यूपी के शामली का आयुष मलिक नाम अब मोहम्मद अली बन चुका है. धर्म परिवर्तन, प्रेम विवाह, करोड़ों की संपत्ति और पुलिस जांच जैसे कई पहलुओं ने इस पूरे मामले को सुर्खियों में ला दिया है. इस केस का सबसे चर्चित पहलू सिर्फ धर्म परिवर्तन नहीं, बल्कि उससे जुड़ा वह आर्थिक एंगल भी है, जिस पर परिवार और जांच एजेंसियों की नजर है.
आयुष मलिक के परिवार का दावा है कि उनके पास शामली में करोड़ों रुपये की संपत्तियां हैं. बताया जा रहा है, जिस शोरूम में आयुष फिलहाल रहता है उसकी कीमत करीब 20 करोड़ रुपये आंकी जाती है, जबकि शामली और आसपास के इलाकों में परिवार की कुल संपत्ति 50 करोड़ रुपये से अधिक बताई जा रही है.
इसी बीच आयुष के पिता देवराज मलिक ने गंभीर आरोप लगाते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी. उनका कहना है कि उनके बेटे को सुनियोजित तरीके से प्रभावित किया गया और इसके पीछे परिवार की संपत्ति पर नजर रखने की साजिश हो सकती है. हालांकि दूसरी ओर आयुष और उनके समर्थक इन आरोपों को खारिज करते हुए इसे उनका व्यक्तिगत निर्णय बता रहे हैं.
पिता का आरोप, बेटे का अलग दावा
आयुष मलिक के पिता देवराज मलिक का कहना है कि उन्होंने पुलिस को शिकायत देकर पूरे मामले की जांच की मांग की है. उनका दावा है कि उनका बेटा एक षड्यंत्र का शिकार हुआ है और वह उसे वापस हिंदू धर्म में लाने का प्रयास कर रहे हैं. देवराज मलिक का आरोप है कि धर्म परिवर्तन और विवाह के पीछे केवल भावनात्मक नहीं बल्कि आर्थिक पहलू भी हो सकता है. उन्होंने अपनी शिकायत में कहा है कि परिवार की करोड़ों रुपये की संपत्ति पर नजर रखने के उद्देश्य से पूरा घटनाक्रम रचा गया. हालांकि आयुष मलिक का पक्ष इससे बिल्कुल अलग है. आजतक से बातचीत उन्होंने कहा है कि धर्म परिवर्तन किसी दबाव, लालच या प्रलोभन का परिणाम नहीं था, बल्कि यह वर्षों तक अध्ययन और आत्मचिंतन के बाद लिया गया निर्णय था.
पुलिस तक कैसे पहुंचा मामला
प्राप्त जानकारी के अनुसार, आयुष के पिता ने सदर कोतवाली में तहरीर देकर आरोप लगाया कि उनके पुत्र का कथित रूप से धर्म परिवर्तन कराया गया और उसका नया नाम रखा गया. शिकायत में चांदनी कुरैशी, उसके पिता इस्लाम और कुछ मौलानाओं समेत कुल 10 लोगों को नामजद किया गया. मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस ने जांच शुरू की. जांच के दौरान कुछ आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया. वहीं अन्य नामजद लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामला अभी जांच के अधीन है और धर्म परिवर्तन से जुड़े दस्तावेजों, विवाह से संबंधित रिकॉर्ड तथा अन्य तथ्यों की पड़ताल की जा रही है.
प्रेम कहानी या सुनियोजित साजिश ?
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह दो बालिग लोगों के बीच का निजी फैसला था या फिर परिवार के आरोपों में दम है? परिवार का कहना है कि आयुष को योजनाबद्ध तरीके से प्रभावित किया गया. वहीं दूसरी ओर आयुष का दावा है कि उन्होंने खुद अध्ययन करके इस्लाम को समझा और स्वीकार किया. आयुष मलिक का कहना है कि लोग यह मान रहे हैं कि उन्होंने अचानक धर्म बदल लिया, जबकि वास्तविकता इससे काफी अलग है. उनके मुताबिक इस्लाम को समझने और अपनाने की प्रक्रिया कई वर्षों तक चली. उन्होंने दावा किया कि यह फैसला किसी व्यक्ति विशेष के प्रभाव में आकर नहीं लिया गया, बल्कि लंबे समय तक पढ़ने, सुनने और समझने के बाद उन्होंने अपना निर्णय बनाया. उन्होंने कहा कि किसी भी विचारधारा को स्वीकार करने से पहले उसे जानना जरूरी होता है और उन्होंने भी वही किया.
