अयोध्या के राम मंदिर चढ़ावा हेराफेरी मामले में जांच लगातार तेज हो रही है. चढ़ावे की रकम में गड़बड़ी करने के आरोप में मुख्य आरोपी पहले से जेल में हैं. पुलिस उनके बैंक खातों और दूसरे जरूरी दस्तावेजों की जांच कर रही है. अब जांच का दायरा बढ़ाते हुए गणना कक्ष से जुड़े सभी कर्मचारियों से उनकी आय और खर्च का पूरा ब्योरा मांगा गया है.
मंगलवार को कई कर्मचारी सीओ कार्यालय पहुंचे और लिखित में मांगी गई जानकारी जमा करानी शुरू कर दी. पुलिस यह भी पता लगा रही है कि जून में मामला सामने आने के बाद बैंक में कितनी बार लेनदेन हुआ. इसके साथ ही गणना कक्ष के बाहर तैनात निजी सुरक्षा गार्डों से भी जानकारी ली जा रही है.
नोट गिनने वाले कर्मचारियों की स्थिति सुधरी
सूत्रों के मुताबिक, गणना कक्ष से जुड़े कुछ कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति पहले के मुकाबले बदली हुई दिखाई दे रही है. कुछ लोगों ने पुलिस को बताया है कि पिछले कुछ महीनों में कुछ कर्मचारियों का खर्च और रहन-सहन बढ़ा है. अब पुलिस यह जांच कर रही है कि कहीं इसका संबंध चढ़ावा मामले से तो नहीं है.
गणना कक्ष से नोटों के बक्से बैंक तक पहुंचाने वाले सभी कर्मचारी और सुरक्षा कर्मी भी जांच के दायरे में हैं. एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट में इस पूरी प्रक्रिया से जुड़े हर व्यक्ति की जांच करने को कहा है.
लिखित में मांगा गया आय और खर्च का ब्योरा
जानकारी के मुताबिक, श्रद्धालुओं द्वारा दान में दिए गए रुपये और धातुओं की गिनती का काम कुल 44 कर्मचारी करते थे. इनमें से सात मुख्य आरोपी पहले ही जेल भेजे जा चुके हैं. अब पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि बाकी कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति में भी कोई बदलाव आया है या नहीं. इसी वजह से सभी से लिखित में आय और खर्च का ब्योरा मांगा गया है. मंगलवार को कई कर्मचारियों ने अपना लेखा-जोखा जमा भी कर दिया.
पुलिस यह भी पता लगा रही है कि आरोपियों ने पिछले दो साल में कहां और कितनी संपत्तियां बनाई हैं. साथ ही यह जानने की कोशिश की जा रही है कि चढ़ावे की कुल कितनी रकम में हेराफेरी हुई. जांच के दौरान जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पदाधिकारियों की जिम्मेदारियों और किसी तरह की लापरवाही की भी जांच की गई है.
समर्थ श्रीवास्तव