अगर आप गांव में रहते हैं और कम निवेश में अपना कारोबार शुरू करने की सोच रहे हैं, तो योगी सरकार की एक नई पहल आपके लिए बड़ा अवसर साबित हो सकती है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल पर शुरू किया गया 'प्रोजेक्ट गंगा' ग्रामीण उत्तर प्रदेश में हाई स्पीड इंटरनेट पहुंचाने के साथ-साथ हजारों युवाओं और महिलाओं के लिए कमाई के नए रास्ते खोलने जा रहा है.
सरकार का दावा है कि इस योजना से जुड़े डिजिटल उद्यमी शुरुआती महीनों में 20 हजार रुपये तक और आगे चलकर 1 लाख रुपये प्रतिमाह तक की आय अर्जित कर सकते हैं. प्रदेश सरकार इस परियोजना को केवल इंटरनेट कनेक्टिविटी तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि इसे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और डिजिटल उद्यमिता को बढ़ावा देने के बड़े अभियान के रूप में देख रही है.
गांवों तक पहुंचेगा हाई स्पीड इंटरनेट
न्यूज एजेंसी के मुताबिक स्टेट ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन के सीईओ मनोज कुमार सिंह ने कहा कि आज के समय में इंटरनेट केवल सुविधा नहीं बल्कि जरूरत बन चुका है. जिस तरह सड़क, बिजली और पानी विकास की बुनियादी शर्त माने जाते हैं, उसी तरह हाई स्पीड इंटरनेट भी अब ग्रामीण विकास का अहम आधार बन गया है. उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में प्रोजेक्ट गंगा को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा. पहले न्याय पंचायत स्तर तक और उसके बाद ग्राम पंचायत स्तर तक हाई स्पीड ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी पहुंचाई जाएगी. सरकार का मानना है कि इंटरनेट की बेहतर उपलब्धता से शिक्षा, स्वास्थ्य, ई-गवर्नेंस, ऑनलाइन कारोबार और डिजिटल सेवाओं तक लोगों की पहुंच आसान होगी.
8 से 10 हजार डिजिटल सेवा प्रदाता होंगे तैयार
इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत प्रदेश में 8 से 10 हजार डिजिटल सेवा प्रदाता (DSP) तैयार किए जाएंगे. ये डिजिटल सेवा प्रदाता गांवों में इंटरनेट कनेक्शन उपलब्ध कराने के साथ-साथ डिजिटल सेवाओं का विस्तार भी करेंगे. सरकार का अनुमान है कि इस परियोजना से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से 50 हजार से 1 लाख से अधिक रोजगार के अवसर पैदा होंगे. खास बात यह है कि रोजगार के लिए युवाओं को शहरों की ओर पलायन नहीं करना पड़ेगा, बल्कि वे अपने गांव में रहकर ही कमाई कर सकेंगे.
महिलाओं को मिलेगी सबसे ज्यादा प्राथमिकता
प्रोजेक्ट गंगा की सबसे खास बात यह है कि इसमें महिलाओं की भागीदारी को विशेष महत्व दिया गया है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश के अनुसार योजना में 50 प्रतिशत से अधिक पदों पर महिलाओं को प्राथमिकता दी जाएगी. इसका उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना और डिजिटल क्षेत्र में उनकी भागीदारी बढ़ाना है. सरकार का मानना है कि यदि महिलाओं को तकनीकी प्रशिक्षण और उद्यमिता का अवसर मिले तो वे न केवल अपनी आय बढ़ा सकती हैं बल्कि पूरे परिवार की आर्थिक स्थिति को भी मजबूत कर सकती हैं.
कैसे होगी कमाई ?
सरकार के मुताबिक डिजिटल सेवा प्रदाता बनने वाले युवाओं और महिलाओं के लिए यह आय का स्थायी स्रोत बन सकता है. जानकारी के अनुसार इंटरनेट कनेक्शन की मासिक फीस लगभग 350 से 390 रुपये के बीच रहने का अनुमान है. जैसे-जैसे उपभोक्ताओं की संख्या बढ़ेगी, डिजिटल सेवा प्रदाताओं की आय भी बढ़ती जाएगी. अधिकारियों का कहना है कि यदि कोई डिजिटल उद्यमी 7 से 8 महीनों तक लगातार नेटवर्क का विस्तार करता है तो उसकी मासिक कमाई लगभग 20 हजार रुपये तक पहुंच सकती है. वहीं कनेक्शनों की संख्या और सेवाओं का दायरा बढ़ने पर यही आय 1 लाख रुपये प्रतिमाह तक भी पहुंच सकती है. मनोज कुमार सिंह का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार की तलाश कर रहे युवाओं के लिए यह मॉडल काफी आकर्षक माना जा रहा है.
सिर्फ 50 हजार रुपये लगाकर शुरू कर सकेंगे काम
मनोज कुमार सिंह का कहना है कि योजना का एक और महत्वपूर्ण पहलू इसकी वित्तीय संरचना है. सरकार ने इसे इस तरह तैयार किया है कि सीमित संसाधन वाले युवा भी इसमें भागीदारी कर सकें. ग्राम पंचायत स्तर पर इस परियोजना की कुल लागत लगभग 5.53 लाख रुपये निर्धारित की गई है. इसमें मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना के तहत 5 लाख रुपये तक का ब्याज मुक्त ऋण उपलब्ध कराया जाएगा. यानी इच्छुक व्यक्ति को केवल 50 हजार रुपये मार्जिन मनी के रूप में लगाने होंगे. इसके बाद वह डिजिटल सेवा प्रदाता के रूप में अपना नेटवर्क स्थापित कर सकता है. कम निवेश और सरकारी सहयोग की वजह से यह योजना युवाओं और महिलाओं के बीच तेजी से लोकप्रिय हो सकती है.
गांव में रहकर मिलेगा रोजगार
ग्रामीण क्षेत्रों से बड़े पैमाने पर युवाओं का शहरों की ओर पलायन लंबे समय से एक चुनौती रहा है. रोजगार की तलाश में लाखों युवा गांव छोड़ने को मजबूर होते हैं. प्रोजेक्ट गंगा इसी समस्या का समाधान निकालने की कोशिश कर रहा है. सरकार चाहती है कि गांवों में ही ऐसे अवसर विकसित किए जाएं, जहां लोग स्थानीय स्तर पर रोजगार और व्यवसाय प्राप्त कर सकें. डिजिटल सेवा प्रदाता बनने वाले युवाओं को तकनीकी प्रशिक्षण भी दिया जाएगा ताकि वे इंटरनेट सेवाओं के संचालन और प्रबंधन को बेहतर ढंग से समझ सकें.
डिजिटल यूपी की दिशा में बड़ा कदम
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि प्रोजेक्ट गंगा सफल होता है तो यह केवल इंटरनेट पहुंचाने की योजना नहीं रहेगी, बल्कि ग्रामीण डिजिटल क्रांति का आधार बन सकती है. बेहतर इंटरनेट सुविधा मिलने से ऑनलाइन शिक्षा, टेलीमेडिसिन, डिजिटल भुगतान, ई-कॉमर्स और सरकारी सेवाओं की पहुंच में बड़ा सुधार देखने को मिल सकता है. इससे गांवों और शहरों के बीच डिजिटल अंतर भी कम होगा.
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