बिहार से बेलफास्ट तक... वैभव सूर्यवंशी पर टिकी वर्ल्ड क्रिकेट की नजर, सच‍िन तेंदुलकर भी हो जाएंगे 'बेबी बॉस' से पीछे

महज 15 साल की उम्र में वैभव सूर्यवंशी भारतीय क्रिकेट की सबसे बड़ी सनसनी बन चुके हैं. आईपीएल 2026 में सबसे ज्यादा रन, सबसे ज्यादा छक्के और MVP अवॉर्ड जीतने के बाद अब उनका भारत के लिए डेब्यू तय माना जा रहा है. बिहार के छोटे शहर से निकलकर उन्होंने ऐसा सफर तय किया है, जिसकी तुलना सचिन तेंदुलकर, ब्रायन लारा और लमीन यामाल जैसे दिग्गजों से की जा रही है.

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वैभव सूर्यवंशी का 26 जून को टी20 इंटरनेशनल डेब्यू होना तय है (Photo: Getty) वैभव सूर्यवंशी का 26 जून को टी20 इंटरनेशनल डेब्यू होना तय है (Photo: Getty)

आजतक स्पोर्ट्स डेस्क

  • बेलफास्ट ,
  • 25 जून 2026,
  • अपडेटेड 9:00 PM IST

भारतीय क्रिकेट को लंबे समय बाद ऐसा स्टार क्रिकेटर म‍िला है, जिसके बारे में सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया बात कर रही है. 15 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी अब इंटरनेशनल क्रिकेट में कदम रखने के लिए तैयार हैं. अगर उन्हें गुरुवार (26 जून) को आयरलैंड के खिलाफ पहले टी20 मुकाबले में मौका मिलता है तो वह भारत की सीनियर पुरुष टीम के इतिहास के सबसे युवा खिलाड़ी बन जाएंगे.

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बेलफास्ट में होने वाले मुकाबले में वैभव की उम्र 15 साल और 91 दिन होगी. इसके साथ ही वह किसी भी ICC फुल मेंबर देश के लिए पुरुष टी20 इंटरनेशनल खेलने वाले सबसे कम उम्र के क्रिकेटर बन जाएंगे. मौजूदा रिकॉर्ड आयरलैंड के जोश लिटिल के नाम है, जिन्होंने 16 साल 309 दिन की उम्र में टी20 डेब्यू किया था.

वैभव का नाम पिछले एक साल में क्रिकेट जगत में बिजली की तरह कौंधा है. आईपीएल में अपने पहले ही सीजन की पहली गेंद पर उन्होंने जिस अंदाज में छक्का लगाया, उसने सभी को चौंका दिया.

14 साल की उम्र में दुनिया की सबसे बड़ी क्रिकेट लीग में पहली बार बल्लेबाजी करने उतरे वैभव ने भारत के तेज गेंदबाज शार्दुल ठाकुर की गेंद को एक्स्ट्रा कवर के ऊपर से स्टैंड में पहुंचा दिया था. उसी पल से यह साफ हो गया था कि भारतीय क्रिकेट को कोई असाधारण प्रतिभा मिल चुकी है.

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महान बल्लेबाज सुनील गावस्कर ने उन्हें 'भारतीय क्रिकेट के लिए भगवान का उपहार' तक बताया है. उनका मासूम चेहरा भले ही उनकी उम्र दिखाता हो, लेकिन बल्लेबाजी में उनका आक्रामक अंदाज दुनिया के सबसे अनुभवी गेंदबाजों को भी बेबस कर देता है.

आईपीएल 2026 में वैभव ने इतिहास रच दिया. वह टूर्नामेंट के सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज बने, सबसे ज्यादा छक्के लगाए और सीजन के सबसे मूल्यवान खिलाड़ी (MVP) चुने गए. पुरस्कार में उन्हें एक कार भी मिली, जिसे वह अपनी उम्र के कारण अभी कानूनी रूप से चला नहीं सकते.

