वीरेंद्र सहवाग की पहचान 21वीं सदी के सबसे विध्वंसक क्रिकेटरों में की जाती है. वीरू बल्ले के साथ जितना अप्रत्याशित रहे, क्रिकेट को हमेशा के लिए अलविदा कहने का उनका स्टाइल भी बिल्कुल वैसा ही जुदा था. पिछले साल जब सभी उनके जन्मदिन की चर्चा कर रहे थे वीरू ने संन्यास की घोषणा कर दी. आज उनके 38वें जन्मदिन पर वीरू के संन्यास को एक साल पूरे हो चुके हैं. चलिए इस सबसे विस्फोटक और खतरनाक बल्लेबाज की क्रिकेट के मैदान पर कुछ उन उपलब्धियों को याद करते हैं जो आज भी सहवाग के नाम पर बरकरार हैं.
सहवाग ने 2004 में यह रिकॉर्ड पाकिस्तान की धरती पर अपने चिर प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान के खिलाफ बनाया. उन्होंने तब के रिकॉर्ड वीवीएस लक्ष्मण के 281 रनों के स्कोर को पीछे छोड़ते हुए 309 रन बनाए. यह रिकॉर्ड तो क्रिकेट के लगभग सभी प्रशंसकों को पता है. लेकिन यह कम ही लोगों को याद होगा कि इसी पारी के दौरान वीरेंद्र सहवाग और सचिन तेंदुलकर के बीच तीसरे विकेट के लिए 336 रनों की साझेदारी हुई थी जो आज भी इस विकेट के लिए भारत की सबसे बड़ी साझेदारी का रिकॉर्ड है.
वीरेंद्र सहवाग ने पाकिस्तान के मुल्तान में अपना पहला तिहरा शतक बड़े ही रोचक अंदाज में जड़ा. उनसे पहले किसी भी क्रिकेटर ने यह कारनामा नहीं किया था. पहली बार कोई भारतीय तिहरा शतक जड़ने जा रहा था. इस मैच से ठीक चार पारियां पहले वो ऑस्ट्रेलियाई धरती पर अपना पहला दोहरा शतक बनाने की दहलीज पर थे लेकिन उन्होंने छक्का जड़ने की कोशिश की और 195 रन पर आउट हो गए. मुल्तान में यह बात सहवाग के दिमाग में जरूर रही होगी, बावजूद इसके उन्हें आउट होने का कोई भय नहीं था. यह सहवाग ही थे और साथ था उनका बेहद मजबूत आत्मविश्वास जिसने इस अजूबे कारनामे को छक्के के साथ पूरा किया. पूरा हिंदुस्तान उन्हें इतिहास बनाते टीवी पर देख रहा था और इस हैरान करन देने वाले पल को अपने सीने में आज भी सहेज कर रखे हुए हैं. सहवाग से पहले किसी क्रिकेटर ने छक्के से तिहरा शतक पूरा नहीं किया था जबकि उनके बाद भी यह कारनामा केवल एक ही बल्लेबाज, श्रीलंका के कुमार संगकारा ने 2014 में किया.
29 मार्च 2004 को मुल्तान में तिहरा शतक जड़ने के ठीक चार साल बाद 28 मार्च 2008 को सहवाग ने एक बार फिर यह कारनामा कर दिखाया. इस बार दक्षिण अफ्रीकी टीम को सहवाग का ताप झेलना पड़ा. सहवाग तब सर डॉन ब्रैडमैन और ब्रायन लारा के बाद यह कारनामा करने वाले केवल तीसरे क्रिकेटर थे. हालांकि बाद में क्रिस गेल भी इस लिस्ट से जुड़ गए और अब तक केवल चार ऐसे क्रिकेटर हैं जिन्होंने इस उपलब्धि को दो बार अर्जित करने में कामयाबी पायी है. इतना ही नहीं सहवाग इसके बाद एक बार फिर 4 दिसंबर 2009 को श्रीलंका के खिलाफ तिहरा शतक जड़ने की दहलीज पर थे लेकिन 293 रन पर आउट हो गए और केवल सात रनों से यह कारनामा करने से चूक गए. गौरतलब है कि सर डॉन ब्रैडमैन भी अपने करियर के दौरान एक बार 299 पर नॉट आउट रहे थे.
