बरेली हिंसा मामले में तौकीर रजा की जमानत याचिका इलाहाबाद HC से खारिज, कहा- फिर भड़का सकते हैं सांप्रदायिक तनाव

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बरेली में हुई सांप्रदायिक हिंसा और आगजनी के मामले में मुख्य साजिशकर्ता मौलाना तौकीर रजा खान की जमानत याचिका कोे खारिज कर दिया है. अदालत ने कहा कि रिहा होने पर उनके द्वारा दोबारा शांति भंग करने का बड़ा जोखिम है.

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मौलाना तौकीर रजा की जमानत याचिका खारिज. (File photo: ITG) मौलाना तौकीर रजा की जमानत याचिका खारिज. (File photo: ITG)

aajtak.in

  • लखनऊ,
  • 07 जून 2026,
  • अपडेटेड 10:26 AM IST

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बरेली हिंसा मामले में मुख्य साजिशकर्ता मौलाना तौकीर रजा खान की जमानत याचिका खारिज कर दी है. अदालत ने कहा कि इस बात का गंभीर जोखिम है कि जमानत मिलने पर वह फिर से खास समुदाय को उकसा सकते हैं और शांति एवं सौहार्द को बिगाड़ सकते हैं. न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल ने 5 जून को ये आदेश सुनाया.

कोर्ट ने टिप्पणी की कि गवाहों के बयान और वीडियो क्लिप से ये संकेत मिलता है कि तौकीर रजा खान ने भड़काऊ भाषण देकर भीड़ को इकट्ठा होने के लिए प्रेरित किया और भीड़ द्वारा किए गए अपराध के लिए मुख्य साजिशकर्ता होने के नाते खान पूरी तरह जिम्मेदार हैं, क्योंकि उनके द्वारा भड़काने के बाद ही भीड़ ने कानून- व्यवस्था हाथ में ली गई. इस हिंसा में कई पुलिसकर्मियों को गंभीर चोटें आई थीं.

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए नोट किया कि भीड़ द्वारा 'गुस्ताख-ए-नबी की एक सजा, सर तन से जुदा, सर तन से जुदा' जैसे विवादित नारे लगाना देश के कानून की सत्ता के साथ-साथ भारत की संप्रभुता और अखंडता को एक सीधी चुनौती है. ये कृत्य सीधे तौर पर एक सशस्त्र (हथियार) विद्रोह की अपील करता है.

न्यायाधीश ने अपने आदेश में स्पष्ट रूप से कहा कि इस तरह की हिंसक और भड़काऊ नारेबाजी करना न केवल भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 152 के तहत एक गंभीर दंडनीय अपराध है, बल्कि ये कृत्य इस्लाम के बुनियादी सिद्धांतों और शिक्षाओं के भी पूरी तरह खिलाफ है.

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जमानत याचिका को नामंजूर करते हुए कहा कि तौकीर रजा खान का इसी तरह के मामलों में एक लंबा और विस्तृत आपराधिक इतिहास रहा है. ऐसे में इस बात का बड़ा जोखिम है कि यदि उन्हें जमानत पर रिहा किया गया, तो वो फिर से एक विशेष समुदाय को भड़का सकते हैं और समाज की शांति व सद्भाव को बिगाड़ सकते हैं.

पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, तौकीर रजा खान ने 26 सितंबर को एक जनसभा में भड़काऊ भाषण देकर मुस्लिम समुदाय के युवाओं को इस्लामिया इंटर कॉलेज में जुटने के लिए उकसाया था, जिसके बाद धारा 163 बीएनएसएस (BNSS) लागू होने के बावजूद लगभग 200-250 लोगों की उग्र भीड़ ने मौलाना आजाद इंटर कॉलेज से श्यामगंज चौराहे की तरफ मार्च किया. इस भीड़ ने हाथों में बोर्ड ले रखे थे और लगातार भड़काऊ नारेबाजी कर रहे थे. मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों द्वारा दी गई चेतावनियों और समझाने-बुझाने के कोशिशों को नजरअंदाज कर पुलिस टीम पर पेट्रोल बम, तेजाब की बोतल, ईंट-पत्थर से हमला कर दिया है. इस दौरान उपद्रवियों के कई राउंड फायरिंग भी की.
इस दौरान हुई भयानक हिंसा में उपद्रवियों द्वारा पुलिसकर्मियों के कपड़े तक फाड़ दिए गए, जिसमें दो अधिकारी गंभीर रूप से घायल हो गए थे और सरकारी संपत्ति को भारी नुकसान पहुंचाया गया था.

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