ताजपुर  से शुरू होती है वैभव की कहानी
बिहार के छोटे से कस्बे ताजपुर से निकलकर क्रिकेट की दुनिया में सनसनी बनने वाले वैभव की कहानी भी बेहद दिलचस्प है. गंगा नदी और नेपाल सीमा के बीच बसे इस इलाके में उनके पिता संजीव सूर्यवंशी ने चार साल की उम्र में उन्हें पहला बैट दिया था. क्रिकेट प्रेमी पिता ने बेटे की प्रतिभा जल्दी पहचान ली थी.

10 साल की उम्र तक वैभव रोज सुबह लगभग 100 किलोमीटर दूर स्थित नेक्स्ट जेन क्रिकेट अकादमी में अभ्यास के लिए जाया करते थे. उनकी बल्लेबाजी में सबसे खास बात थी गेंद को बेहद ताकत और सफाई से मारना. उनका ऊंचा बैकलिफ्ट देखकर कई लोगों को वेस्टइंडीज के महान बल्लेबाज ब्रायन लारा की याद आती थी.

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महज 12 साल की उम्र में रणजी डेब्यू 
सिर्फ 12 साल की उम्र में उन्होंने बिहार के लिए रणजी ट्रॉफी खेलकर प्रथम श्रेणी क्रिकेट में डेब्यू किया. इसके बाद 13 साल की उम्र में राजस्थान रॉयल्स ने उन्हें 2025 आईपीएल नीलामी में 1.1 करोड़ रुपये में खरीदकर इतिहास रच दिया. अगले सीजन में उन्होंने 776 रन बनाए, 237 के अविश्वसनीय स्ट्राइक रेट से बल्लेबाजी की और 72 छक्के जड़े. इसके बाद राजस्थान की यह खरीद सौदे से कहीं बढ़कर साबित हुई.

आईपीएल में उनका 35 गेंदों में शतक टूर्नामेंट के इतिहास का दूसरा सबसे तेज शतक था. महज तीसरे मैच में आई इस पारी ने उन्हें रातोंरात सुपरस्टार बना दिया.

क्या है वैभव सूर्यवंशी की ताकत 
वैभव की बल्लेबाजी तकनीक भी चर्चा का विषय है. मजबूत कद-काठी, ताकतवर बाजुओं और ऊंचे बैकलिफ्ट के साथ वह गेंद को मैदान के किसी भी हिस्से में भेजने की क्षमता रखते हैं. वह क्रीज में पीछे जाकर शरीर का पूरा इस्तेमाल करते हैं और अपनी कलाईयों की ताकत से शॉट में अतिरिक्त पावर पैदा करते हैं.

क्रिकडॉट कॉम डॉट एयू की र‍िपोर्ट के हवाले से लफबरो यूनिवर्सिटी के स्पोर्ट्स बायोमैकेनिक्स प्रोफेसर मार्क किंग के मुताबिक वैभव अपनी बॉडी का अधिकतम उपयोग करते हैं. उनकी तकनीक में ब्रायन लारा, विवियन रिचर्ड्स और जोस बटलर की झलक दिखाई देती है. ऐसे बल्लेबाज जो देखने में बेहद सहज लगते हैं, लेकिन गेंद पर असाधारण नियंत्रण रखते हैं.

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उनकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि दुनिया के सर्वश्रेष्ठ गेंदबाज भी उनके सामने बेअसर नजर आते हैं. आईपीएल में उन्होंने जसप्रीत बुमराह और पैट कमिंस जैसे गेंदबाजों की पहली गेंद पर छक्के लगाए. इंग्लैंड के पूर्व कप्तान एलिएस्टेयर कुक का कहना है कि वैभव 145 किमी प्रति घंटे की रफ्तार वाली गेंद का इंतजार करते हैं और फिर उसे आसानी से छक्के के लिए भेज देते हैं. यही बात उन्हें बाकी खिलाड़ियों से अलग बनाती है.

