इंग्लैंड दौरे पर भारतीय टीम की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रहीं. तीसरे टी20 मुकाबले में भारत को 125 रनों से करारी हार झेलनी पड़ी. 202 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए पूरी टीम महज 76 रनों पर सिमट गई. यह टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में भारत का दूसरा सबसे कम स्कोर है. लेकिन इस शर्मनाक हार के बीच सबसे ज्यादा चर्चा जिस पल की हुई, वह था 15 साल के वैभव सूर्यवंशी और जोफ्रा आर्चर का मुकाबला.
डेब्यू मैच में अपनी आक्रामक बल्लेबाजी से प्रभावित करने वाले वैभव के खिलाफ इस बार इंग्लैंड पूरी तैयारी के साथ उतरा था. सामने थे 145 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से गेंद फेंकने वाले जोफ्रा आर्चर. मेजबान टीम का प्लान साफ था- वैभव को खुलकर खेलने का मौका ही मत दो.
आर्चर-टंग की रफ्तार के आगे बिखर गई टीम इंडिया
इंग्लैंड ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 201/7 का चुनौतीपूर्ण स्कोर खड़ा किया. जवाब में भारतीय बल्लेबाज शुरुआत से ही अतिरिक्त उछाल और तेज रफ्तार के सामने असहज दिखे.
जोफ्रा आर्चर (3-0-29-3) और जोश टंग (4-0-28-4) ने नई गेंद से ऐसा दबाव बनाया कि भारत लगातार विकेट गंवाता चला गया. दोनों ने फुल लेंथ की जगह बैक ऑफ लेंथ और शॉर्ट गेंदों पर ज्यादा भरोसा किया. नतीजा यह हुआ कि भारतीय बल्लेबाज न आगे बढ़कर खेल पाए और न ही बैकफुट पर सहज दिखे.
वैभव के लिए पहले से तैयार था 'शॉर्ट बॉल ट्रैप'
मैच की सबसे दिलचस्प लड़ाई वैभव सूर्यवंशी और जोफ्रा आर्चर के बीच देखने को मिली.
इंग्लैंड जानता था कि वैभव नई गेंद पर आक्रामक शुरुआत करना पसंद करते हैं. इसलिए आर्चर ने उन्हें ड्राइव का मौका देने की बजाय शरीर की तरफ उठती गेंदों से परखने का फैसला किया.
दूसरे ओवर की चौथी गेंद पर आर्चर ने 145 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से लेग स्टंप की लाइन पर तेज शॉर्ट गेंद फेंकी. वैभव ने अपने स्वाभाविक अंदाज में हुक शॉट खेलने की कोशिश की, लेकिन गेंद की रफ्तार इतनी ज्यादा थी कि वह शॉट के लिए पर्याप्त जगह नहीं बना सके. गेंद उनके दस्ताने का हल्का किनारा लेकर विकेटकीपर जोस बटलर के दस्तानों में समा गई. अंपायर ने तुरंत आउट दिया और वैभव बिना रिव्यू लिए पवेलियन लौट गए. उस समय भारत का स्कोर 29/2 था.
यह विकेट नहीं, पूरी रणनीति की जीत थी
वैभव का विकेट किसी एक शानदार गेंद का नतीजा भर नहीं था. यह इंग्लैंड की पहले से तैयार की गई रणनीति का हिस्सा था.
पहले वैभव को गति और उछाल का अहसास कराया गया, फिर ऐसी शॉर्ट गेंद फेंकी गई जिस पर बल्लेबाज के पास प्रतिक्रिया देने के लिए बेहद कम समय था. आर्चर की रणनीति साफ थी- वैभव को आक्रामक शॉट खेलने के लिए उकसाना और उनकी इसी प्रवृत्ति का फायदा उठाना.
यही वजह रही कि वैभव का विकेट इंग्लैंड के लिए सिर्फ एक सफलता नहीं, बल्कि उनके 'शॉर्ट बॉल ट्रैप' की कामयाबी बन गया.
अब वैभव के सामने नई चुनौती
15 साल की उम्र में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेल रहे वैभव सूर्यवंशी के लिए यह किसी असफलता से ज्यादा एक सीख है. अब विरोधी टीमें उन्हें हल्के में नहीं लेंगी. उनकी बल्लेबाजी का विश्लेषण होगा, योजनाएं बनेंगी और कमजोरियों पर लगातार हमला होगा.
अब असली चुनौती वैभव के सामने है. क्या वह अगली बार शॉर्ट गेंदों के खिलाफ बेहतर तैयारी के साथ उतरेंगे? अगर इसका जवाब 'हां' है, तो यही 145 KMPH की बाउंसर उनके करियर की सबसे बड़ी सीख भी साबित हो सकती है.
दिलचस्प यह रहा कि इस बल्लेबाजी विफलता का हिस्सा रहे कप्तान श्रेयस अय्यर भी टीम पर बरस पड़े. मैच के बाद उन्होंने प्रदर्शन को 'Atrocious and Unacceptable' (बेहद खराब और अस्वीकार्य) बताया. यह बयान सिर्फ खिलाड़ियों पर सवाल नहीं उठाता, बल्कि कप्तान के तौर पर उनकी जिम्मेदारी पर भी चर्चा छेड़ता है.
आजतक स्पोर्ट्स डेस्क