स्विटजरलैंड के ल्यूसर्न में पाकिस्तान का टॉप लीडरशिप अपनी बेइज्जती की स्क्रिप्ट खुद लिख रहा है. ईरान डील में टांग अड़ाने पहुंचे पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ और आर्मी चीफ आसिम मुनीर की ल्यूसर्न में इंटरनेशनल बेइज्जती हो रही है. इससे जुड़ा एक वीडियो क्लिप वायरल हो रहा है.
स्विटजरलैंड के ल्यूसर्न में ईरान डील पर अमेरिका, ईरान के बीच बात हो रही है. यहां पर पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ और आर्मी चीफ आसिम मुनीर भी पहुंचे हैं.
स्विट्जरलैंड के ब्यूरगेनस्टॉक रिसॉर्ट में अमेरिका-ईरान तकनीकी स्तर की वार्ता के दौरान पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ का एक अनोखा और असहज क्षण सोशल मीडिया पर वायरल हो गया.
वायरल हो रहा ये क्लिप काफी मजेदार है. इस क्लिप में अराघची, जेडी वेंस, वार्ताकार कुशनर, शरीफ और मुनीर एक ही फ्रेंम में दिख रहे हैं.
ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कमरे में प्रवेश करते हुए शहबाज शरीफ से संक्षिप्त अभिवादन किया और फिर तुरंत बाहर निकल गए. शहबाज उन्हें रुकने का इशारा करते हैं, हाथ हिलाते हैं लेकिन अराघची तेजी से निकल जाते हैं.
इस दौरान कैमरे में शहबाज शरीफ का चेहरा हैरानी और परेशानी से भरा दिखाई दिया, जैसे वे किसी महत्वपूर्ण मुलाकात का इंतजार कर रहे हों, लेकिन वह इंतजार अधूरा रह गया. मुनीर और शहबाज का इंतजार करता हुआ वीडियो काफी वायरल हो रहा है. वे काफी देर खड़े रहते हैं. इसके बाद अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस शहबाज से मिलने पहुंचते हैं.
यह घटना पाकिस्तान की कूटनीतिक महत्वाकांक्षा और वास्तविकता के बीच की खाई को उजागर करती है. पाकिस्तान ने खुद को अमेरिका-ईरान शांति प्रक्रिया का प्रमुख मध्यस्थ बताने की कोशिश की थी.
इस्लामाबाद मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) के फॉलो-अप के रूप में शहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल असीम मुनीर विशेष रूप से स्विट्जरलैंड पहुंचे थे. प्रधानमंत्री कार्यालय ने इसे “उच्च स्तरीय वार्ता” बताया था, जिसमें पाकिस्तान को क्षेत्रीय शांति का प्रमुख खिलाड़ी दिखाने का प्रयास था. लेकिन वास्तविकता अलग निकली.
अराघची का संक्षिप्त अभिवादन और तुरंत प्रस्थान ईरान की प्राथमिकताओं को दर्शाता है. ईरान अमेरिका के साथ सीधी और प्रत्यक्ष बातचीत चाहता है. और पाकिस्तान को एक सीमा से ज्यादा महत्व देना नहीं चाहता है. यही वजह है कि शहबाज शरीफ तरह तरह की मुद्राएं बनाते रहे गए.
स्विट्जरलैंड के ल्यूसर्न शहर के ब्यूरगेनस्टॉक रिसॉर्ट में हो रही इस बातचीत से डील की आगे की तस्वीर स्पष्ट होगी. पाकिस्तान की विदेश नीति की चुनौतियों को रेखांकित करती है. एक ओर पाकिस्तान खुद को इस्लामिक दुनिया का नेता और क्षेत्रीय मध्यस्थ दिखाना चाहता है, वहीं दूसरी ओर ईरान और अमेरिका जैसे बड़े खिलाड़ी द्विपक्षीय वार्ता को प्राथमिकता दे रहे हैं. कतर भी इस प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभा रहा है, जिससे पाकिस्तान की भूमिका और सीमित हो गई लगती है. शहबाज सरकार के लिए यह कूटनीतिक रूप से असुविधाजनक है.
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