यूट्यूब से शुरू हुई जिज्ञासा
आयुष ने दावा किया कि एक समय उनका ब्लड प्रेशर बढ़ गया था और हाथ कांप रहे थे. इसी दौरान उन्हें इंटरनेट पर एक वीडियो दिखाई दिया, जिसमें कुछ आयतें पढ़ने की सलाह दी गई थी. उनके अनुसार, उस वीडियो ने कोई चमत्कार नहीं किया, लेकिन उनके भीतर जिज्ञासा जरूर पैदा कर दी. इसके बाद उन्होंने इस्लामिक साहित्य, धार्मिक व्याख्यानों और ऑनलाइन सामग्री को गंभीरता से पढ़ना और सुनना शुरू किया. आयुष का कहना है कि सवालों के जवाब तलाशते-तलाशते उनकी रुचि बढ़ती गई और धीरे-धीरे उन्होंने इस्लाम की शिक्षाओं को समझना शुरू किया.
आयुष के मुताबिक उन्होंने हाल के वर्षों में नहीं बल्कि 2007-08 के आसपास इस्लाम के बारे में जानना शुरू कर दिया था. उन्होंने दावा किया कि यह कोई ऐसा फैसला नहीं था जो कुछ दिनों में लिया गया हो. वर्षों तक उन्होंने विभिन्न धार्मिक विषयों पर अध्ययन किया, अलग-अलग विद्वानों को सुना और फिर अपनी समझ के आधार पर निष्कर्ष निकाला. उनके अनुसार, धर्म परिवर्तन उनके लिए एक लंबी वैचारिक प्रक्रिया का परिणाम था.
बातचीत के दौरान आयुष ने स्वीकार किया कि उन्होंने कई इस्लामिक विद्वानों के वीडियो देखे. इनमें पाकिस्तान के प्रसिद्ध इस्लामिक स्कॉलर डॉ. इशरार अहमद का नाम भी शामिल है. हालांकि उन्होंने कहा कि वह किसी एक व्यक्ति से प्रभावित नहीं थे. उनका कहना था कि उन्होंने दुनिया भर के वक्ताओं को सुना और विभिन्न स्रोतों से जानकारी हासिल की. उनके मुताबिक, उन्हें किसी व्यक्ति विशेष से ज्यादा इस्लाम की शिक्षाओं और पैगंबर मोहम्मद के जीवन ने प्रभावित किया.
मौलाना का क्या कहना है
मामले में नाम सामने आने के बाद मौलाना कासिम ने भी अपना पक्ष रखा है. उनका कहना है कि धर्म परिवर्तन किसी व्यक्ति पर थोपकर नहीं कराया जा सकता. उनके अनुसार, इस्लाम स्वीकार करने के लिए कुछ धार्मिक शर्तें होती हैं, जिनमें धार्मिक ज्ञान और आस्था की समझ शामिल है. उन्होंने दावा किया कि दोनों बालिग हैं और उन्होंने कानूनी प्रक्रिया के तहत विवाह किया. फिलहाल इस पूरे मामले में कई सवालों के जवाब जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएंगे. एक तरफ परिवार का आरोप है कि करोड़ों की संपत्ति के लालच में पूरा खेल खेला गया, वहीं दूसरी तरफ आयुष मलिक का दावा है कि यह उनका निजी और वैचारिक निर्णय था. पुलिस का कहना है कि जांच निष्पक्ष तरीके से की जा रही है और जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसी आधार पर आगे की कार्रवाई होगी.
अरविंद ओझा