मां की आंखों के सामने तड़पकर मर गया बेटा, कलेजा चीर देगी लखनऊ अग्निकांड की दास्तां

लखनऊ के अलीगंज अग्निकांड में मृतक आदित्य श्रीवास्तव की मां के सामने ही उनकी मौत हो गई. आदित्य की मां बिसवां से बेटे से मिलने पहुंची थीं, लेकिन तब तक इमारत आग की चपेट में आ चुकी थी. परिजन उसे बचाने की गुहार लगाते रहे, मगर सफल नहीं हो सके. मामा रविन्द्र श्रीवास्तव ने हादसे के लिए व्यवस्था पर सवाल उठाए. पोस्टमार्टम हाउस में परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल रहा और कई परिवारों का दर्द छलक उठा.

Advertisement
मां ने बेटे के जाने का गम बयां किया. Photo ITG मां ने बेटे के जाने का गम बयां किया. Photo ITG

आशीष श्रीवास्तव

  • लखनऊ,
  • 22 जून 2026,
  • अपडेटेड 11:39 PM IST

लखनऊ के अलीगंज इलाके में हुए भीषण अग्निकांड को लेकर एक और दर्दनाक जानकारी सामने आई है. हादसे में जान गंवाने वाले आदित्य श्रीवास्तव के मामा रविन्द्र श्रीवास्तव ने बताया कि आदित्य ने अपनी मां की आंखों के सामने दम तोड़ दिया. यह घटना परिवार के लिए किसी बड़े सदमे से कम नहीं है.

रविन्द्र श्रीवास्तव के अनुसार, आदित्य की मां अपने बेटे से मिलने के लिए सीतापुर जिले के बिसवां से लखनऊ पहुंची थीं. जब वह अपने छोटे बेटे के साथ उस इमारत के पास पहुंचीं, जहां आदित्य काम करता था, तब तक वहां भीषण आग लग चुकी थी. बिल्डिंग से धुआं और लपटें निकल रही थीं. बेटे को बचाने की उम्मीद में वह लगातार मदद के लिए गुहार लगाती रहीं, लेकिन चाहकर भी अपने बेटे को नहीं बचा सकीं.

Advertisement

मामा रविन्द्र श्रीवास्तव ने भावुक होकर बताया कि आदित्य बेहद साहसी स्वभाव का था और किसी भी चुनौती से डरता नहीं था. उन्होंने कहा कि किसी ने नहीं सोचा था कि आग और व्यवस्था की कथित लापरवाही उसके जीवन को इस तरह खत्म कर देगी.

आंसुओं के बीच रविन्द्र ने व्यवस्था पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि कुछ दिनों तक इस घटना की चर्चा होगी, जांच और कार्रवाई की बातें होंगी, लेकिन समय बीतने के साथ लोग इसे भूल जाएंगे. उनका आरोप है कि जब तक व्यवस्था में बदलाव नहीं होगा, तब तक आम लोगों की जान इसी तरह जोखिम में पड़ती रहेगी.

वहीं, पोस्टमार्टम हाउस का दृश्य भी बेहद मार्मिक रहा. अपने बेटे को खो चुकी एक मां दर्द से कराहती नजर आई, जबकि उसके अन्य बेटे उसे संभालने की कोशिश कर रहे थे. ऐसा ही दर्द उन सभी परिवारों के चेहरों पर दिखाई दिया, जिन्होंने इस हादसे में अपने घर के कमाने वाले या अपने प्रियजनों को खो दिया. अलीगंज अग्निकांड ने कई परिवारों की खुशियां छीन ली हैं और पीछे छोड़ गया है सिर्फ दर्द, आंसू और अनगिनत सवाल.

Advertisement

आसिफ ने क्या बताया
वहीं एक दूसरे चश्मदीद मोहम्मद आसिफ ने उस भयावह मंजर को याद करते हुए बताया कि कुछ ही मिनटों में पूरी इमारत धुएं और आग की चपेट में आ गई थी. उन्होंने कहा कि हालात इतने खराब हो गए थे कि अंदर मौजूद लोगों के पास बाहर निकलने का कोई सुरक्षित रास्ता नहीं बचा था.

लपटें ऊपरी मंजिलों तक पहुंच रही थीं
आसिफ ने बताया कि वह अपने साथियों के साथ दूसरी मंजिल पर काम कर रहे थे. तभी उनके सीनियर ने आकर सूचना दी कि नीचे आग लग गई है और सभी लोग सिस्टम बंद कर बाहर निकलने की तैयारी करें. शुरुआत में किसी को अंदाजा नहीं था कि आग इतनी तेजी से फैल चुकी है, लेकिन जब लोग बाहर निकलने लगे तो पूरा ऑफिस धुएं से भर चुका था. नीचे से उठ रही लपटें ऊपरी मंजिलों तक पहुंच रही थीं और कॉरिडोर पूरी तरह धुएं से ढक गया था, जिससे सांस लेना भी मुश्किल हो गया था.

25 से 30 कर्मचारी मौजूद थे
उन्होंने बताया कि घटना के समय स्टूडियो में करीब 25 से 30 कर्मचारी मौजूद थे और सभी पेशेवर 3डी आर्टिस्ट के रूप में काम कर रहे थे. यह एक गेमिंग स्टूडियो था, जहां गेम डेवलपमेंट और 3डी डिजाइनिंग का काम होता था. आसिफ का दावा है कि आग नीचे स्थित पेट शॉप के गोदाम में हुए शॉर्ट सर्किट के बाद फैली, जहां बड़ी मात्रा में डॉग फूड रखा गया था.

Advertisement

बाथरूम में छिप गए
आसिफ के मुताबिक, आग फैलने के बाद लोगों के पास बचने का कोई रास्ता नहीं था. कुछ लोग बाथरूम में छिप गए, जबकि कई कर्मचारियों ने खिड़कियों के जरिए बाहर निकलने की कोशिश की. उन्होंने बताया कि जान बचाने के लिए उन्हें और उनके साथियों को जलते हुए बिजली के तारों का सहारा लेकर नीचे उतरना पड़ा. इस दौरान उनके हाथ और उंगलियां बुरी तरह झुलस गईं.

उन्होंने आरोप लगाया कि इमारत में कोई इमरजेंसी एग्जिट नहीं था, जिसकी वजह से लोग अंदर फंस गए. आसिफ ने कहा कि कुछ ही लोग सुरक्षित बाहर निकल पाए, जबकि बाकी लोग आग और धुएं के बीच फंस गए. उनके अनुसार, यह हादसा इतना भयावह था कि वहां मौजूद हर व्यक्ति अपनी जान बचाने के लिए संघर्ष कर रहा था.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »