ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के कई महीनों बाद जुलाई में उनका अंतिम संस्कार होने जा रहा है. ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, 4 जुलाई से अंतिम संस्कार की रस्में शुरू होंगी और 9 जुलाई को उन्हें मशहद में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा. यानी करीब 133 दिन बाद उन्हें दफनाया जाएगा. अंतिम संस्कार में कई महीने की देरी के बाद सवाल उठ रहे हैं कि आखिर इतने दिन खामेनेई की बॉडी को कहां रखा गया था और लंबे वक्त तक कैसे सुरक्षित रखा गया था. इसके साथ ही, मौत के बाद उनकी बॉडी मिलने को लेकर भी कई सवाल उठे थे.
सोशल मीडिया पर खामेनेई की बॉडी को लेकर कई सवाल पूछे जा रहे हैं, जिनमें सबसे ज्यादा सवाल यह पूछा जा रहा है कि इतने दिन से खामेनेई की बॉडी है कहां?
हालांकि, उनकी बॉडी को जहां रखा गया है, उस जगह को लेकर और कैसे उसे सुरक्षित रखा गया है, उसे लेकर कोई भी जानकारी सामने नहीं आई है. लेकिन लोग लगातार उनकी बॉडी की मौजूदा स्थिति को लेकर बात कर रहे हैं. वैसे बॉडी कहां रखी गई है... इस सवाल के अलावा उनकी बॉडी पहले भी कई बार चर्चा में रही है. आइए जानते हैं कि उनकी बॉडी को लेकर अभी तक क्या-क्या सवाल खड़े हो रहे हैं...
क्या खामेनेई सचमुच मारे गए थे?
28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद सबसे बड़ा सवाल यही था कि क्या खामेनेई की मौत हुई है या नहीं. पहले कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में उनके मरने का दावा किया गया, लेकिन ईरान ने काफी लंबे वक्त तक पुष्टि नहीं की थी. इसके बाद सोशल मीडिया पर कई सवाल उठे थे.
अंतिम संस्कार में देरी पर उठे सवाल
खामेनेई के अंतिम संस्कार में हुई देरी के बाद ये मुद्दा राजनीतिक रूप से संवेदनशील पहलुओं में से एक बन गया था. सवाल इसलिए भी था, क्योंकि इसी संघर्ष में मारे गए सीनियर सैन्य कमांडरों और अधिकारियों को पहले ही दफना दिया गया, लेकिन खामेनेई के अंतिम संस्कार से जुड़े बार-बार किए गए वादे पूरे नहीं हो पाए. दरअसल, तेहरान में कई बार उन्हें अंतिम संस्कार और जुलूस को लेकर वादे किए गए थे.
अंतिम संस्कार में देरी शिया इस्लामी परंपरा के संदर्भ में असामान्य मानी जा रही थी, क्योंकि इस परंपरा में आमतौर पर मृतक को जल्द से जल्द दफनाने पर जोर दिया जाता है. शास्त्रीय इस्लामी न्यायशास्त्र (फ़िक़्ह) के मुताबिक, मौत के बाद दफनाने की प्रक्रिया में तेजी लाई जानी चाहिए, सिवाय उन विशेष परिस्थितियों के जब मौत को लेकर संदेह हो या किसी शख्स के जिंदा बचने की संभावना को लेकर चिंता हो. कई शिया धर्मगुरुओं का यह भी मानना है कि अगर अनावश्यक देरी से मृतक के सम्मान को ठेस पहुंचने का खतरा हो, तो ऐसे विलंब से बचना चाहिए. हालांकि, कुछ जानकारों ने कहा कि जंग की स्थिति में ऐसा किया जा सकता है.
बॉडी के हाल पर उठे सवाल
मौत की पुष्टि और धर्म के आधार पर अंतिम संस्कार में देरी पर उठे सवाल के अलावा बॉडी की फिजिकल कंडीशन को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. कुछ वक्त से अंतिम संस्कार न होने से खामेनेई के शव की स्थिति को लेकर अटकलें तेज हो गई थीं. इसी हमले में मारे गए अन्य अधिकारियों के बारे में ईरानी मीडिया रिपोर्टों में बताया गया है कि उनके शव हफ्तों बाद बरामद किए गए और बुरी तरह क्षतिग्रस्त होने के बाद डीएनए टेस्ट के जरिए ही उनकी पहचान हो पाई. अधिकारियों ने खामेनेई के अवशेषों की स्थिति या जगह के बारे में कोई जानकारी जारी नहीं दी. ऐसे में सवाल खड़े होने लगे.
इसके साथ ही, खामेनेई के उत्तराधिकारी की गैर-मौजूदगी भी कई तरह के सवाल खड़े कर रही है. अपने पिता की मौत के बाद सत्ता संभालने वाले मोजतबा खामेनेई हमले के बाद से सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए हैं.
क्या राजनीतिक संदेश है देरी की वजह?
खामेनेई के अंतिम संस्कार से जुड़े इस देरी का एक सियासी पहलू भी है. मुमकिन है कि ईरानी नेतृत्व किसी ऐसे वक्त का इंतजार कर रहा हो, जब देश के अंदर और बाहर एक मजबूत राजनीतिक संदेश दिया जा सके. इसी वजह से कई देशों से लोगों को बुलाया भी गया है. इस्लामी गणराज्य का ऐसे समारोहों का इस्तेमाल राजनीतिक संदेश देने के लिए करने का लंबा इतिहास रहा है.
इसका एक उदाहरण क्रांतिकारी गार्ड्स की कुद्स फोर्स के पूर्व कमांडर कासिम सुलेमानी का अंतिम संस्कार था. कई दिनों तक चले अंतिम संस्कार जुलूस के दौरान सुलेमानी को करमान में दफनाए जाने से पहले काधिमिया, बगदाद, नजफ, कर्बला, अहवाज, मशहद, तेहरान और क़ोम से होकर गुजरना पड़ा.
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