अयोध्या पहुंचे सीएम योगी आदित्यनाथ ने राम मंदिर चढ़ावा विवाद को लेकर विपक्ष पर तीखा हमला बोला. उन्होंने कहा कि आज जो आस्था की बात करते हैं, याद करिए इन लोगों ने पवित्र हनुमानगढ़ी में नमाज पढ़वाने का काम किया था, सोचिए क्या कोई जामा मस्जिद में हनुमान चालीसा पढ़वा पाएगा, क्या कोई सरकारी करवा पाएगी?
सीएम योगी ने कहा कि हनुमानगढ़ी की सीढ़ियों पर नमाज पढ़वाने का पाप क्यों कराया गया था, ये पाप कांग्रेस और सपा ने किया था. लेकिन अब तीनों लोकों से सुंदर अयोध्या नगरी बन चुकी है. कारसेवकों पर गोलियां चलवाने वाले नेपथ्य में चले गए हैं.
बता दें कि सीएम शुक्रवार को अयोध्या में में ₹432 करोड़ से अधिक की 217 विकास परियोजनाओं के लोकार्पण/शिलान्यास कार्यक्रम में सम्मिलित हुए. इस दौरान उन्होंने मंच से हुंकार भरी. कई मुद्दों पर अपने ही अंदाज में बात कही.
सीएम ने कहा कि मंशा साफ हो तो कार्य अपने आप होते हैं. नीति स्पष्ट हो तो नियंता अपने आप सहयोग करता है. आज वह अयोध्या में दिखाई देता है. प्रभु श्रीराम की कृपा और पवनसुत हनुमान जी का भी असीम आशीर्वाद जब प्राप्त होता है तो अयोध्या के सारे काम अपने आप बढ़ते दिखाई देता है.
कोई सोचा होगा कि अयोध्या में इंटरनेशनल एयरपोर्ट बन पाएगा? ये समाजवादी पार्टी के लोग विरोध करते थे. एयरपोर्ट के नाम पर गुमराह करते थे. आज महर्षि वाल्मीकि के नाम पर अयोध्या इंटरनेशनल एयरपोर्ट देश के सभी प्रमुख शहरों के साथ जुड़ चुका है.
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी और कांग्रेस इसलिए विरोध कर रहे हैं क्योंकि जो काम वे नहीं कर पाए, वो भाजपा सरकार ने कर दिखाया. उन्होंने कहा कि विपक्ष को महर्षि वाल्मीकि के नाम पर इंटरनेशनल एयरपोर्ट और निषादराज गुह के नाम पर रैन बसेरा बनने से आपत्ति है. योगी ने आरोप लगाया कि सपा-कांग्रेस ने श्रृंगवेरपुर में भगवान राम और निषादराज के मिलन स्थल को वक्फ के नाम पर कब्जा करवाने की कोशिश की थी. उन्होंने कहा कि मंदिर निर्माण में बाधा डालने और रामभक्तों पर गोली चलवाने वालों के बावजूद आज डबल इंजन की सरकार में भव्य राम मंदिर का निर्माण पूरा हो चुका है.
हनुमानगढ़ी में नमाज विवाद का सच
वर्ष 2003 में अयोध्या विवाद के शांतिपूर्ण समाधान के लिए हनुमानगढ़ी के महंत ज्ञान दास के आश्रम में रोज़ा इफ्तार का आयोजन किया गया था. इस कार्यक्रम में बाबरी मस्जिद के मुद्दई हाशिम अंसारी सहित कई मुस्लिम नेता शामिल हुए थे, जहां परिसर में नमाज़ पढ़ने का आरोप लगा. यह विवाद गहराने पर हनुमानगढ़ी के ही महंत धर्मदास मामले को लखनऊ उच्च न्यायालय ले गए, जहां से उन्हें परिसर में इफ्तार न कराने का स्टे मिला. वर्ष 2005 में विवाद बढ़ने पर अखाड़ा परिषद के पूर्व अध्यक्ष महंत ज्ञान दास ने भविष्य में वहां दोबारा रोज़ा इफ्तार न कराने का निर्णय लिया.
कुमार अभिषेक