दुनिया भर में पेट्रोल-डीजल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं और ऐसे में हर कार या बाइक चलाने वाला यही सोचता है कि गाड़ी का माइलेज कैसे बढ़ाया जाए. लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि आपके फोन में मौजूद Google Maps का एक छोटा सा सेटिंग फीचर आपकी जेब का खर्च कम कर सकता है.
दरअसल गूगल मैप्स में एक खास ऑप्शन दिया गया है जिसे Fuel-efficient routes कहा जाता है. यह फीचर आपके लिए सिर्फ सबसे छोटा रास्ता नहीं ढूंढता, बल्कि ऐसा रास्ता चुनता है जिसमें आपकी गाड़ी कम से कम ईंधन खर्च करे. यानी अब सिर्फ दूरी नहीं, बल्कि फ्यूल बचत भी आपके रूट का हिस्सा बन गई है.
जब आप गूगल मैप्स में कहीं जाने के लिए लोकेशन डालते हैं, तो ऐप आमतौर पर सबसे तेज या सबसे छोटा रास्ता दिखाता है. लेकिन हर छोटा रास्ता फ्यूल के लिहाज से बेहतर नहीं होता. क
ई बार छोटे रास्ते में ज्यादा ट्रैफिक, ज्यादा ब्रेक-एक्सिलरेशन या चढ़ाई होती है, जिससे गाड़ी ज्यादा पेट्रोल या डीजल खाती है. यही वो जगह है जहां गूगल मैप्स का यह सेटिंग काम आता है.
अगर आप इस फीचर को ऑन कर देते हैं, तो ऐप आपको ऐसा रास्ता दिखाएगा जहां ट्रैफिक कम हो, गाड़ी स्मूद चले और बार-बार ब्रेक लगाने की जरूरत न पड़े. आसान भाषा में समझें तो यह फीचर आपकी ड्राइविंग को स्मूद बनाने की कोशिश करता है, क्योंकि स्मूद ड्राइविंग में ही सबसे ज्यादा फ्यूल बचता है.
इसे ऑन करना भी बेहद आसान है. आपको Google Maps खोलकर अपने प्रोफाइल या सेटिंग सेक्शन में जाना होता है. वहां Navigation settings में जाकर Prefer fuel-efficient routes या इसी तरह का ऑप्शन मिलता है. इसे ऑन करते ही हर बार रूट चुनते वक्त मैप्स खुद आपको फ्यूल बचाने वाला रास्ता सुझाने लगेगा.
अब इसे एक आसान उदाहरण से समझिए. मान लीजिए आपको ऑफिस जाने में रोज 10 किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता है. अगर आप सामान्य रास्ता लेते हैं तो ट्रैफिक में फंसने की वजह से आपकी गाड़ी ज्यादा फ्यूल खाती है. लेकिन अगर वही रास्ता थोड़ा लंबा हो लेकिन ट्रैफिक कम हो और गाड़ी बिना रुके चलती रहे, तो कुल मिलाकर आपका फ्यूल खर्च कम हो सकता है. यही काम गूगल मैप्स आपके लिए अपने आप करने लगता है.
इतना ही नहीं, यह फीचर अलग-अलग गाड़ियों के हिसाब से भी काम करता है. यानी अगर आपकी गाड़ी पेट्रोल है, डीजल है या हाइब्रिड है, तो उसके हिसाब से भी ऐप बेहतर रूट सुझाने की कोशिश करता है. क्योंकि हर इंजन का फ्यूल कंजम्पशन अलग होता है.
आज के समय में जब रोजाना लाखों लोग नेविगेशन ऐप का इस्तेमाल करते हैं, तो यह छोटा सा बदलाव बड़े असर डाल सकता है. अगर हर यूजर थोड़ा-थोड़ा फ्यूल बचाए, तो न सिर्फ उसकी जेब पर असर पड़ेगा, बल्कि पर्यावरण को भी फायदा होगा. कम फ्यूल खर्च का मतलब कम प्रदूषण.
सबसे दिलचस्प बात यह है कि यह फीचर पहले से ही ऐप में मौजूद है, लेकिन ज्यादातर लोग इसे ऑन ही नहीं करते. यानी हम अपने ही फोन में मौजूद एक ऐसे टूल को नजरअंदाज कर देते हैं जो हर महीने हजारों रुपये बचा सकता है.
आजतक टेक्नोलॉजी डेस्क