वैभव सूर्यवंशी, जरा संभलकर... भारतीय क्रिकेट को आपकी बल्लेबाजी चाहिए, झगड़ा नहीं

दांबुला में इंडिया-ए और श्रीलंका-ए के बीच खेले गए सुपर ओवर मुकाबले के बाद वैभव सूर्यवंशी का नाम चर्चा में आ गया. हार के बाद मैदान पर श्रीलंकाई खिलाड़ियों के साथ हुई तीखी नोकझोंक और 'धक्का-मुक्की' ने उनके व्यवहार पर सवाल खड़े कर दिए हैं. 15 साल के इस प्रतिभाशाली बल्लेबाज को भारतीय क्रिकेट का भविष्य माना जा रहा है, लेकिन यह घटना उन्हें यह अहम सीख देती है कि बड़े स्तर पर सफलता के लिए केवल प्रतिभा ही नहीं, बल्कि संयम और अनुशासन भी उतना ही जरूरी है.

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वैभव सूर्यवंशी पर विवाद का साया... (Photo, ITG) वैभव सूर्यवंशी पर विवाद का साया... (Photo, ITG)

विश्व मोहन मिश्र

  • नई दिल्ली,
  • 16 जून 2026,
  • अपडेटेड 12:12 PM IST

क्रिकेट में प्रतिभा आपको सुर्खियां दिलाती है, लेकिन चरित्र आपको महान बनाता है. वैभव सूर्यवंशी के पास प्रतिभा की कोई कमी नहीं है. 15 साल की उम्र में उन्होंने जो कर दिखाया है, वह असाधारण है. मगर दांबुला में श्रीलंका-ए के खिलाफ मुकाबले के बाद जो दृश्य सामने आए, उन्होंने यह याद दिलाया कि भारतीय क्रिकेट के इस उभरते सितारे को अब सिर्फ रन बनाना ही नहीं, बल्कि भावनाओं को नियंत्रित करना भी सीखना होगा. यही वह कदम होगा जो उन्हें प्रतिभाशाली खिलाड़ी से महान खिलाड़ी की ओर ले जाएगा.

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दांबुला में सोमवार को इंडिया-ए और श्रीलंका-ए के बीच खेले गए मुकाबले के बाद जो तस्वीरें सामने आईं, उन्होंने भारतीय क्रिकेट प्रशंसकों को थोड़ा परेशान जरूर किया होगा. सुपर ओवर में हार के बाद युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी का श्रीलंकाई खिलाड़ियों के साथ उलझना, फिर धक्का-मुक्की जैसी स्थिति का बनना, ऐसी चीज है जिससे उन्हें हर हाल में बचना चाहिए.

यह बात इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वैभव कोई साधारण खिलाड़ी नहीं हैं. महज 15 साल की उम्र में उन्होंने जिस तरह भारतीय क्रिकेट में अपनी पहचान बनाई है, उससे उन्हें भविष्य का बड़ा सितारा माना जा रहा है. ऐसे खिलाड़ियों पर सिर्फ रन बनाने की जिम्मेदारी नहीं होती, बल्कि अपने व्यवहार से भी उदाहरण पेश करने की जिम्मेदारी होती है.

हार का दर्द समझा जा सकता है, प्रतिक्रिया नहीं

क्रिकेट भावनाओं का खेल है. खासकर तब जब मुकाबला सुपर ओवर तक जाए और जीत-हार का फैसला आखिरी पलों में हो. ऐसे समय खिलाड़ियों का निराश होना स्वाभाविक है. कई बार विपक्षी खिलाड़ी कुछ कह देते हैं, कुछ तंज कस देते हैं या जीत का जोश जरूरत से ज्यादा दिखा देते हैं.

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... लेकिन अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की ओर बढ़ रहे खिलाड़ी को यही सीखना होता है कि कब जवाब देना है और कब आगे बढ़ जाना है.

महान खिलाड़ियों की सबसे बड़ी पहचान सिर्फ उनकी प्रतिभा नहीं होती, बल्कि दबाव के क्षणों में उनका धैर्य भी होता है. मैदान पर उकसावे का जवाब बल्ले से देना हमेशा शब्दों या हाथों से जवाब देने से बेहतर माना जाता है.

दांबुला में मैच के बाद क्यों गरमाया माहौल?

दांबुला में यह मुकाबला बेहद तनावपूर्ण माहौल में खत्म हुआ. मैच के दौरान ही दोनों टीमों के खिलाड़ियों के बीच टेंशन साफ नजर आ रही थी. भारतीय खिलाड़ियों और श्रीलंकाई टीम के बीच कई मौकों पर तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली, जबकि अंपायर्स के फैसलों को लेकर भी बहस की स्थिति बनी रही.

मैच का नतीजा सुपर ओवर में निकला, जहां श्रीलंका-ए ने जीत दर्ज की. जीत के बाद मैदान पर माहौल और भी गर्म हो गया. कुछ खिलाड़ियों के बीच तंज और जवाबी टिप्पणियों का सिलसिला शुरू हो गया, जिससे तनाव और बढ़ गया.

