'हैलो... मैं भी शादी के लिए रिश्ता देख रही हूं. आपकी प्रोफाइल देखी, बात कर सकते हैं?' फोन पर आई एक कॉल... वॉट्सऐप पर आई एक खूबसूरत लड़की की तस्वीर... और फिर घंटों चलने वाली बातें. जिन लोगों को लग रहा था कि अब उनकी जिंदगी में हमसफर आने वाला है, उन्हें शायद अंदाजा भी नहीं था कि फोन के दूसरी तरफ बैठी 'दुल्हन' असल में कोई और नहीं, बल्कि एक फर्जी कॉल सेंटर का हिस्सा थी.
झांसी पुलिस ने ऐसे ही एक गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो पिछले तीन-चार साल से देशभर के 40 साल से ज्यादा उम्र के अविवाहित पुरुषों को निशाना बना रहा था. कल्पना कीजिए... उम्र 40 के पार निकल चुकी है. परिवार शादी की चिंता करता है. कई रिश्ते आए, लेकिन बात नहीं बनी. आखिरकार एक दिन अखबार में मैट्रिमोनियल कॉलम में अपना विज्ञापन दे दिया. उम्मीद थी कि शायद अब कोई रिश्ता मिल जाएगा. लेकिन यही उम्मीद कुछ लोगों के लिए सबसे बड़ा जाल बन गई.
झांसी पुलिस की जांच में सामने आया कि यह गिरोह सबसे पहले अखबारों में छपे मैट्रिमोनियल विज्ञापन खंगालता था. वहां से ऐसे पुरुषों के मोबाइल नंबर निकाले जाते, जो शादी के लिए रिश्ता तलाश रहे होते. इसके बाद शुरू होता था पूरा 'ऑपरेशन मोहब्बत'... कुछ दिनों बाद उस नंबर पर एक कॉल आती. 'नमस्ते... आपका विज्ञापन देखा था. अगर आपको ठीक लगे तो हम बात कर सकते हैं.' आवाज इतनी भरोसेमंद कि सामने वाला आसानी से यकीन कर ले.
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थोड़ी बातचीत के बाद वॉट्सऐप पर एक खूबसूरत लड़की की तस्वीर भेजी जाती. पुलिस के मुताबिक, ये तस्वीरें असली नहीं थीं. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से तैयार की जाती थीं, ताकि सामने वाले की पसंद के मुताबिक चेहरा बनाया जा सके.
यानी जिसे गोरी लड़की पसंद थी, उसके लिए अलग तस्वीर. जिसे पारंपरिक लुक पसंद था, उसके लिए अलग. जिसे मॉडर्न लुक चाहिए, उसके लिए अलग. शिकार को लगता कि अब उसकी जिंदगी बदलने वाली है. फिर शुरू होती थीं रोज-रोज की बातें.
'दुल्हन' से बातचीत... लेकिन फोन के पीछे कौन था?
पुलिस की जांच के मुताबिक, झांसी के इस कॉल सेंटर में 9 महिलाएं काम करती थीं. लेकिन उनका काम सिर्फ फोन उठाना नहीं था. उन्हें बाकायदा ट्रेनिंग दी जाती थी कि किस तरह सामने वाले का भरोसा जीतना है, कैसे बातचीत को आगे बढ़ाना है और कब भावनात्मक जुड़ाव पैदा करना है.
जांच में यह भी सामने आया कि दो महिलाएं नई लड़कियों को ट्रेनिंग देती थीं कि किस तरह बात करनी है, क्या बोलना है और ग्राहक को कितनी देर तक लाइन पर रखना है. धीरे-धीरे बातचीत दोस्ती में बदल जाती. दोस्ती... कथित प्यार में. और फिर... बातें ऐसी दिशा में ले जाई जातीं कि सामने वाला खुलकर बात करने लगे.
