लखनऊ पुलिस की क्राइम ब्रांच, साइबर सेल और सुशांत गोल्फ सिटी थाने की टीम ने डीजीपी राजीव कृष्ण के 'साइबर वज्र' अभियान के तहत ओमैक्स रेजिडेंसी के कई फ्लैट्स में आधी रात को छापेमारी की. इस संयुक्त टीम ने साइबर अपराधियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति के तहत अंतरराष्ट्रीय फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़ किया. पुलिस ने मौके से भारी मात्रा में लैपटॉप, मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए और आठ संदिग्धों को हिरासत में लिया. यह गिरोह कस्टमर सपोर्ट सर्विस बनकर सीधे लोगों से ऑनलाइन ठगी करता था. पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की जांच में जुटी है.
'ओपनर' और 'क्लोजर' के खेल से ठगी
एडीसीपी किरन यादव ने बताया कि इस गिरोह का मोडस ऑपरेंडी बेहद शातिर था. कॉल सेंटर में काम करने वाले लोग दो टीमों में बंटे होते थे, जिन्हें ये 'ओपनर' और 'क्लोजर' बोलते थे. ऑनलाइन कॉल ट्रांसफर के जरिए ये दोनों मिलकर खुद को कस्टमर सपोर्ट सर्विस का प्रतिनिधि बताते थे और लोगों को झांसे में लेकर उनके साथ ठगी की वारदातों को अंजाम देते थे.
गुजरात और कोलकाता से जुड़े हैं तार
इस फर्जी अंतरराष्ट्रीय कॉल सेंटर के मुख्य संचालक पुनीत वर्मा और देवेंद्र पटेल हैं, जो मूल रूप से गुजरात के रहने वाले हैं. वहीं, इनके लिए इस कॉल सेंटर में काम करने वाले अधिकांश कर्मचारी कोलकाता के निवासी हैं. पुलिस ने बताया कि समिट बिल्डिंग के बाद राजधानी के पॉश इलाके में हुई इस दूसरी बड़ी कार्रवाई से साइबर अपराधियों में हड़कंप मच गया है.
'साइबर वज्र' के तहत पुलिस की बड़ी कार्रवाई
डीसीपी क्राइम के अनुसार, डीजीपी उत्तर प्रदेश के निर्देश पर पूरे प्रदेश में साइबर गिरोहों के खिलाफ 'साइबर वज्र' अभियान चलाया जा रहा है. इसी अभियान के तहत मिले इनपुट पर पुलिस, एसओजी और साइबर थाने की टीम ने ओमेक्स सिटी के फ्लैट्स में दबिश दी. पुलिस बरामद किए गए सभी डिजिटल साक्ष्यों को कब्जे में लेकर नेटवर्क की परतें खोलने में जुटी है.
अंकित मिश्रा