63 लाख रुपये के पुलिस रोबोट की गई नौकरी, साल भर में नहीं पकड़ पाया एक भी अपराधी

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर लोगों को इतना भरोसा हो रहा है कि डबलिन में एक रोबो कॉप रखा गया. इसे बनने में 63 लाख रुपये लग गए. एक साल तक इस रोबोट ने सर्विस दी, लेकिन एक भी अपराधी नहीं पकड़ पाया ना ही पुलिस की मदद की.

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आजतक टेक्नोलॉजी डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 18 जून 2026,
  • अपडेटेड 5:40 PM IST

AI और रोबोटिक्स को पुलिसिंग का फ्यूचर माना जा रहा है. दुनिया के कई शहरों में पुलिस की मदद के लिए रोबोट तैनात किए जा रहे हैं. लेकिन अमेरिका के ओहायो राज्य के डबलिन शहर में चलाया गया एक ऐसा ही एक्सपेरिमेंट उम्मीदों पर खरा नहीं उतर सका.

करीब एक साल तक ड्यूटी करने के बाद शहर के रोबोट पुलिसकर्मी 'डबबॉट' (DubBot) को रिटायर कर दिया गया है. सबसे दिलचस्प बात यह है कि इस रोबोट ने अपनी पूरी ड्यूटी के दौरान न तो किसी अपराधी को पकड़वाया, न किसी की गिरफ्तारी में मदद की और न ही एक भी चालान कटवाया. इसके बावजूद इस प्रोजेक्ट पर शहर को करीब 63 लाख रुपये खर्च करने पड़े. 

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डबबॉट असल में अमेरिका की टेक कंपनी Knightscope का K5 ऑटोनोमस सिक्योरिटी रोबोट था. इसे जुलाई 2025 में डबलिन शहर के रॉक क्रेस पार्किंग गैरेज में तैनात किया गया था.

बाद में इसे शहर के दूसरे सार्वजनिक इलाकों में भी इस्तेमाल करने की योजना थी. रोबोट में 360 डिग्री कैमरे, टू-वे इमरजेंसी कम्युनिकेशन सिस्टम और एक इमरजेंसी कॉल बटन दिया गया था, जिससे लोग जरूरत पड़ने पर पुलिस से संपर्क कर सकते थे.

डबलिन पुलिस का मानना था कि यह रोबोट भीड़भाड़ वाले इलाकों में निगरानी रखने, सार्वजनिक सुरक्षा बढ़ाने और पुलिस की मदद करने का काम करेगा. शहर ने इसे दो साल के पायलट प्रोग्राम के तहत इस्तेमाल करना शुरू किया था.

हालांकि एक साल के भीतर ही अधिकारियों को लगने लगा कि रोबोट उनकी जरूरतों को पूरा नहीं कर पा रहा है. डबलिन पुलिस की प्रवक्ता रॉबिन ग्रे के मुताबिक, शहर ने समीक्षा के बाद फैसला लिया कि यह सिस्टम वैसा रिजल्ट नहीं दे रहा था जैसी उम्मीद थी. इसी वजह से मई 2026 में डबबॉट को सेवा से हटा दिया गया और वापस उसकी कंपनी नाइटस्कोप को भेज दिया गया.

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रिपोर्ट के मुताबिक, शहर ने शुरुआत में दो रोबोट तैनात करने की योजना बनाई थी. इसके लिए नाइटस्कोप के साथ करीब 2.38 लाख डॉलर यानी लगभग 2 करोड़ रुपये से ज्यादा का समझौता किया गया था.

लेकिन दूसरा रोबोट कभी तैनात ही नहीं हो पाया. कंपनी को उसके विकास के लिए ज्यादा समय चाहिए था और जिस पार्क में उसे लगाया जाना था वहां जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर भी मौजूद नहीं था.

पहले साल में शहर ने इस प्रोजेक्ट पर 1,28,080 डॉलर खर्च किए. बाद में नाइटस्कोप से 60,532 डॉलर की वापसी मिलने के बाद शहर पर वास्तविक खर्च 67,548 डॉलर यानी करीब 63 लाख रुपये रहा.

इतना पैसा खर्च होने के बावजूद डबबॉट के खाते में कोई बड़ी उपलब्धि दर्ज नहीं हुई. शहर के अधिकारियों के अनुसार उसकी गश्त के दौरान न तो कोई गिरफ्तारी हुई, न कोई आपराधिक मामला दर्ज हुआ और न ही किसी को टिकट या चालान जारी किया गया.

इतना ही नहीं, रोबोट ने ऐसा कोई मामला भी नहीं पहचाना जिसमें पुलिस को तत्काल कार्रवाई करनी पड़ती. हालांकि शहर प्रशासन का कहना है कि इस पायलट प्रोग्राम का मकसद सिर्फ गिरफ्तारी या चालान की संख्या बढ़ाना नहीं था. असली मकसद यह देखना था कि वास्तविक परिस्थितियों में ऐसा रोबोट पुलिस की कितनी मदद कर सकता है और भविष्य में इस तरह की तकनीक को अपनाना कितना प्रैक्टिकल होगा.

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AI और रोबोटिक्स को लेकर जितनी उम्मीदें हैं, जमीन पर उतनी ही चुनौतियां भी मौजूद हैं. कैमरे, सेंसर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से लैस होने के बावजूद एक रोबोट हमेशा इंसानी पुलिसकर्मी की जगह नहीं ले सकता. 

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