इसी दौरान एक ऐसा दृश्य सामने आया, जिसने विवाद को बड़ा रूप दे दिया. एक श्रीलंकाई खिलाड़ी और वैभव सूर्यवंशी के बीच कहासुनी हुई और मामला अचानक बढ़ गया. वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि दोनों खिलाड़ियों के बीच धक्का-मुक्की जैसी स्थिति बनती है.

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हालात बिगड़ते देख श्रीलंका के विकेटकीपर और अन्य खिलाड़ियों ने तुरंत बीच-बचाव किया. उन्होंने दोनों पक्षों को अलग करने की कोशिश की और माहौल को शांत करने की पहल की. कुछ ही देर में दोनों टीमों के खिलाड़ी अलग हो गए, लेकिन तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ था.

इसके बाद भी मैदान पर हल्की नोकझोंक और बातचीत का माहौल बना रहा, लेकिन स्टाफ और खिलाड़ियों के हस्तक्षेप से मामला आगे नहीं बढ़ सका.

.... यह पहली बार नहीं है

वैभव के लिए यह पहला मौका नहीं है जब उनके आक्रामक तेवर चर्चा का विषय बने हों. अंडर-19 स्तर पर पाकिस्तान के खिलाफ एक मुकाबले में भी उनके जेस्चर को लेकर चर्चा हुई थी. तब इसे युवा जोश और प्रतिस्पर्धी स्वभाव का हिस्सा मानकर नजरअंदाज कर दिया गया था.

लेकिन जब एक जैसी घटनाएं बार-बार होने लगें तो वे आदत का संकेत भी मानी जाने लगती हैं.

क्रिकेट में आक्रामकता बुरी नहीं है. वास्तव में कई महान खिलाड़ियों ने अपनी आक्रामक मानसिकता के दम पर सफलता हासिल की है. समस्या तब पैदा होती है जब आक्रामकता नियंत्रण से बाहर हो जाए और खेल से ज्यादा चर्चा व्यवहार की होने लगे.

भारतीय क्रिकेट को अगला सितारा चाहिए

भारतीय क्रिकेट इस समय वैभव सूर्यवंशी को बेहद उम्मीद भरी नजरों से देख रहा है. इतनी कम उम्र में उन्होंने जिस तरह गेंदबाजों पर दबदबा बनाया है, वह असाधारण है. लोग उनकी बल्लेबाजी देखने के लिए उत्साहित रहते हैं. चयनकर्ता, कोच और प्रशंसक सभी उनमें भविष्य की बड़ी संभावना देखते हैं.

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लेकिन इतिहास बताता है कि सिर्फ प्रतिभा किसी खिलाड़ी को महान नहीं बनाती. प्रतिभा आपको दरवाजे तक पहुंचाती है, लेकिन अनुशासन, संयम और मानसिक मजबूती आपको उस दरवाजे के भीतर टिकाए रखते हैं.

एक पल की गलती, वर्षों की मेहनत पर भारी

आज सोशल मीडिया का दौर है. पहले खिलाड़ी के शतक की चर्चा होती थी, अब 10 सेकेंड का वीडियो भी सुर्खियां बन जाता है. दांबुला की घटना इसका उदाहरण है. मैच में वैभव ने क्या किया, उससे ज्यादा चर्चा इस बात की हो रही है कि मैच के बाद उन्होंने क्या किया.

यही वजह है कि युवा खिलाड़ियों को अपने व्यवहार को लेकर और ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत होती है. एक छोटी-सी अनुशासनहीनता कई बार ऐसी छवि बना देती है, जिससे बाहर निकलने में वर्षों लग जाते हैं.

बल्ला बोले, गुस्सा नहीं

वैभव सूर्यवंशी की सबसे बड़ी ताकत उनका बल्ला है. उनके शॉट्स, उनका आत्मविश्वास और उनका निडर अंदाज ही उन्हें बाकी खिलाड़ियों से अलग बनाता है. भारतीय क्रिकेट को भी उसी वैभव की जरूरत है जो गेंदबाजों पर हमला करे, मैच जिताए और रिकॉर्ड बनाए.

उन्हें यह समझना होगा कि विरोधी खिलाड़ी उकसाएंगे, तंज कसेंगे और मानसिक दबाव बनाने की कोशिश करेंगे. यही पेशेवर खेल का हिस्सा है. लेकिन जो खिलाड़ी इन सबके बावजूद शांत रहता है, वही अंततः सबसे बड़ा खिलाड़ी बनता है.

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दांबुला की घटना शायद वैभव सूर्यवंशी के लिए एक सीख साबित हो. क्योंकि भारतीय क्रिकेट को उनका गुस्सा नहीं, उनका बल्ला चाहिए. और अगर यह युवा बल्लेबाज अपनी ऊर्जा को सिर्फ खेल पर केंद्रित रखता है, तो आने वाले वर्षों में वह भारतीय क्रिकेट का सबसे चमकदार सितारा बन सकता है.
 

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