लखनऊ: चला गया घर का अकेला सहारा अब्दुल...कंधों पर थी दिव्यांग पिता और बहन की जिम्मेदारी

लखनऊ के अलीगंज में हुए भीषण अग्निकांड ने कई परिवारों की दुनिया उजाड़ दी. 15 मौतों के बीच अब उन लोगों की कहानियां सामने आ रही हैं जो इस हादसे का शिकार बने. इनमें अब्दुल रहमान भी शामिल हैं, जो अपने दिव्यांग पिता और बहन का एकमात्र सहारा थे. उनकी मौत ने पूरे परिवार को बेसहारा कर दिया है.  

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चला गया घर का अकेला सहारा अब्दुल (Photo: itg) चला गया घर का अकेला सहारा अब्दुल (Photo: itg)

आशीष श्रीवास्तव

  • लखनऊ,
  • 23 जून 2026,
  • अपडेटेड 9:08 AM IST

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज स्थित पुरनिया इलाके में हुए भीषण अग्निकांड की भयावह तस्वीरें और दर्दनाक कहानियां लगातार सामने आ रही हैं. एनिमेशन स्टूडियो संचालन वाली इमारत में लगी आग ने 15 लोगों की जान ले ली. मृतकों में अधिकांश युवा छात्र और कर्मचारी थे, जो अपने भविष्य को संवारने के लिए यहां पढ़ाई या नौकरी कर रहे थे. हादसे के बाद अब उन परिवारों का दर्द सामने आ रहा है, जिनकी जिंदगी एक झटके में बदल गईं.

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इकलौते कमाने वाला था अब्दुल

इन्हीं मृतकों में अब्दुल रहमान भी शामिल थे. परिवार के मुताबिक, वह अपने घर के इकलौते कमाने वाले सदस्य थे. उनके पिता दिव्यांग हैं, जबकि बहन की शादी की जिम्मेदारी भी उन्हीं के कंधों पर थी. कई वर्ष पहले एनीमेशन का प्रशिक्षण लेने के बाद उन्हें उसी संस्थान में नौकरी मिल गई थी, जहां वह पिछले चार वर्षों से कार्यरत थे. अपनी मेहनत और लगन से वह परिवार का खर्च चला रहे थे और भविष्य के कई सपने संजोए हुए थे. लेकिन इस दर्दनाक हादसे ने उन सभी सपनों को अधूरा छोड़ दिया.

बताया जा रहा है कि आग लगने के समय भवन में अफरातफरी मच गई थी. इमारत में बाहर निकलने का केवल एक रास्ता होने के कारण बचाव कार्य में भारी मुश्किलें आईं. कई लोगों ने बाथरूम में छिपकर जान बचाने की कोशिश की, जबकि कुछ ने खिड़कियों से कूदकर बाहर निकलने का प्रयास किया. कई लोग सफल रहे, लेकिन ढेरों लोग धुएं और आग की चपेट में आ गए.

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गहरे संकट में परिवार

इस हादसे के बाद एक-एक कर कई मार्मिक घटनाएं सामने आ रही हैं. किसी ने अंतिम समय में अपने परिजनों को फोन कर हालात बताए, तो किसी ने बाहर निकलने की कोशिश में अपनी जान गंवा दी. अब्दुल रहमान की मौत भी ऐसी ही एक त्रासदी बनकर सामने आई है, जिसने उनके परिवार को गहरे संकट में डाल दिया है.

मामले में पुलिस ने छह नामजद आरोपियों समेत अन्य जिम्मेदार लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है. अब तक रामकृष्ण उपाध्याय, वीरेंद्र प्रसाद शुक्ला और तुशांक कृष्णा जायसवाल को गिरफ्तार किया जा चुका है. जांच एजेंसियां अन्य जिम्मेदार लोगों की भूमिका भी खंगाल रही हैं.

प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि जिस भवन में आग लगी, उसे आवासीय उपयोग के लिए स्वीकृति मिली थी, लेकिन बाद में वहां व्यावसायिक गतिविधियां संचालित की जाने लगीं. इस खुलासे के बाद लखनऊ विकास प्राधिकरण की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं. फिलहाल पुलिस और प्रशासन पूरे मामले की विस्तृत जांच में जुटे हैं.
 

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