अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे और धन संग्रह को लेकर छिड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक विवाद इस समय देश की सियासत के केंद्र में है. समाजवादी पार्टी, आम आदमी पार्टी और स्थानीय नेताओं के गंभीर आरोपों के बाद मंदिर ट्रस्ट ने भी इस पर अपनी स्थिति साफ की है.
विवाद की शुरुआत अखिलेश यादव के बयान से हुई. समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया 'X' के माध्यम से आरोप लगाया कि मंदिर से करोड़ों रुपये का चढ़ावा गायब है. आम आदमी पार्टी (AAP) नेता संजय सिंह ने भी दान-पात्रों की गिनती और चढ़ावे में बड़ी धांधली होने के गंभीर आरोप लगाया.
यूपी की सपा सरकार में मंत्री रहे पवन पांडे ने दान की गई रकम में 7.5 करोड़ रुपये तक गायब होने की आशंका जताई थी. अब श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने इन सभी दावों को सिरे से खारिज कर दिया है.
कुछ मीडिया रिपोर्टों और चर्चाओं में यह दावा भी किया गया था कि दान-पात्र से पैसे चोरी करने के आरोप में चार लोगों को गिरफ्तार कर कुछ नकदी बरामद की गई है. वहीं, ऑडिट ट्रस्ट का कहना है कि उनकी ओर से लगातार ऑडिट किया जा रहा है और अब तक दान-पात्रों की आय में किसी भी प्रकार की वित्तीय अनियमितता सामने नहीं आई है.
यहां समझें राम मंदिर में आने वाले दान का पूरा गणित
आरोपों की टाइमलाइन ...
7 जून दोपहर 3 बजकर 54 मिनट पर अखिलेश यादव ने 'x' पर एक पोस्ट किया:-
''समस्त विश्व में भगवान राम के उपासकों के लिए ये एक बेहद संवेदनशील समाचार है कि ‘राम मंदिर’ के चढ़ावे की करोड़ों की रकम गायब पायी गई है.
ये मंदिर ट्रस्ट के लिए अत्यंत शर्मनाक स्थिति है. कोई भी सफाई देने के लिए सामने नहीं आना चाहता है.
न्यायालय से स्वतः संज्ञान लेने की मांग है क्योंकि इसका सीधा संबंध वैश्विक स्तर पर समस्त सनातनी समाज की प्रभु राम में गहरी आस्था से जुड़ा है.
सरकार की चुप्पी संदिग्ध है.''
ट्रस्ट के न्यासी महंत दिनेंद्रदास का जवाब
इसके बाद राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के न्यासी और निर्मोही अखाड़े के महंत दिनेंद्रदास ने अखिलेश यादव के बयान पर मीडिया के माध्यम से कहा अगर इस मामले में किसी ने गलत किया है तो भगवान राम स्वयं उन्हें दंडित करेंगे.
महासचिव चंपत राय का आधिकारिक बयान
वहीं, फिर इस मामले में ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने आधिकारिक बयान जारी कर कहा, ''सभी की जानकारी के लिए बता दें कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र का समय समय पर आंतरिक ऑडिट होता है. इस कार्य में ट्रस्ट और भारतीय स्टेट बैंक के प्रतिनिधि सम्मिलित रहते हैं. ऑडिट कार्य कई दिन तक चलता है. वही कार्य आजकल हो रहा है. अभी तक कोई उल्लेखनीय बात सामने नहीं आयी है.''
मयंक शुक्ला