सहवाग के नाम 100 से कम गेंदों में सर्वाधिक सात बार टेस्ट शतक बनाने का रिकॉर्ड दर्ज है. सहवाग ने अपने टेस्ट करियर के दौरान कुल 23 शतक जड़े हैं. उनके बाद एडम गिलक्रिस्ट का नंबर आता है जिन्होंने यह कारनामा छह बार किया. क्रिस गेल ने चार बार तो इयान बॉथम, कपिल देव, ब्रायन लारा, शाहिद अफरीदी और ब्रेंडन मैकलम ने तीन बार यह कारनामा किया. इतना ही नहीं अब तक टेस्ट क्रिकेट में केवल पांच दोहरे शतक ऐसे बने हैं जिन्हें बनाने में 200 से कम गेंदें खेली गईं. इनमें से तीन 168, 182 और 194 गेंदों पर तो अकेले सहवाग के नाम पर हैं. दो अन्य प्लेयर नैथन एस्टल (153 गेंद) और ब्रेंडन मैकलम (186 गेंद) हैं. सहवाग ने टेस्ट क्रिकेट में छह दोहरे शतक जड़े और इनमें से पांच तो 230 गेंदों से कम में बने. यह सहवाग का अजूबा है. क्यों? इसका पता इसी से चलता है कि किसी अन्य बल्लेबाज के नाम टेस्ट क्रिकेट में 250 से कम गेंदों पर दो दोहरे शतक लगाने का रिकॉर्ड भी नहीं है.
वीरेंद्र सहवाग ने जब वनडे क्रिकेट में दोहरा शतक जड़ा तब यह कारनामा सचिन तेंदुलकर कर चुके थे लेकिन सहवाग ने अपनी ही कप्तानी में यह कारनामा किया और वो आज भी वनडे क्रिकेट में दोहरा शतक जड़ने वाले एकमात्र क्रिकेट कप्तान हैं. 8 दिसंबर 2011 को इंदौर के होल्कर स्टेडियम (भारत ने अभी हाल ही में यहां अपना 500वां टेस्ट खेला है) में सहवाग वेस्टइंडीज के खिलाफ भारत की कप्तानी कर रहे थे. टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी के लिए उतरे सहवाग इस दिन अपने अलग ही अंदाज में थे. उन्होंने 25 चौके और सात छक्के की मदद से केवल 149 गेंदों में 219 रन बना दिए. इसके साथ ही वनडे क्रिकेट में सबसे बड़ी कप्तानी पारी के सनथ जयसूर्या के रिकॉर्ड को उन्होंने ध्वस्त कर दिया. इतना ही नहीं यह लगभग तीन सालों तक वनडे का सर्वाधिक व्यक्तिगत स्कोर भी रहा. जिसे भारत के ही रोहित शर्मा ने श्रीलंका के खिलाफ ईडन गार्डन में 13 नवंबर 2014 को तोड़ा और 264 रन बनाए.
सहवाग के नाम एक ऐसा नायाब रिकॉर्ड है जिसे पाना बड़े से बड़े क्रिकेटर के लिए आसान नहीं रहा है. एक समय क्रिकेट के तीनों ही फॉर्मेट में भारतीय टीम की सबसे बड़ी पारी में सबसे बड़ा व्यक्तिगत योगदान देने क्रिकेटर वीरेंद्र सहवाग ही थे. टेस्ट में भारत का सर्वाधिक स्कोर 729/9 (2009 में श्रीलंका के खिलाफ) रहा है. सहवाग ने इस पारी में 293 रन बनाए. वनडे में 418/5 (2011 में वेस्टइंडीज के खिलाफ) भारत का सबसे बड़ा स्कोर है और इस मैच में सहवाग का योगदान 219 रनों का था. ये दोनों रिकॉर्ड तो आज भी बरकरार हैं. लेकिन टी20 में उनका रिकॉर्ड अब ध्वस्त हो चुका है जो उन्होंने 2007 वर्ल्ड टी20 के दौरान इंग्लैंड के खिलाफ डरबन में बनाए थे. उस मैच में भारत ने 218/4 का स्कोर खड़ा किया था और इसमें सर्वाधिक 68 रनों का योगदान सहवाग ने दिया था.
अभिजीत श्रीवास्तव