श्मशान में बंट गया परिवार! 15 बीघा जमीन के लिए बेटों ने रोक दिया पिता का अंतिम संस्कार

झांसी के मऊरानीपुर में 80 वर्षीय बुजुर्ग की मौत के बाद श्मशान घाट पर ही जमीन विवाद भड़क गया. सौतेले भाइयों के बीच बहस इतनी बढ़ी कि अंतिम संस्कार रोकना पड़ा. पुलिस और ग्रामीणों की मध्यस्थता के बाद दोनों पक्षों में समझौता हुआ. इसके बाद भाइयों ने मिलकर पिता का अंतिम संस्कार किया.

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पिता की मौत पर बवाल.(Photo: Screengrab) पिता की मौत पर बवाल.(Photo: Screengrab)

अजय झा

  • झांसी,
  • 21 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 6:55 PM IST

UP NEWS: झांसी के मऊरानीपुर क्षेत्र से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां 80 वर्षीय बुजुर्ग बूठे अहिरवार की मौत के बाद श्मशान घाट पर ही परिवार दो हिस्सों में बंट गया. अंतिम संस्कार जैसे संवेदनशील मौके पर जमीन को लेकर ऐसा विवाद खड़ा हुआ कि चिता जलाने की प्रक्रिया तक रोकनी पड़ी. दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए और माहौल तनावपूर्ण हो गया.

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जानकारी के अनुसार, मामला मऊरानीपुर थाना क्षेत्र के बड़ागांव अंतर्गत जगनपुरा गांव का है. मृतक बूठे अहिरवार के दो परिवार थे. पहली पत्नी और उससे हुए बच्चे अलग रहते थे, जबकि करीब 20 साल पहले वह दूसरी पत्नी के साथ रहने लगे थे.

बताया गया है कि बुजुर्ग पिछले कई वर्षों से दूसरी पत्नी और उसके बेटों के साथ रह रहे थे. उनकी मौत के बाद जब अंतिम संस्कार की तैयारी शुरू हुई, तभी दोनों परिवारों के बीच पुराना विवाद सामने आ गया.

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श्मशान घाट पर बढ़ा विवाद

श्मशान घाट पर ही दोनों पत्नियों के बेटों के बीच जमीन और अधिकार को लेकर बहस शुरू हो गई. देखते ही देखते मामला इतना बढ़ गया कि अंतिम संस्कार की प्रक्रिया को बीच में रोकना पड़ा.

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मौके पर मौजूद लोगों ने बताया कि दोनों पक्ष अपने-अपने हक को लेकर अड़े हुए थे, जिससे स्थिति बेहद तनावपूर्ण हो गई. इसी दौरान पहली पत्नी के बेटे संजीव कुमार ने डायल 112 पुलिस को सूचना दे दी.

सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और ग्रामीणों के साथ मिलकर दोनों पक्षों के बीच बातचीत शुरू कराई.

जमीन विवाद बना वजह

पहली पत्नी के बेटे संजीव कुमार का कहना है कि उनके पिता लंबे समय से अलग रह रहे थे और दूसरी शादी कर चुके थे. ऐसे में दोनों परिवारों के बीच पहले से दूरी बनी हुई थी.

संजीव ने बताया कि करीब 14-15 बीघा जमीन को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं थी. इसी कारण उन्होंने अंतिम संस्कार को रोक दिया और कहा कि जब तक जमीन के बंटवारे और अधिकार पर सहमति नहीं बनती, तब तक अंतिम संस्कार नहीं किया जाएगा.

वहीं, दूसरी पत्नी के बेटे मुकेश का कहना है कि उनके पिता पिछले करीब 35 साल से उनके साथ रह रहे थे और लंबे समय से बीमार थे. उन्होंने इसे पूरी तरह पारिवारिक मामला बताया.

समझौते के बाद हुआ अंतिम संस्कार

मुकेश ने बताया कि शुरुआत में कुछ कहासुनी जरूर हुई, लेकिन बाद में दोनों पक्षों ने आपसी बातचीत के जरिए विवाद सुलझा लिया. जमीन को लेकर लिखित सहमति भी बन गई, जिससे आगे किसी विवाद की संभावना नहीं रहेगी.

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ग्रामीणों की पहल और पुलिस की मौजूदगी में दोनों पक्षों के बीच समझौता हो गया. इसके बाद माहौल शांत हुआ और अंतिम संस्कार की प्रक्रिया दोबारा शुरू की गई.

अंत में दोनों भाइयों ने मिलकर अपने पिता के शव को कंधा दिया और पूरे रीति-रिवाज के साथ अंतिम संस्कार किया गया. पुलिस ने भी मौके पर स्थिति को नियंत्रित करते हुए दोनों पक्षों को समझाकर मामला शांत कराया.

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