रात के 9 बजे भी नहीं होता अंधेरा! डेनमार्क में रहने वाले भारतीय ने दिखाया VIDEO

डेनमार्क में रहने वाले भारतीय आईटी प्रोफेशनल निक बिष्ट का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. वीडियो में वह रात के करीब 9 बजे भी बाहर दिन जैसा उजाला दिखाते हैं और बताते हैं कि उन्हें सोने के लिए घर के ब्लैकआउट पर्दे बंद करने पड़ते हैं. उनके इस वीडियो ने यूरोप में गर्मियों के लंबे दिनों को लेकर लोगों के बीच नई जिज्ञासा पैदा कर दी है.

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 इसके पीछे पृथ्वी का झुकाव (Earth's Tilt) जिम्मेदार है.(Photo:Insta/@Nick Bisht) इसके पीछे पृथ्वी का झुकाव (Earth's Tilt) जिम्मेदार है.(Photo:Insta/@Nick Bisht)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 17 जून 2026,
  • अपडेटेड 10:33 AM IST

भारत में रात के 9 बजते-बजते ज्यादातर जगह अंधेरा हो जाता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि दुनिया में एक ऐसा भी देश है, जहां गर्मियों के दौरान रात के 9 बजे भी बाहर ऐसा उजाला रहता है, जैसे भारत में शाम के 5-6 बजे हों? डेनमार्क में रहने वाले एक भारतीय आईटी प्रोफेशनल ने जब इसका वीडियो शेयर किया, तो सोशल मीडिया पर लोग हैरान रह गए.

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यह वीडियो भारतीय टेक प्रोफेशनल निक बिष्ट ने इंस्टाग्राम पर शेयर किया है. वीडियो की शुरुआत में वह लिखते हैं, "डेनमार्क की एक चीज जो आज भी मुझे हैरान करती है. रात के लगभग 9 बज चुके हैं, लेकिन बाहर अब भी देर दोपहर जैसा उजाला है."

कमरे में रात, बाहर दिन जैसा नजारा

वीडियो में निक अपने कमरे के अंदर दिखाई देते हैं, जहां मोटे पर्दे लगे हैं और लाइट जल रही है. कमरा देखकर लगता है कि रात हो चुकी है. लेकिन जैसे ही वह पर्दा हटाते हैं, बाहर तेज धूप जैसा उजाला दिखाई देता है.निक बताते हैं कि उन्हें कई बार अपने दिमाग को यह महसूस कराने के लिए दिन में ही पर्दे बंद करने पड़ते हैं कि अब सोने का समय हो गया है.

आखिर डेनमार्क में रात 9 बजे भी उजाला क्यों रहता है?

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इसके पीछे पृथ्वी का झुकाव (Earth's Tilt) जिम्मेदार है. पृथ्वी अपनी धुरी पर करीब 23.5 डिग्री झुकी हुई है. गर्मियों के दौरान उत्तरी गोलार्ध में स्थित देशों को सूरज की रोशनी ज्यादा देर तक मिलती है.डेनमार्क उत्तरी यूरोप में स्थित है. जून के आसपास यहां दिन 16 से 18 घंटे तक लंबा हो सकता है. यही वजह है कि रात के 9 बजे भी बाहर दिन जैसा उजाला दिखाई देता है.इसके उलट भारत भूमध्य रेखा के अपेक्षाकृत करीब है. इसलिए यहां पूरे साल दिन और रात की अवधि में बहुत ज्यादा अंतर नहीं आता.

इसलिए लगाते हैं ब्लैकआउट कर्टेन
यूरोप के कई देशों, खासकर डेनमार्क, नॉर्वे, स्वीडन और फिनलैंड में गर्मियों के दौरान लोग ब्लैकआउट कर्टेन का इस्तेमाल करते हैं. ये मोटे पर्दे कमरे में बाहर की रोशनी आने से रोकते हैं, जिससे लोगों को रात जैसा माहौल मिल सके और उनकी नींद प्रभावित न हो.निक बिष्ट भी वीडियो में बताते हैं कि उन्हें सोने से पहले अपने घर के पर्दे पूरी तरह बंद करने पड़ते हैं, क्योंकि बाहर का उजाला देर रात तक बना रहता है.

देखें वीडियो

 

सोशल मीडिया पर लोगों ने क्या कहा?

वीडियो वायरल होने के बाद कई लोगों ने कमेंट कर बताया कि ऑस्ट्रेलिया और यूरोप के कुछ अन्य देशों में भी गर्मियों के दौरान ऐसा ही नजारा देखने को मिलता है. कई यूजर्स ने इसे बेहद दिलचस्प बताया, जबकि कुछ लोगों ने लिखा कि पहली बार यह देखकर उन्हें भी यकीन नहीं हुआ था.

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कौन हैं निक बिष्ट?

निक बिष्ट भारत के एक पहाड़ी इलाके से ताल्लुक रखते हैं और फिलहाल अपने परिवार के साथ डेनमार्क में रहते हैं. वह सोशल मीडिया पर विदेश में अपनी जिंदगी, आईटी करियर और "From Mountains to the Nordics" थीम पर वीडियो शेयर करते रहते हैं.

क्यों वायरल हो रहा है VIDEO?

विदेश में भारतीयों के अनुभवों से जुड़े वीडियो अक्सर लोगों का ध्यान खींचते हैं. लेकिन इस बार सिर्फ एक वीडियो नहीं, बल्कि उसके पीछे छिपा वैज्ञानिक कारण भी लोगों की दिलचस्पी बढ़ा रहा है. रात के 9 बजे भी दिन जैसा उजाला देखने का अनुभव भारत के लोगों के लिए बेहद अलग है, यही वजह है कि यह वीडियो तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है.

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