4 महीने पहले बनी वर्ल्ड चैम्पियन, अब लगातार हार से बेहाल... आखिर टीम इंडिया को क्या हो गया?

आयरलैंड के खिलाफ शर्मनाक सीरीज हार और फिर इंग्लैंड दौरे पर खराब प्रदर्शन को सिर्फ बदलाव के दौर का हिस्सा बताकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. भारतीय टीम के लिए अब सबसे बड़ी चुनौती सिर्फ जीत की पटरी लौटना नहीं, बल्कि टी20 क्रिकेट में अपना दबदबा बनाने की है.

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श्रेयस अय्यर की कप्तानी में भारतीय टीम का निराशाजनक प्रदर्शन (Photo: Reuters) श्रेयस अय्यर की कप्तानी में भारतीय टीम का निराशाजनक प्रदर्शन (Photo: Reuters)

आजतक स्पोर्ट्स डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 09 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 2:52 PM IST

चार महीने पहले आईसीसी मेन्स टी20 वर्ल्ड कप जीतने वाली टीम इंडिया का प्रदर्शन अचानक पटरी से उतर गया है. आयरलैंड के खिलाफ 0-2 से सीरीज हार के बाद अब इंग्लैंड दौरे पर भी टीम की कमजोरियां खुलकर सामने आ गई हैं. नॉटिंघम के ट्रेंट ब्रिज मैदान पर इंग्लिश टीम के हाथों मिली 125 रनों की शर्मनाक हार ने टीम इंडिया के 'रीसेट प्लान' पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं.

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कप्तान श्रेयस अय्यर ने नॉटिंघम में बल्लेबाजों के प्रदर्शन को 'बेहद खराब और अस्वीकार्य' बताया. वहीं, हेड कोच गौतम गंभीर टीम में हो रहे बड़े बदलावों को 'रीसेट' का हिस्सा बता चुके हैं. लेकिन टीम इंडिया के प्रदर्शन को देखकर सवाल उठ रहा है कि क्या यह वास्तव में बदलाव का दौर है या भारतीय टी20 टीम अपनी पुरानी पहचान खोती जा रही है?

टी20 वर्ल्ड कप 2026 के बाद भारतीय टीम में कई बड़े बदलाव किए गए. सूर्यकुमार यादव की जगह श्रेयस अय्यर को कप्तानी सौंपी गई, जबकि हार्दिक पंड्या और जसप्रीत बुमराह जैसे अनुभवी खिलाड़ी मौजूदा टीम का हिस्सा नहीं हैं. गौतम गंभीर नई टीम तैयार करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन सिर्फ बदलाव को लगातार हार की वजह नहीं माना जा सकता. भारतीय टीम उस आक्रामक क्रिकेट को जारी रखना चाहती है, जिसने उसे टी20 वर्ल्ड कप जिताया था. लेकिन मौजूदा टीम के पास ना तो वैसा अनुभव है और ना ही मुश्किल परिस्थितियों से निकलने की क्षमता दिखाई दे रही है.

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कप्तान का बल्ला भी शांत दिख रहा
श्रेयस अय्यर के लिए टी20 कप्तानी की शुरुआत आसान नहीं रही है. बतौर बल्लेबाज उनके प्रदर्शन में निरंतरता की कमी देखने को मिली है. पिछली पांच पारियों में उनके स्कोर 3, 10, 68, 37 और 5 रन रहे हैं. इसके अलावा कप्तान के तौर पर उनके कुछ फैसलों ने भी सवाल खड़े किए हैं. नॉटिंघम टी20I में शिवम दुबे से पहले हर्षित राणा को बल्लेबाजी के लिए भेजने का फैसला हैरान करने वाला रहा. इस फैसले से ऐसा लगा कि टीम इंडिया किसी तय रणनीति के साथ मैदान पर उतरने के बजाय मुश्किल परिस्थितियों में लगातार नए प्रयोग कर रही है. बल्लेबाजी क्रम में लगातार बदलाव खिलाड़ियों की भूमिका को लेकर भ्रम पैदा कर सकता है.
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IPL की खुमारी शायद उतरी नहीं
भारतीय बल्लेबाज इंग्लैंड और आयरलैंड की परिस्थितियों के मुताबिक खुद को ढाल नहीं पाए हैं. इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) में आमतौर पर सपाट पिचों और बल्लेबाजी के अनुकूल परिस्थितियों में लगातार आक्रामक क्रिकेट खेलने का फायदा मिलता है. लेकिन इंग्लैंड-आयरलैंड में गेंद को मिलने वाली सीम और स्विंग के सामने यही रणनीति टीम इंडिया के लिए परेशानी का सबब बन गई है. भारतीय बल्लेबाज परिस्थितियों के मुताबिक समय लेकर बल्लेबाजी करने के बजाय लगातार बड़े शॉट खेलने की कोशिश कर रहे हैं. हाई रिस्क क्रिकेट के कारण लगातार विकेट गिर रहे हैं. ईशान किशन और अभिषेक शर्मा ने कुछ मौकों पर अच्छी बल्लेबाजी जरूर की है, लेकिन दोनों अपने प्रदर्शन में निरंतरता नहीं दिखा सके हैं.

