UP: आम नहीं ‘रेड गोल्ड’, 3 लाख रुपये किलो वाला मियाजाकी आम पहुंच सकता है दुबई

सहारनपुर के थरौली गांव के किसान संदीप चौधरी ने दुनिया के सबसे महंगे आम मियाजाकी की खेती कर नई मिसाल पेश की है. साल 2021 में दो पौधों से शुरू हुआ सफर आज 40 पेड़ों तक पहुंच गया है. किसान को इस सीजन में अच्छी पैदावार की उम्मीद है और दुबई की कंपनी से निर्यात को लेकर बातचीत भी चल रही है.

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सहारनपुर के किसान का कमाल. (Photo: Rahul Kumar/ITG) सहारनपुर के किसान का कमाल. (Photo: Rahul Kumar/ITG)

राहुल कुमार

  • सहारनपुर,
  • 15 जून 2026,
  • अपडेटेड 5:08 PM IST

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले की ग्राम पंचायत थरौली का एक किसान अपनी सोच, मेहनत और नवाचार के दम पर आत्मनिर्भर खेती की नई कहानी लिख रहा है. जहां अधिकांश किसान पारंपरिक फसलों पर निर्भर हैं, वहीं किसान संदीप चौधरी ने कुछ अलग करने का फैसला किया और दुनिया के सबसे महंगे आमों में गिने जाने वाले मियाजाकी आम की खेती शुरू कर दी. अब उनका यह प्रयोग सफलता की तरफ बढ़ता दिखाई दे रहा है.

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संदीप चौधरी ने साल 2021 में इस विशेष आम की खेती की शुरुआत की थी. उनका उद्देश्य सिर्फ अपनी आय बढ़ाना नहीं था, बल्कि खेती को नई दिशा देना और दूसरे किसानों के लिए भी एक उदाहरण प्रस्तुत करना था. शुरुआत में उन्होंने केवल दो मियाजाकी आम के पौधे लगाए थे. उस समय यह एक प्रयोग था, लेकिन धीरे-धीरे यह प्रयोग एक बड़े बाग का रूप लेता गया.

आज उनके ऑर्गेनिक बाग में करीब 40 मियाजाकी आम के पेड़ तैयार हो चुके हैं. इन पेड़ों की अच्छी देखभाल और वैज्ञानिक तरीके से खेती के कारण अब उनमें फल भी आने लगे हैं. किसान को उम्मीद है कि आने वाले समय में यह बाग उन्हें बेहतर उत्पादन और अच्छी आय देगा.

थरौली के बाग में उग रहा 'रेड गोल्ड'

मियाजाकी आम अपनी खास पहचान के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है. इसकी लाल और बैंगनी रंगत इसे सामान्य आमों से अलग बनाती है. दुर्लभता और सीमित उत्पादन के कारण इसकी कीमत भी बेहद ऊंची होती है. यही वजह है कि इसे दुनिया के सबसे महंगे आमों में शामिल किया जाता है.

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संदीप चौधरी बताते हैं कि उन्होंने इंटरनेट पर सबसे महंगे आम की किस्मों के बारे में जानकारी जुटाई थी. इसी दौरान उन्हें जापान में विकसित मियाजाकी आम के बारे में पता चला. इसके बाद उन्होंने इस किस्म को अपने बाग में लगाने का निर्णय लिया. शुरुआत के दो पौधों से ही उन्होंने आगे नए पौधे तैयार किए और धीरे-धीरे अपने बाग का विस्तार किया.

वर्तमान में उनके 10 से 12 पेड़ों पर फल लगा हुआ है. किसान का अनुमान है कि इस सीजन में करीब 14 से 15 किलो मियाजाकी आम का उत्पादन हो सकता है. उत्पादन भले ही अभी सीमित हो, लेकिन इसकी कीमत इसे बेहद खास बना देती है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में मियाजाकी आम की कीमत करीब 2.80 लाख रुपये से 3.30 लाख रुपये प्रति किलो तक बताई जाती है.

संदीप चौधरी का कहना है कि वह अपने आम को 3 लाख रुपये प्रति किलो से कम कीमत पर नहीं बेचेंगे. उनका मानना है कि जिस तरह की मेहनत, देखभाल और समय इस खेती में लगता है, उसके अनुसार यह कीमत उचित है. 

किसान के अनुसार उनके मियाजाकी आम को लेकर दुबई की एक कंपनी से बातचीत भी चल रही है. उन्हें उम्मीद है कि जल्द ही इस संबंध में सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे. यदि यह समझौता पूरा हो जाता है तो सहारनपुर के थरौली गांव से मियाजाकी आम सीधे विदेशों तक पहुंच सकता है. यह न केवल उनके लिए बल्कि पूरे क्षेत्र के किसानों के लिए भी एक बड़ी उपलब्धि होगी.

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3 लाख रुपये किलो वाले आम ने बढ़ाई चर्चा

संदीप चौधरी का मानना है कि जापान में विकसित इस विशेष आम की किस्म का सबसे बड़ा उत्पादन केंद्र भविष्य में भारत बन सकता है. उनका कहना है कि यदि किसान नई तकनीक, आधुनिक खेती और उच्च मूल्य वाली फसलों को अपनाएं तो खेती को कहीं अधिक लाभकारी बनाया जा सकता है.

संदीप चौधरी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आत्मनिर्भर भारत की सोच से प्रेरित होने की बात कहते हैं. उनका मानना है कि किसान देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं और यदि वे नवाचार को अपनाएं तो अपनी आय कई गुना बढ़ा सकते हैं. उनकी इच्छा है कि इस बार उनके बाग में तैयार हुए मियाजाकी आम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय कृषि मंत्री और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भेंट किए जाएं. आमों की सुरक्षा को देखते हुए पूरे बाग की तारबंदी कराई गई है और वहां सीसीटीवी कैमरे भी लगाए गए हैं.

आज छह से सात फीट ऊंचे पेड़ों पर लटके चमकदार मियाजाकी आम यह संदेश दे रहे हैं कि नई सोच, आधुनिक तकनीक और दृढ़ संकल्प के साथ किसान न केवल आत्मनिर्भर बन सकता है, बल्कि दुनिया के बाजारों तक अपनी पहचान भी बना सकता है. थरौली गांव का यह किसान इसी सोच के साथ खेती में नई संभावनाओं के द्वार खोल रहा है.
 

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