दो बार ब्रेन अटैक, पैरालिसिस फिर खाटू श्याम धाम तक 1100 किलोमीटर की पदयात्रा, आस्था की यह कहानी कर देगी भावुक

मध्य प्रदेश के सिवनी से निकला एक परिवार बाबा खाटू श्याम के प्रति अपनी आस्था का संकल्प पूरा करने के लिए 1100 किलोमीटर की पदयात्रा कर रहा है. दो बार ब्रेन अटैक और पैरालिसिस से उबरने के बाद विक्की हरिन्दरवार पत्नी और तीन साल की बेटी के साथ पैदल यात्रा पर निकले हैं. झांसी पहुंचने पर श्रद्धालुओं ने उनका भव्य स्वागत किया.

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परिवार की खाटू श्याम धाम तक 1100 KM की पदयात्रा.  (Photo: ITG) परिवार की खाटू श्याम धाम तक 1100 KM की पदयात्रा. (Photo: ITG)

अजय झा

  • झांसी ,
  • 06 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 4:53 PM IST

आस्था, विश्वास और मजबूत संकल्प की एक अनोखी मिसाल सोमवार को झांसी में देखने को मिली. मध्य प्रदेश के सिवनी जिले से निकली बाबा खाटू श्याम की पदयात्रा झांसी पहुंची, जहां स्थानीय लोगों ने श्रद्धालु परिवार का गर्मजोशी से स्वागत किया. अंतिया तालाब के पास बड़ी संख्या में मौजूद श्रद्धालुओं ने बाबा खाटू श्याम के जयकारों के बीच पदयात्रियों की आरती उतारी और उनकी यात्रा की सफलता के लिए प्रार्थना की. यह पदयात्रा सिर्फ एक धार्मिक यात्रा नहीं है, बल्कि संघर्ष, विश्वास और संकल्प की ऐसी कहानी भी है जिसने हर किसी को भावुक कर दिया. इस यात्रा का नेतृत्व सिवनी निवासी विक्की हरिन्दरवार कर रहे हैं. करीब दस महीने पहले उनका जीवन पूरी तरह बदल गया था. उन्हें तीन महीने के भीतर दो बार ब्रेन अटैक आया और इसके कारण उनके शरीर का एक हिस्सा पैरालिसिस की चपेट में आ गया. परिवार के लिए वह समय बेहद कठिन था.

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विक्की हरिन्दरवार ने बताया कि बीमारी के दौरान उन्होंने डॉक्टरों से इलाज कराया. इसी बीच पूरे परिवार ने बाबा खाटू श्याम से प्रार्थना की और संकल्प लिया कि यदि वह पूरी तरह स्वस्थ हो गए तो परिवार सहित पैदल चलकर बाबा के दरबार में दर्शन करने जाएंगे. इलाज और समय के साथ उनकी सेहत में सुधार हुआ और स्वस्थ होने के बाद उन्होंने अपने संकल्प को पूरा करने का फैसला किया. इसी संकल्प को निभाने के लिए विक्की हरिन्दरवार लगभग 1100 किलोमीटर लंबी पदयात्रा पर निकले हैं. इस यात्रा में उनकी पत्नी आशा हरिन्दरवार, तीन वर्षीय बेटी काव्या और अन्य सहयोगी भी उनके साथ चल रहे हैं. पूरा परिवार एक साथ पैदल यात्रा कर रहा है और हर पड़ाव पर बाबा खाटू श्याम के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त कर रहा है.

डॉक्टरों के इलाज के साथ बाबा खाटू श्याम से की थी प्रार्थना

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सोमवार को जब यह पदयात्रा झांसी के अंतिया तालाब क्षेत्र में पहुंची तो वहां पहले से बड़ी संख्या में श्रद्धालु और सामाजिक संगठनों के लोग मौजूद थे. सभी ने श्रद्धालु परिवार का फूल-मालाओं से स्वागत किया. बाबा खाटू श्याम के जयकारों से पूरा माहौल भक्तिमय हो गया. लोगों ने पदयात्रियों की आरती उतारी और उनकी सुरक्षित एवं सफल यात्रा की कामना की. श्रद्धालुओं ने परिवार की सुख-समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य के लिए भी प्रार्थना की. इस पदयात्रा के साथ चल रही एक विशेष रूप से सजाई गई गाड़ी भी लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी रही. इस गाड़ी को बाबा खाटू श्याम के दरबार की तरह सजाया गया है. यात्रा के दौरान श्रद्धालु भजन-कीर्तन करते हुए आगे बढ़ रहे हैं. जहां-जहां यह यात्रा पहुंच रही है, वहां लोग श्रद्धा के साथ दर्शन कर रहे हैं और पदयात्रियों का स्वागत कर रहे हैं.

इस पूरी यात्रा में सबसे अधिक लोगों का ध्यान तीन साल की मासूम काव्या अपनी ओर खींच रही है. छोटी उम्र होने के बावजूद वह अपने माता-पिता के साथ इस कठिन यात्रा में शामिल है. श्रद्धालु उसे देखकर भावुक हो रहे हैं और परिवार के इस अटूट विश्वास की सराहना कर रहे हैं. यह पदयात्रा 18 जून से शुरू हुई थी. श्रद्धालुओं का अनुमान है कि जुलाई के अंतिम सप्ताह तक वे राजस्थान स्थित खाटू श्याम धाम पहुंच जाएंगे. लगभग 1100 किलोमीटर की इस लंबी यात्रा के दौरान परिवार लगातार पैदल आगे बढ़ रहा है और रास्ते में मिलने वाले लोगों का आशीर्वाद भी प्राप्त कर रहा है.

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विक्की हरिन्दरवार और उनके साथ चल रहे श्रद्धालुओं का कहना है कि यह यात्रा केवल उनकी व्यक्तिगत मनोकामना पूरी करने के लिए नहीं है. उनका मानना है कि यह यात्रा पूरे देश की सुख-समृद्धि, शांति और सभी लोगों के मंगल की कामना के लिए भी समर्पित है. उनका उद्देश्य लोगों के बीच आस्था, विश्वास और सकारात्मक सोच का संदेश पहुंचाना भी है. झांसी में इस पदयात्रा का स्वागत करने वाले श्रद्धालुओं ने भी इसे प्रेरणा देने वाली यात्रा बताया. उनका कहना है कि जीवन में कितनी भी बड़ी कठिनाई क्यों न आए, यदि मन में विश्वास और संकल्प मजबूत हो तो हर चुनौती का सामना किया जा सकता है.

18 जून से शुरू हुई यात्रा जुलाई के अंतिम सप्ताह में पहुंचेगी खाटू धाम

दो बार ब्रेन अटैक और पैरालिसिस जैसी गंभीर बीमारी से उबरने के बाद विक्की हरिन्दरवार का अपने परिवार के साथ इतनी लंबी पदयात्रा पर निकलना लोगों के लिए प्रेरणा बन गया है. उनकी यह यात्रा आस्था, संघर्ष और आत्मविश्वास का ऐसा उदाहरण बनकर सामने आई है, जो यह संदेश देती है कि मजबूत इच्छाशक्ति और सच्ची श्रद्धा के साथ जीवन की सबसे कठिन परिस्थितियों को भी पार किया जा सकता है. यही वजह है कि सिवनी से शुरू हुई यह पदयात्रा जहां-जहां पहुंच रही है, वहां लोगों का सम्मान, प्रेम और आशीर्वाद लगातार मिल रहा है.
 

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