करियर में आगे बढ़ने के लिए क्या जरूरी है? अच्छी पढ़ाई, लगातार स्किल्स को अपग्रेड करना और सबसे महत्वपूर्ण सही समय पर सही फैसला लेने के साथ जोखिम उठाने की क्षमता. सोशल मीडिया पर वायरल हो रही देवश्री भारतीया की कहानी इसी बात को साबित करती है. उन्होंने भारत में 6 लाख रुपये सालाना (LPA) की नौकरी से करियर की शुरुआत की और आज, उनके मुताबिक, अमेरिका में हाई-पेइंग जॉब कर रही हैं.
देवश्री का कहना है कि इस मुकाम तक पहुंचने में उन्हें करीब तीन साल लगे, लेकिन सही रणनीति अपनाकर दूसरे लोग यह सफर काफी कम समय में तय कर सकते हैं. उन्होंने अपने इंस्टाग्राम पोस्ट में विस्तार से बताया है कि करियर में तेजी से आगे बढ़ने के लिए किन बातों पर ध्यान देना चाहिए.
देवश्री ने लिखा, "मैंने पुणे के एक टियर-3 कॉलेज से ग्रेजुएशन किया और 6 LPA की नौकरी से करियर शुरू किया. आज जहां हूं, उसके बारे में मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था." उनका कहना है कि सफलता सिर्फ किस्मत से नहीं, बल्कि सही दिशा में लगातार की गई मेहनत और रणनीति से मिलती है.
सिर्फ जॉब के लिए अप्लाई करना काफी नहीं
देवश्री का कहना है कि आज के समय में केवल LinkedIn या दूसरे जॉब पोर्टल पर आवेदन करना काफी नहीं है. अगर रिक्रूटर्स खुद आपसे संपर्क करें, तो नौकरी मिलने की संभावना काफी बढ़ जाती है.उन्होंने लिखा कि सैकड़ों नौकरियों के लिए अप्लाई करना जरूरी है, लेकिन अगर रिक्रूटर खुद आपसे संपर्क करे, तो आपको बढ़त मिलती है."
उनके मुताबिक, इसके लिए LinkedIn पर नियमित पोस्ट करना और अपनी प्रोफेशनल पहचान बनाना जरूरी है. उन्होंने साफ किया कि इसके लिए फुल-टाइम कंटेंट क्रिएटर बनने की जरूरत नहीं है. एक दिन में पूरे महीने का कंटेंट शेड्यूल किया जा सकता है.
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फर्जी जॉब पोस्टिंग से रहें सावधान
देवश्री ने नौकरी तलाशने वालों को फर्जी जॉब पोस्टिंग (Ghost Jobs) से भी सावधान रहने की सलाह दी. उनका दावा है कि करीब 30 फीसदी जॉब पोस्टिंग ऐसी होती हैं, जिन पर वास्तव में भर्ती नहीं हो रही होती. ऐसे में कई उम्मीदवार आवेदन करने के बाद जवाब नहीं मिलने पर खुद को रिजेक्ट समझ लेते हैं.
रिज्यूमे में क्या होना चाहिए?
देवश्री के अनुसार, केवल नौकरी का अनुभव लिख देना काफी नहीं है. शुरुआती करियर वाले उम्मीदवारों को अपने प्रोजेक्ट्स, हैकाथॉन, रिसर्च वर्क और स्किल्स को भी रिज्यूमे में शामिल करना चाहिए.
उन्होंने सलाह दी कि हर नौकरी के लिए अलग रिज्यूमे तैयार करें और उसे जॉब डिस्क्रिप्शन के अनुसार कस्टमाइज करें. साथ ही ATS (Applicant Tracking System) के हिसाब से रिज्यूमे को ऑप्टिमाइज करना भी जरूरी है.
ATS (Applicant Tracking System) एक ऐसा सॉफ्टवेयर है, जिसका इस्तेमाल कंपनियां नौकरी के लिए आए हजारों रिज्यूमे को छांटने और योग्य उम्मीदवारों को शॉर्टलिस्ट करने के लिए करती हैं. यह सॉफ्टवेयर रिज्यूमे में मौजूद कीवर्ड, स्किल्स, अनुभव और योग्यता को जॉब डिस्क्रिप्शन से मिलाकर तय करता है कि कौन-सा उम्मीदवार अगले चरण के लिए उपयुक्त है. इसके बाद चुने गए रिज्यूमे HR तक पहुंचते हैं.
इंटरव्यू की तैयारी ऐसे करें
देवश्री के मुताबिक, इंटरव्यू की तैयारी सिर्फ DSA और सिस्टम डिजाइन तक सीमित नहीं होनी चाहिए. उम्मीदवारों को जिस कंपनी में इंटरव्यू देना है, उसके प्रोडक्ट, बिजनेस मॉडल और चुनौतियों के बारे में पहले से जानकारी जुटानी चाहिए. इससे इंटरव्यू में पूछे जाने वाले सवालों का बेहतर अंदाजा लगाया जा सकता है.पोस्ट के आखिर में उन्होंने कहा कि सही दिशा में लगातार की गई मेहनत ने उनकी जिंदगी बदल दी. अब वह चाहती हैं कि दूसरे लोग भी उन्हीं गलतियों से बचें, जिनसे सीखने में उन्हें तीन साल लग गए.
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