दुबई - जहां टैक्स-फ्री सैलरी, शानदार मॉल, बुर्ज खलीफा और लग्जरी लाइफस्टाइल का सपना हर साल लाखों भारतीय युवाओं को खींचता है. सोशल मीडिया पर पोस्ट की जाने वाली चमक-दमक वाली तस्वीरें देखकर लगता है कि वहां जिंदगी आसान और परफेक्ट है. लेकिन क्या सच में ऐसा है?
23 साल की अनुष्का शर्मा, जो दुबई में अकेली रहकर जॉब कर रही हैं. उन्होंने अपने इंस्टाग्राम वीडियो में इस चमक के पीछे का अंधेरा दिखाया है. उनका वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है और हजारों लोगों की भावनाओं को छू रहा है.
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'लोग सिर्फ टैक्स-फ्री सैलरी देखते हैं, असली कीमत कोई नहीं जानता'
अनुष्का कहती हैं कि घर से दूर रहना, बीमार पड़ने पर अकेले डॉक्टर के पास जाना, हर त्योहार पर सिर्फ वीडियो कॉल पर परिवार को देखना - ये सब इतना आसान नहीं जितना लगता है.
वे बताती हैं कि ऑफिस के लंबे दिन के बाद खाली फ्लैट में लौटना, अचानक घर की याद आना और अहम परिवार के पलों से दूर रहना मानसिक रूप से बहुत थकान भरा हो सकता है.
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सोशल मीडिया vs हकीकत
सोशल मीडिया पर हम सिर्फ वीकेंड ब्रंच, डेजर्ट सफारी और अच्छी सैलरी वाली रील्स देखते हैं. लेकिन जो लोग सच में विदेश में अकेले रह रहे हैं, वे जानते हैं कि इसके पीछे कितनी इमोशनल वॉर चलती है.
दुबई में भारतीयों की संख्या लगभग 35-40 लाख (UAE में सबसे बड़ा विदेशी समुदाय). ज्यादातर युवा बेहतर कमाई और करियर ग्रोथ की तलाश में जाते हैं, लेकिन कई लोग अकेलेपन और घर की यादों से जूझते हैं.
फिर भी क्यों जाते हैं लोग?
अनुष्का का वीडियो सिर्फ शिकायत नहीं है. उन्होंने सकारात्मक नजरिया भी रखा. उनका आखिरी मैसेज बहुत पावरफुल है-याद रखो कि आपने यह सफर क्यों शुरू किया था. आज का त्याग कल आपके परिवार की आर्थिक सुरक्षा और बेहतर भविष्य की नींव बनेगा. कम्फर्ट जोन से बाहर निकलकर मेहनत करना ही असली ताकत है.
सोशल मीडिया पर लोगों ने क्या कहा?
वीडियो वायरल होने के बाद कई यूजर्स ने अनुष्का की बातों से सहमति जताई. कुछ लोगों ने लिखा कि विदेश में रहने वाले ज्यादातर लोग ऐसी भावनाओं से गुजरते हैं, जबकि कुछ ने कहा कि घर से दूर रहकर करियर बनाना आसान नहीं होता.
हालांकि, कुछ यूजर्स ने यह भी कहा कि विदेश में रहने का अनुभव हर व्यक्ति के लिए अलग हो सकता है और इसे सभी पर लागू नहीं किया जा सकता.
दोनों तरफ देखना जरूरी है
एक तरफ दुबई में रहना टैक्स-फ्री इनकम, वर्ल्ड-क्लास इंफ्रास्ट्रक्चर, सेफ्टी, करियर ग्रोथ ये सब है. लेकिन उजाले का स्याह ये है कि इसके साथ हाई लिविंग कॉस्ट, अकेलापन, कल्चरल एडजस्टमेंट, परिवार से दूरी भी साथ आनी है.
एक्सपर्ट इस बारे में कहते हैं कि विदेश जाने से पहले सिर्फ सैलरी पैकेज नहीं, बल्कि मेंटल हेल्थ, सपोर्ट सिस्टम और लॉन्ग-टर्म प्लानिंग पर भी गौर करें. कई लोग अब रिमोट वर्क और हाइब्रिड ऑप्शन्स भी चुन रहे हैं.
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