पुलिस के मुताबिक, कई बार अश्लील बातचीत भी कराई जाती थी. लेकिन जिस व्यक्ति को लगता था कि वह अपनी होने वाली पत्नी से बात कर रहा है, उसे यह अंदाजा नहीं होता था कि हर शब्द रिकॉर्ड किया जा रहा है.
कई दिनों या हफ्तों की बातचीत के बाद जब पीड़ित शादी की तारीख या मुलाकात की बात करता, तभी असली खेल शुरू होता. गिरोह कथित तौर पर उसकी रिकॉर्ड की गई बातचीत का हवाला देता और पैसे मांगने लगता. अगर पैसे नहीं दिए, तो रिकॉर्डिंग वायरल करने की धमकी दी जाती. यानी पहले शादी का सपना... फिर भरोसा... फिर निजी बातचीत... और आखिर में ब्लैकमेल.
पुलिस का कहना है कि इसी तरीके से कई लोगों से पैसे वसूले गए. यह पूरा नेटवर्क झांसी के एक मकान से चल रहा था. नवाबाद थाना पुलिस और साइबर क्राइम टीम को काफी समय से शिकायतें मिल रही थीं. जांच के बाद राय कॉलोनी स्थित एक मकान पर छापा मारा गया.
पुलिस जब अंदर पहुंची तो वहां किसी सामान्य दफ्तर जैसा माहौल था. मोबाइल फोन, लैपटॉप, रजिस्टर और कई महिलाएं कॉल पर व्यस्त थीं. छापे में 9 महिलाएं और 2 पुरुष गिरफ्तार किए गए. मौके से 26 मोबाइल फोन, एक मैकबुक, आईफोन, रजिस्टर, सोने-चांदी के आभूषण समेत कई सामान बरामद हुए. पुलिस के मुताबिक, रजिस्टरों की जांच में करीब 41 लाख रुपये के लेन-देन का रिकॉर्ड भी मिला है.
छत्तीसगढ़ से सीखा 'धंधा', झांसी में खोला कॉल सेंटर
पूछताछ में मुख्य आरोपी सोहिल साहू और हलधर साहू ने बताया कि वे छत्तीसगढ़ के रहने वाले हैं. पुलिस के अनुसार, दोनों ने पहले वहां इस तरह के कॉल सेंटर का काम सीखा. बाद में झांसी आए और एक आकांक्षा नाम की महिला को पार्टनर बनाकर 'शादी संस्था डॉट कॉम' के नाम से फर्जी मैट्रिमोनियल कॉल सेंटर शुरू कर दिया. धीरे-धीरे स्थानीय महिलाओं को जोड़ा गया और पूरा नेटवर्क तैयार हो गया.
पुलिस क्या कह रही है?
साइबर क्राइम की अपर पुलिस अधीक्षक अरीबा नोमान के मुताबिक, गिरोह अधेड़ उम्र के उन पुरुषों को निशाना बनाता था, जो अखबार में शादी के विज्ञापन देते थे. एआई से तैयार तस्वीरें भेजकर भरोसा जीता जाता, फिर बातचीत के जरिए उन्हें फंसाया जाता और बाद में रिकॉर्डिंग दिखाकर पैसों की मांग की जाती थी.
पुलिस ने सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया. मामले की जांच जारी है और यह पता लगाया जा रहा है कि इस नेटवर्क ने अब तक कितने लोगों को अपना शिकार बनाया.
जिस तस्वीर को देखकर लोग अपना भविष्य देख रहे थे, वह तस्वीर असल में किसी इंसान की नहीं, बल्कि मशीन की बनाई हुई थी. जिस आवाज पर भरोसा किया गया, उसके पीछे एक गैंग था. और जिस रिश्ते को लोग अपनी नई शुरुआत समझ रहे थे, वह दरअसल ब्लैकमेलिंग की कहानी थी. झांसी पुलिस ने इस गिरोह का भंडाफोड़ कर दिया है.
प्रमोद कुमार गौतम