी दिखाई. उल्टा असर ये हुआ कि भाजपा के अपने कार्यकर्ता निराश होकर घरों में बैठ गए जिसका बहुत भारी नुकसान हुआ. जिन्हें हराने और जिससे लड़ने में बीजेपी के कार्यकर्ताओं ने कई दशक खपाए वह भाजपा का दामन थाम कर बीजेपी के कार्यकर्ताओं और नेताओं को ही चिढ़ाते रहे.

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विपक्ष का नैरेटिव रहा मजबूत
ज्यादातर नेताओं ने संविधान बदलने और आरक्षण खत्म करने वाले मुद्दे को विपक्ष के द्वारा दलित और पिछड़ों के घर-घर तक पंहुचाये जाने और पार्टी के द्वारा इसे ठीक से काउंटर नहीं किए जाने की बात कही.लगभग सभी नेताओं ने यह कहा कि संविधान बदलने और आरक्षण खत्म होने के नैरेटिव ने भाजपा का इस चुनाव में बड़ा नुकसान किया. दलित और ओबीसी के बीजेपी का साथ छोड़ने की पीछे की बड़ी वजह यह मुद्दे रहे.

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विधायकों के भीतरघात की बात भी इस मीटिंग में रखी गई. संगठन के कई नेताओं ने इस बात को राष्ट्रीय संगठन महामंत्री के सामने रखा की बहुत सारे विधायक लोकसभा के चुनाव का टिकट चाहते थे और जब उन्हें टिकट नहीं मिला तो उन्होंने विपक्ष के नेताओं के साथ मिलकर खूब भीतरघात किया है. बहरहाल आज समीक्षा का दूसरा दिन है दलित मंत्री और नेता आज यह बताएंगे कि आखिर दलित के मोह भंग की वजह क्या रही और दोबारा उनका विश्वास पाने के लिए क्या करना पार्टी के लिए जरूरी होगा.
 

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