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वैभव और संजू को लेकर जद्दोजहद
टीम इंडिया के सामने एक बड़ा सवाल संजू सैमसन और वैभव सूर्यवंशी को लेकर भी खड़ा हो गया है. सैमसन को 5, 0 और 1 रनों की पारियों के बाद प्लेइंग इलेवन से बाहर कर दिया गया. उनकी जगह 15 साल के वैभव सूर्यवंशी को मौका दिया गया. हालांकि, वैभव अब तक 14 और 13 रनों की पारियां ही खेल सके हैं. वैभव की प्रतिभा पर कोई सवाल नहीं है. आईपीएल 2026 में उन्होंने अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी से दुनियाभर को प्रभावित किया था. लेकिन आयरलैंड और इंग्लैंड जैसी मुश्किल विदेशी परिस्थितियों में उन्हें उतारने के फैसले पर सवाल उठ रहे हैं. सवाल यह है कि क्या टीम मैनेजमेंट ने एक युवा खिलाड़ी को तैयार होने के लिए पर्याप्त समय दिए बिना सीधे मुश्किल परिस्थितियों में उतार दिया? वहीं, टी20 वर्ल्ड कप 2026 के 'प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट' रहे संजू को सिर्फ 3 खराब पारियों के बाद बाहर करने के फैसले पर बहस जारी है.
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गेंदबाजी में धार नहीं दिख रही
सिर्फ बल्लेबाजी ही नहीं, टीम इंडिया की गेंदबाजी भी उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर सकी है. जसप्रीत बुमराह और हार्दिक पंड्या जैसे अनुभवी खिलाड़ियों की गैरमौजूदगी का असर टीम के संतुलन पर साफ दिखाई दे रहा है. ओल्ड ट्रैफर्ड में रवि बिश्नोई ने 60 रन खर्च किए और तीन बैकफुट नो-बॉल भी फेंकीं. उनका प्रदर्शन टीम इंडिया की मौजूदा परेशानियों की एक तस्वीर पेश करता है. युवा गेंदबाजों को मौके दिए जा रहे हैं, लेकिन मुश्किल परिस्थितियों में अनुभवी खिलाड़ियों की गैरमौजूदगी टीम को भारी पड़ती नजर आ रही है.

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टी20 वर्ल्ड कप जीतने वाली भारतीय टीम सिर्फ आक्रामक बल्लेबाजी के कारण सफल नहीं हुई थी. उस टीम की सबसे बड़ी ताकत परिस्थितियों के मुताबिक अपने खेल को बदलना था. जरूरत पड़ने पर बल्लेबाज आक्रामक क्रिकेट खेलते थे और मुश्किल समय में पारी संभालने की जिम्मेदारी भी उठाते थे. मौजूदा भारतीय टीम आक्रामक क्रिकेट की उसी रणनीति को दोहराने की कोशिश कर रही है, लेकिन धैर्य और परिस्थितियों को समझने की क्षमता गायब नजर आ रही है.

गौतम गंभीर का टीम इंडिया को भविष्य के लिए तैयार करने का फैसला गलत नहीं कहा जा सकता. युवा खिलाड़ियों को मौका देना और नई टीम तैयार करना किसी भी टीम के लिए जरूरी है. लेकिन सफल बदलाव के लिए खिलाड़ियों की भूमिका, टीम की रणनीति और चयन को लेकर स्पष्टता होना भी उतना ही आवश्यक है.

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