कार्टून देखकर वैभव करते हैं तैयारी 
दिलचस्प बात यह है कि क्रिकेट के प्रति उनका नजरिया भी बिल्कुल अलग है. इंग्लैंड के पूर्व कप्तान माइकल वॉन ने हाल ही में कहा था जब वैभव से मैच की तैयारी के बारे में पूछा तो जवाब मिला- कार्टून देखकर. खाने के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा-सब कुछ. वॉन ने मजाक में कहा कि आधुनिक क्रिकेटर की नई परिभाषा यही है कि कार्टून देखो, जो मन करे खाओ और मैदान में जाकर गेंद को स्टेडियम से बाहर पहुंचा दो.

वैभव सूर्यवंशी का सपना क्या है? 
वैभव का सपना सिर्फ भारत के लिए खेलना नहीं है. आईपीएल MVP बनने के बाद उन्होंने कहा था कि वह भारत के लिए तीनों फॉर्मेट खेलना चाहते हैं और 10 से 20 साल तक क्रिकेट पर राज करना चाहते हैं.

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उनकी उपलब्धियां सिर्फ आईपीएल तक सीमित नहीं हैं. इसी साल फरवरी में उन्होंने अंडर-19 वर्ल्ड कप फाइनल में इंग्लैंड के खिलाफ 80 गेंदों पर 175 रन बनाकर भारत को चैम्प‍ियन बनाया. यह किसी भी ICC ग्लोबल  टूर्नामेंट के फाइनल में बनाया गया सर्वोच्च व्यक्तिगत स्कोर है.

इसके बाद भारत ए के लिए खेलते हुए उन्होंने श्रीलंका ए के खिलाफ 29 गेंदों पर 94 रन ठोक दिए. इस पारी में उन्होंने केवल एक डॉट बॉल खेली और महज 11 गेंदों में अर्धशतक पूरा किया, जो 50 ओवर क्रिकेट में सबसे तेज फिफ्टी का रिकॉर्ड है.

क्या सच‍िन तेंदुलकर का र‍िकॉर्ड तोड़ेगे वैभव? 
अगर आयरलैंड के खिलाफ उन्हें मौका मिलता है तो वह सचिन तेंदुलकर के रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ देंगे. सचिन ने 16 साल 205 दिन की उम्र में टेस्ट डेब्यू किया था. इंटरनेशनल क्रिकेट में उनसे कम उम्र में डेब्यू करने वाले खिलाड़ियों में केवल पाकिस्तान के हसन रजा का नाम आता है, जिन्होंने 1996 में 14 साल 227 दिन की उम्र में टेस्ट क्रिकेट खेला था.

ICC ने 2020 में इंटरनेशनल क्रिकेट के लिए न्यूनतम आयु सीमा 15 वर्ष तय कर दी थी. ऐसे में वैभव इस नियम के तहत इंटरनेशनल क्रिकेट खेलने वाले सबसे कम उम्र के खिलाड़ियों में शामिल होंगे.

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खेल जगत में इतनी कम उम्र में इस स्तर की सफलता बहुत कम देखने को मिलती है. फुटबॉल में पेले ने 17 साल की उम्र में ब्राजील को वर्ल्ड कप जिताया था, जबकि लामीन यामाल ने 16 साल की उम्र में स्पेन को यूरो कप दिलाने में अहम भूमिका निभाई. टेनिस में  मार्टिना हिंगिस, मोनिका सेलेस और जेनिफर कैप्रियाती ने किशोरावस्था में इतिहास रचा था. अब क्रिकेट में वैभव सूर्यवंशी का नाम उसी सूची में शामिल होता दिखाई दे रहा है.

फिलहाल दुनिया की निगाहें 26 जून को बेलफास्ट पर हैं. भारत को शायद अपना अगला सुपरस्टार मिल चुका है और क्रिकेट जगत यह देखने को उत्सुक है कि 15 साल का यह लड़का इंटरनेशनल मंच पर कितना बड़ा धमाका करता है.

 

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